एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या कुछ करियर में “डीजे’ अकेलापन दूर करने का तरीका है?
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या कुछ करियर में “डीजे’ अकेलापन दूर करने का तरीका है?

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हमारी कुक कमला शाहू महीने में कम-से-कम दस बार हमसे शिकायत करती हैं कि वे कभी भी रात 2 बजे से पहले नहीं सो पातीं। ऐसा तब है, जब वे रोज रात 8 बजे हमारे घर से चली जाती हैं और पांच मिनट के वॉकिंग डिस्टेंस पर ही रहती हैं। इसकी वजह उनका तीसरा अविवाहित बेटा सतीश है, जो नौकरी के बाद डिस्क जॉकी (डीजे) का काम भी करता है और होटल से रात 1.30 बजे लौटता है। कमला उसे खाना परोसने के बाद ही सो पाती हैं। पिछले महीने जब सतीश की शादी हुई, तो मैंने यूं ही उससे कहा कि चूंकि तुम्हारी शादी हो गई है तो अब डीजे का काम छोड़ सकते हो। लेकिन सतीश ने मुझे अलग नजरिया दिया। उसने बताया कि वह एक बड़ी फर्म के बैकएंड में काम करता है, जहां अकेलापन बहुत परेशान करता है। इसलिए डीजे पूरे दिन क्रिएटिव बने रहने में उसकी मदद करता है। उसने कहा कि ‘डीजे म्यूजिक पूरी तरह जाने-पहचाने साउंड्स को नए संदर्भ में पेश करने पर आधारित होता है। कोई अनपेक्षित मैश-अप या चतुराई भरे ट्रांजिशन को सुनना आपके दिमाग को सिखाता है कि रोजमर्रा के काम में भी दो बिल्कुल अलग कॉन्सेप्ट को कैसे जोड़ा जाए।’ उसने कहा कि दुनिया के कई बेहद अमीर आंत्रप्रेन्योर्स कुछ घंटों के लिए डीजे का काम करते हैं, क्योंकि यह कई अहम तरीकों से आपकी कल्पनाशक्ति बढ़ाने के लिए ताकतवर उत्प्रेरक का कार्य करता है। घर लौटकर मैंने उन प्रमुख आंत्रप्रेन्योर्स की सर्च की, जो कॉग्निटिव क्रिएटिविटी बढ़ाने के लिए डीजे म्यूजिक इस्तेमाल करते हैं। जाहिर तौर पर डीजे सेट्स के साथ जुड़ने से उन खास न्यूरल पाथ-वे की एक्सरसाइज होती है, जो इनोवेटिव प्रॉब्लम सॉल्विंग, कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी और इमोशनल एक्सप्रेशन से संबंधित होते हैं। ऑनलाइन जिस पहले व्यक्ति का नाम मुझे दिलचस्प लगा, वह लंदन की फैमिली लॉ फर्म ‘साउथगेट सॉलिसिटर्स’ के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर हसन हादी थे। उन्होंने पिछले साल डीजेइंग शुरू की और पाया कि इससे न सिर्फ उनकी क्रिएटिविटी में फायदा हुआ, बल्कि वे काम पर फोकस भी कर पाते हैं। सतीश का भी यही दावा है। शौकिया डीजेइंग करने वाले फाउंडर्स में गोल्डमैन सैक के चीफ एक्जीक्यूटिव डेविड सोलोमन, बीबीसी के ‘ड्रैगन्स डेन’ शो के पैनलिस्ट स्टीवन बार्टलेट और 4 बिलियन डॉलर की एआई वीडियो क्रिएटर कंपनी सिंथेसिस के को-फाउंडर और चीफ एक्जीक्यूटिव विक्टर रिपरबेली शामिल हैं। शॉपिफाई के प्रेसिडेंट हार्ले फिंकेलस्टीन ने किशोरावस्था में डीजे कंपनी शुरू की थी और आज भी अकसर अपनी कंपनी के कॉरपोरेट इवेंट्स में डीजेइंग करते हैं। रोजमर्रा में हादी अपनी लॉ फर्म का मैनेजमेंट, नेतृत्व और सुपरविजन संभालते हैं। हालांकि अब वे केसवर्क नहीं देखते, लेकिन युवा कानूनी पेशेवरों को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में मदद करते हैं। वे कहते हैं, ‘दिन में लॉ फर्म मैनेज करना और फिर डीजेइंग करना, दोनों के लिए समान स्किल चाहिए।’ वे सही भी हैं। वकीलों और डीजे, दोनों को माहौल समझना पड़ता है, उसी स्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। तात्कालिक परिस्थितियों से निपटना पड़ता है। चाहे अदालत में सुनवाई हो या क्लाइंट के साथ बिजनेस मीटिंग, दोनों में ही मौके के अनुसार ही खुद को ढालना पड़ता है। दिलचस्प यह है कि कुछ लोग 60 साल की उम्र में भी डीजेइंग शुरू करते हैं। जैसे, टीना वुड्स, जिन्हें डीजे टीना भी कहते हैं। उन्होंने ब्रिटेन में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत हेल्थ इनोवेशन कंसल्टेंसी ‘कोलाइडर हेल्थ’ स्थापित की है। आज 62 की उम्र में टीना कहती हैं कि ‘आंत्रप्रेन्योर होना बेहद अकेलेपन से भरा है और डीजे मुझे सामाजिक रूप से कनेक्ट रखता है।’ ऐसे फाउंडर्स की सूची बहुत लंबी है, जो आज डीजेइंग कर रहे हैं या जिन्होंने कंपनी स्टार्ट करने से पहले डीजेइंग शुरू की थी। लेकिन यदि आप उनमें से हैं, जो दिनभर के कारोबार या हाई-प्रेशर जॉब के बाद घर जाकर सो जाते हैं और अगले दिन फिर वही शुरू करते हैं तो अगर आपको डीजेइंग असहज लगती है तो तनावमुक्त होने के लिए म्यूजिक का सहारा ले सकते हैं। फंडा यह है कि जीवन में या वर्कप्लेस पर अकेलेपन को मात देने के लिए आपको जरूर कोई तरीका खोजना चाहिए। किसी के साथ म्यूजिक सुनना भी एक थेरेपी है, जिसे आजमाया जा सकता है।



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