जरूरत की खबर- कंटेंट क्रिएटर हैं तो रहें सावधान:  कास्टिंग के नाम पर स्कैम, ठगों की स्ट्रैटजी समझें, फर्जी ऑफर्स को ऐसे पहचानें
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जरूरत की खबर- कंटेंट क्रिएटर हैं तो रहें सावधान: कास्टिंग के नाम पर स्कैम, ठगों की स्ट्रैटजी समझें, फर्जी ऑफर्स को ऐसे पहचानें

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3 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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अगर आप कंटेंट क्रिएटर या सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं। म्यूजिक वीडियो, ब्रांड कोलैब या एक्टिंग के मौके तलाश रहे हैं तो सावधान रहें। स्कैमर फर्जी कास्टिंग कॉल या कोलैब ऑफर भेजकर आपको निशाना बना सकते हैं।

कुछ दिनों पहले मोहम्मद नूफ नाम की एक कंटेंट क्रिएटर को ‘कास्टिंग स्कैम’ में फंसाने की कोशिश की गई। उन्हें ‘टी-सीरीज’ के नाम से फर्जी मेल आया। मेल का रिप्लाई करने पर स्कैम का पता चला। इसके बाद उन्होंने इंस्टाग्राम पर घटना शेयर कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम ‘फर्जी कास्टिंग कॉल/ब्रांड कोलैब स्कैम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-

  • इंफ्लुएंसर्स इस स्कैम के जाल में कैसे फंसते हैं?
  • ठग उन्हें ही क्यों टारगेट करते हैं?
  • कास्टिंग की सही प्रक्रिया क्या है?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- मोहम्मद नूफ नाम की सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को कास्टिंग के नाम पर कैसे फंसाने की कोशिश की गई?

जवाब- नूफ ने इंस्टा पर वीडियो पोस्ट कर घटना की जानकारी दी। पॉइंटर्स से समझिए-

  • टी-सीरीज के नाम से बने फर्जी जीमेल आईडी से ईमेल भेजा गया।
  • उन्हें 15 मॉडल्स में से ‘पहले नंबर’ पर चुने जाने का झांसा दिया गया।
  • 7 गानों की रिकॉर्डिंग के लिए 50,000 रुपए का ऑफर दिया गया।
  • मेल में ‘कास्टिंग प्रोड्यूसर’ का फोन नंबर था।
  • बातचीत के बाद एग्रीमेंट लेटर भेजा गया, जिस पर टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार के फर्जी साइन थे।
  • बातचीत के जरिए भरोसा जीतकर प्रोफेशनल माहौल बनाया गया।
  • रात में वॉट्सएप वीडियो कॉल पर ऑडिशन लिया गया।
  • शुरुआत में सामान्य डायलॉग और एक्सप्रेशन बुलवाए गए।
  • बाद में आपत्तिजनक बातें की जाने लगीं, जिससे स्कैम का शक हुआ।
  • शक होने पर नूफ ने कॉल काट दी, जिससे वह बड़े नुकसान से बच गईं।

सवाल- टी-सीरीज ने इस मामले पर क्या कहा है?

जवाब- इस स्कैम के सामने आने के बाद टी-सीरीज ने स्टेटमेंट जारी कर कहा-

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कुछ लोग कंपनी के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। फर्जी ईमेल अकाउंट बनाकर काम देने के बहाने लोगों से संपर्क कर रहे हैं। ’टी-सीरीज कंपनी किसी भी तरह की प्रोफेशनल बातचीत जीमेल या किसी अनऑफिशियल ईमेल आईडी से नहीं करती है। कास्टिंग या काम से जुड़ी हर बातचीत सिर्फ ऑफिशियल डोमेन से होती है।

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कंपनी ने लोगों से फर्जी ऑफर्स से सावधान रहने और बिना वेरिफिकेशन भरोसा न करने की अपील की।

सवाल- फर्जी कास्टिंग कॉल/ब्रांड कोलैब स्कैम कैसे काम करता है?

जवाब- यह स्कैम एक तय पैटर्न पर काम करता है, जिसमें भरोसा जीतकर शोषण या ठगी की जाती है। इसमें ज्यादातर नए इंफ्लुएंसर्स को निशाना बनाया जाता है। ग्राफिक से पूरा खेल समझिए-

सवाल- इसके अलावा और किन तरीकों से ठगी हो सकती है?

जवाब- ठग कास्टिंग/ब्रांड कोलैब के नाम पर कई तरीकों से पैसे और डेटा हासिल करने की कोशिश करते हैं। जैसेकि-

  • एडवांस फीस के नाम पर पैसे ऐंठना।
  • फिशिंग लिंक से डेटा चोरी करना।
  • नकली कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाना।
  • OTP/बैंक डिटेल्स मांगना।
  • ‘पेमेंट रिलीज’ के नाम पर पैसे ऐंठना।
  • फर्जी एप डाउनलोड करवाना।
  • वेरिफिकेशन के नाम पर डॉक्यूमेंट लेना।
  • स्क्रीन शेयर एप से फोन एक्सेस लेना।
  • फेक चेक/पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर ब्लैकमेल करना।
  • सोशल मीडिया अकाउंट हैक करना।

सवाल- स्कैमर भरोसा जीतने के लिए क्या ट्रिक्स इस्तेमाल करते हैं?

जवाब- ठग इसके लिए कई ट्रिक्स यूज करते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या ठग सिर्फ नए इंफ्लुएंसर्स को निशाना बनाते हैं या बड़े क्रिएटर्स भी शिकार होते हैं?

