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हरिद्वार में अगले साल होने वाले कुंभ में कोई अपना बिछड़ा या सामान खोया, तो उसे ढूंढने के लिए कहीं भी चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार पूरे कुंभ क्षेत्र के लिए डिजिटल ‘लास्ट एंड फाउंड पोर्टल’ तैयार कर रही है, जिसमें बिछड़े लोगों और खोए सामान का रिकॉर्ड एक जगह दर्ज होगा। खास बात यह है कि पोर्टल सिर्फ शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा। खोई और मिली जानकारी को आपस में मैच करने की व्यवस्था होगी। यह सिस्टम कैसे काम करेगा और कुंभ में पहले खोया-पाया व्यवस्था का अनुभव कैसा रहा है, इस रिपोर्ट में पढ़िए… ऐसे काम करेगा डिजिटल ‘लास्ट एंड फाउंड’ सिस्टम पोर्टल पर लापता व्यक्ति और खोई वस्तु के लिए अलग-अलग जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था होगी। लापता व्यक्ति के मामले में नाम, उम्र, पहचान से जुड़ी जानकारी, कपड़ों का विवरण, साथ आए लोगों की जानकारी और उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज किए जा सकेंगे। इसी तरह खोए सामान की पहचान से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड होगी। बैग, मोबाइल, दस्तावेज या दूसरी वस्तु मिलने पर उसकी जानकारी भी सिस्टम में दर्ज की जा सकेगी। इसके बाद पोर्टल में मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर खोई और मिली जानकारी का मिलान किया जा सकेगा। इससे किसी एक केंद्र पर दर्ज शिकायत को दूसरे केंद्रों पर तलाशने की प्रक्रिया आसान होगी। बिछड़े लोगों को मिलाने में सबसे ज्यादा मदद कुंभ के स्नान पर्वों के दौरान भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में परिवार के सदस्य, बच्चे, बुजुर्ग या समूह के लोग एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। अभी परिजनों को अलग-अलग खोया-पाया और पुलिस सहायता केंद्रों पर जानकारी देनी पड़ती है। नई व्यवस्था में शिकायत का केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। उदाहरण के लिए, किसी परिवार ने एक केंद्र पर सदस्य के लापता होने की सूचना दी और कुछ समय बाद वही व्यक्ति कुंभ क्षेत्र के दूसरे हिस्से में पुलिस या स्वयंसेवकों को मिला, तो दोनों सूचनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए मिलान किया जा सकेगा। खोया सामान भी बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम सिर्फ बिछड़े लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। खोए सामान का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। बैग के मामले में उसका रंग, ब्रांड, आकार, अंदर रखी वस्तुएं या कोई दूसरी खास पहचान दर्ज की जा सकेगी। दूसरी ओर, किसी श्रद्धालु या स्वयंसेवक को ऐसा सामान मिलता है तो उसकी जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज की जा सकेगी। इससे खोई और मिली वस्तुओं की पहचान मिलाने में मदद मिलेगी। अलग-अलग खोया-पाया केंद्र एक सिस्टम से जुड़ेंगे कुंभ क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर सहायता और खोया-पाया केंद्र बनाए जाते हैं। अभी बड़ी चुनौती यह रहती है कि एक केंद्र पर दर्ज जानकारी दूसरे केंद्र तक तुरंत पहुंचे। डिजिटल लॉस्ट एंड फाउंड पोर्टल में इन्हीं सूचनाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी है। इससे प्रशासन के पास कुंभ क्षेत्र में खोए लोगों और सामान का केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस टीम, सहायता केंद्र और अन्य अधिकृत कर्मियों के साथ सूचना साझा करना भी आसान होगा। डिजिटल कुंभ की बड़ी योजना का हिस्सा डिजिटललॉस्ट एंड फाउंड पोर्टल को कुंभ के लिए तैयार किए जा रहे व्यापक ‘डिजिटल कुंभ’ कॉन्सेप्ट का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार कुंभ में भीड़ प्रबंधन, सूचना व्यवस्था, यातायात, सुरक्षा और श्रद्धालुओं को सुविधाएं देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में खोए सामान और बिछड़े लोगों की तलाश को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। लक्ष्य यह है कि श्रद्धालुओं को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए अलग-अलग केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें और किसी एक जगह दर्ज सूचना जरूरत के मुताबिक पूरे सिस्टम में उपलब्ध हो सके। क्यों जरूरी है यह डिजिटल सिस्टम? कुंभ में लाखों की भीड़ के बीच एक ही समय में अलग-अलग जगहों पर लोग और सामान गुम हो सकते हैं। ऐसे में सिर्फ ज्यादा खोया-पाया केंद्र बनाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि इन केंद्रों पर दर्ज जानकारी आपस में जुड़ी हो। यही डिजिटललॉस्ट एंड फाउंड पोर्टल का मुख्य उद्देश्य है- खोया कहां दर्ज हुआ, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि उसकी जानकारी पूरे सिस्टम में उपलब्ध रहे। ——————— ये खबर भी पढ़ें… देहरादून के इन 6 चौराहों पर अब नहीं मिलेगा जाम:₹33.4 करोड़ में बदल जाएगी पूरी तस्वीर; 8 महीने में काम पूरा करने का टारगेट देहरादून में रोज जाम से जूझने वाले लोगों के लिए अब राहत की उम्मीद है। जिन 6 चौराहों पर पीक ऑवर में ट्रैफिक रेंगता था, वहां अब सड़क और जंक्शन का पूरा सिस्टम बदला जाएगा। 33.4 करोड़ रुपए की परियोजना में इन चौराहों का चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण होगा। (पढ़ें पूरी खबर)
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