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एआई दौर में मौकों से ज्यादा ‘पहल का जज्बा’ जरूरी: बच्चों को दें अपनी तकदीर खुद गढ़ने का भरोसा; भाग्य भरोसे रहने वाले मात खाएंगे

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अगर आपको अपने बच्चों में कोई एक गुण चुनना हो, तो शायद आप तेज दिमाग, दयालुता या बड़ों के सम्मान को प्राथमिकता दें। पर सिडनी यूनिवर्सिटी की अर्थशास्त्री देबोराह कॉब-क्लार्क के अनुसार सबसे अहम गुण है ‘इंटरनल लोकस ऑफ कंट्रोल’। यानी यह विश्वास कि हमारी मेहनत, फैसले और कर्म ही जीवन की दिशा तय करते हैं, न कि केवल किस्मत या बाहरी परिस्थितियां। 1960 के दशक में मनोवैज्ञानिक जूलियन रोटर ने ‘लोकस ऑफ कंट्रोल’ का सिद्धांत दिया। इसके अनुसार व्यक्ति जीवन पर नियंत्रण किसे मानता है। ‘इंटरनल’ सोच वाले लोग मानते हैं कि उनकी मेहनत, फैसले और पहल उनके भविष्य को आकार देते हैं। वहीं ‘एक्सटर्नल’ सोच वाले अपनी सफलता या विफलता का श्रेय किस्मत, परिस्थितियों या दूसरों के फैसलों को देते हैं। शोध बताते हैं कि यह सोच जीवन के कई अहम क्षेत्रों को प्रभावित करती है। जर्मनी में बेरोजगार लोगों पर हुई स्टडी में पाया गया कि इंटरनल मानसिकता वाले लोग नौकरी पाने के लिए ज्यादा कोशिश करते रहे, क्योंकि उन्हें अपनी कोशिशों पर भरोसा था। दूसरी ओर, एक्सटर्नल सोच वाले जल्दी हार मान बैठे और अपेक्षाकृत कम सैलरी वाली नौकरियों से समझौता कर लिया। लेखिका केट हॉल और अन्य शोधकर्ताओं के प्रयोग बताते हैं कि लोग अक्सर प्रभाव डालने की अपनी क्षमता कम करके आंकते हैं। शिकागो यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार बड़े फैसलों को लेकर हिचक रहे लोगों ने थोड़े से प्रोत्साहन के बाद बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए और बाद में खुद को ज्यादा संतुष्ट व खुश पाया। यानी लोग मौकों से नहीं, बल्कि पहल करने के आत्मविश्वास की कमी से पीछे रह जाते हैं। आधुनिक वर्कप्लेस और एआई के दौर में ‘इंटरनल लोकस’ अहम हो गया है। शेनझेन की कंपनियों पर हुई स्टडी के अनुसार ऐसी सोच वाले कर्मचारी एआई को नए कौशल के रूप में अपनाते हैं जबकि अन्य इसे नौकरी के लिए खतरा मानते हैं। एआई एक्सपर्ट आंद्रे कार्पेथी भी मानते हैं कि खुद जिम्मेदारी लेने का जज्बा बुद्धिमत्ता से दुर्लभ और शक्तिशाली है। इसलिए बच्चों में सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि अपनी तकदीर खुद गढ़ने का भरोसा भी विकसित करना चाहिए। बचत, स्टार्टअप व बेहतर परवरिश तक में इसका असर ‘इंटरनल लोकस’ का असर सिर्फ करियर तक सीमित नहीं होता, बल्कि जीवन के कई अहम क्षेत्रों में दिखता है। ऐसे लोग पैसों के मामले में ज्यादा अनुशासित होते हैं। साथ ही बचत व निवेश को गंभीरता से लेते हैं। यही सोच उन्हें नए विचारों को हकीकत में बदलने और कारोबार शुरू करने का जोखिम उठाने का आत्मविश्वास भी देती है। इसका असर बच्चों की परवरिश पर भी पड़ता है। मैड्रिड के शोधकर्ताओं के अनुसार, ऐसी माताएं बच्चों के कौशल व विकास पर ज्यादा ध्यान देती हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि उनकी मेहनत और मार्गदर्शन बच्चे के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।



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