जवाब- ठग बड़े क्रिएटर्स को भी निशाना बनाते हैं। फर्क बस इतना है कि नए लोग अनुभव की कमी से जल्दी भरोसा कर लेते हैं। जबकि बड़े क्रिएटर्स को ज्यादा प्रोफेशनल और टारगेटेड तरीके से फंसाने की कोशिश की जाती है।

सवाल- हाल के समय में ऐसे केस कितने बढ़े हैं?

जवाब- अब तक कई इंफ्लुएंसर्स ने ऐसे स्कैम के बारे में खुलकर बात की है। मोहम्मद नूफ के कमेंट सेक्शन में भी कई लोगों ने अपनी आपबीती लिखी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

सवाल- ठग इंफ्लुएंसर्स को ही क्यों टारगेट करते हैं?

जवाब- इसके कई कारण हैं-

  • इंफ्लुएंसर्स नए मौकों और ब्रांड डील्स के लिए तैयार रहते हैं।
  • बड़ी ऑडियंस होने से ठगों को ज्यादा फायदा दिखता है।
  • पब्लिक प्रोफाइल होने से संपर्क करना आसान होता है।
  • पर्सनल और प्रोफेशनल डेटा आसानी से मिल जाता है।
  • इंफ्लुएंसर्स को सोशल वैलिडेशन पाने की चाह रहती है।

सवाल- इंफ्लुएंसर्स इस स्कैम के जाल में क्यों फंस जाते हैं?

जवाब- इंफ्लुएंसर्स कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जो उन्हें इस स्कैम में फंसा देती हैं। जैसेकि-

  • ब्रांड का नाम देखकर भरोसा करना।
  • फेम के लालच और जल्दी काम पाने की एक्साइटमेंट में वेरिफिकेशन न करना।
  • ‘लिमिटेड मौका’ सुनकर दबाव में आना।

सवाल- ठग वीडियो-वाॅइस का कैसे मिसयूज कर सकते हैं?

जवाब- ठग वीडियो रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल कर सकते हैं। इसके अलावा-

  • वॉइस क्लोन बनाकर फर्जी कॉल/मैसेज कर सकते हैं।
  • डीपफेक वीडियो बनाकर बदनाम कर सकते हैं।
  • आइडेंटिटी का दुरुपयोग कर सकते हैं।
  • दोस्तों/ब्रांड्स से पैसे लेने के लिए वाॅइस इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • प्राइवेट वीडियो लीक करने की धमकी दे सकते हैं।

सवाल- ठग कौन-कौन से झूठे बहाने से पैसे ऐंठ सकते हैं?

जवाब- ठग इन बहानों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर सकते हैं-

  • रजिस्ट्रेशन/ऑडिशन फीस।
  • पोर्टफोलियो/प्रोफाइल चार्ज।
  • शूट लोकेशन/ट्रैवल खर्च।
  • मेंबरशिप चार्ज/सिक्योरिटी डिपॉजिट।
  • ‘पेमेंट क्लियरेंस फीस।
  • कॉन्ट्रैक्ट प्रोसेसिंग फीस।
  • ’रिफंडेबल फीस’।

सवाल- फर्जी कास्टिंग कॉल, मैसेज और मेल को कैसे पहचानें?

जवाब- कुछ संकेतों से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर ऐसा मैसेज आए तो क्या करें?

जवाब- ऐसा मैसेज आने पर तुरंत सतर्क हो जाएं और बिना वेरिफिकेशन कोई कदम न उठाएं। साथ ही ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

सवाल- अगर गलती से स्कैम का शिकार हाे जाएं तो क्या करें?

जवाब- ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय तुरंत एक्शन लें-

  • सोशल मीडिया की प्राइवेसी रिस्ट्रिक्ट करें।
  • जिस प्लेटफॉर्म पर संपर्क हुआ, वहां उस अकाउंट को रिपोर्ट और ब्लॉक करें।
  • स्कैमर ने जो भी एग्रीमेंट, मेल या प्रोफाइल भेजी है, उसे सबूत के तौर पर रखें।
  • कोई आपत्तिजनक कंटेंट रिकॉर्ड हुआ हो, तो तुरंत साइबर सेल में बताएं।
  • ईमेल, इंस्टाग्राम और अन्य अकाउंट्स के पासवर्ड तुरंत बदलें।
  • 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन करें।

सवाल- कास्टिंग की सही प्रक्रिया क्या है?

जवाब- असली कास्टिंग प्रक्रिया हमेशा प्रोफेशनल, पारदर्शी और ऑफिशियल चैनल्स के जरिए होती है। इसमें-

  • रजिस्ट्रेशन या प्रोफाइल सबमिशन तय प्लेटफॉर्म पर होता है।
  • शॉर्टलिस्टिंग के बाद ही ऑडिशन के लिए बुलाया जाता है।
  • ऑडिशन स्टूडियो/ऑफिशियल सेटअप में होता है।
  • ऑडिशन की प्रक्रिया कई स्टेज में होती है।
  • पूरी प्रक्रिया में कोई फीस या पैसे नहीं मांगे जाते हैं।
  • लीगल कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले पूरी जानकारी दी जाती है।
  • पेमेंट, काम की शर्तें साफ और लिखित होती हैं।
  • पूरी बातचीत ऑफिशियल ईमेल/चैनल से ही होती है।

सवाल- सोशल मीडिया यूजर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • सोशल मीडिया पर पर्सनल जानकारी न डालें।
  • सरप्राइजिंग ऑफर से सावधान रहें।
  • किसी अनजान लिंक/फाइल को डाउनलोड न करें।
  • पैसे से जुड़े मामलों में हमेशा डबल वेरिफिकेशन करें।
  • संदिग्ध कॉल/मैसेज को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें।
  • सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी और सिक्योरिटी सेटिंग्स मजबूत रखें।
  • समय-समय पर पासवर्ड बदलें और 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें।

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