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नौकरी की टेंशन में ‘स्टेटस’ नहीं, सुकून खरीद रहे चीनी: क्रिस्टल ब्रेसलेट की बिक्री 320% बढ़ी; पर्सनल लग्जरी बाजार 5% वृद्धि तक सिमटा

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चीन के जिन युवाओं की पहचान कभी गुच्ची और बालेंसियागा के लोगो से होती थी, वे अब क्रिस्टल ब्रेसलेट, मंदिर के प्रसाद और वेलनेस रिट्रीट पर खर्च कर रहे हैं। नानजिंग के 22 वर्षीय छात्र जीरुई यांग बताते हैं कि कॉलेज शुरू होने के बाद उनकी शॉपिंग ‘इमोशनल वैल्यू’ वाली चीजों- छोटे एक्सेसरीज, फ्रेगरेंस और सफर पर सिमट गई है। दरअसल कोविड महामारी के बाद सुस्त अर्थव्यवस्था और नौकरी की अनिश्चितता (युवा बेरोजगारी दर 16% के पार) के बीच चीन के शहरी युवा अब भी शॉपिंग से ही सुकून तलाश रहे हैं- बस तरीका बदल गया है। सोशल मीडिया एप श्याओहोंगशू पर ‘शुएनश्वे’ (आध्यात्मिक रहस्यवाद) हैशटैग को 500 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सस्ते सेगमेंट में फेंगशुई से जुड़ी ‘एनर्जी’ ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है। 2024 में चीन में क्रिस्टल ब्रेसलेट की बिक्री में सालाना 320% उछाल आया, जो करीब 44.4 करोड़ डॉलर (~4,211 करोड़) के ऑनलाइन क्रिस्टल बाजार का तिहाई हिस्सा है। दूसरी तरफ, कंसल्टिंग फर्म बेन एंड कंपनी के मुताबिक, चीन का पर्सनल लग्जरी बाजार 2025 में 5% वृद्धि तक सिकुड़ गया। फिर भी कुछ महंगी चीजों की मांग सोशल मीडिया की लोक कथाओं की बदौलत बढ़ी है। कार्तिये का जस्ट अन क्लू ब्रेसलेट (करीब ~4.8 लाख) ‘बुरी नजर से बचाने वाला’ माना जाता है, तो टिफनी का ‘टी’ बैंगल (~6.7 लाख) ‘बुरे बॉस से छुटकारा’ दिलाने वाला। वैन क्लीफ एंड आर्पल्स का फोर-लीफ क्लोवर पेंडेंट (~1.9 लाख से शुरू) करिअर, प्यार और पैसे से जुड़े अलग-अलग शुभ मतलब रखता है। ये सब सोशल मीडिया यूजर्स ने ही गढ़ा है। बड़े ब्रांड्स इस ट्रेंड को भुना रहे हैं। लुलुलेमन और कॉफी चेन एम स्टैंड ने आध्यात्म-थीम कैंपेन चलाए, बबल टी ब्रांड मॉली टी ने 1,700 साल पुराने मंदिर से पार्टनरशिप की और बर्गर किंग ने ताओवादी तीर्थ स्थल के साथ मिलकर ‘धन के देवता’ का फिगरीन बेचा। दिलचस्प है कि चीन आधिकारिक रूप नास्तिक राष्ट्र है, जहां 10% से भी कम लोग किसी धर्म से जुड़े हैं। लेकिन प्यू रिसर्च के एक सर्वे में ‘आध्यात्मिकता-रीति-रिवाज’ सवाल जोड़ते ही तस्वीर बदल गई। इसमें 47% चीनी वयस्कों ने फेंगशुई में आस्था जताई। इस बीच सरकारी मीडिया सतर्क है: एक विद्वान की चेतावनी छपी कि यह राहत तो दे सकता है, पर इसमें डूबना गुमराह भी कर सकता है। नास्तिक देश चीन की ‘टेंपल इकोनॉमी’ 1.4 लाख करोड़ की आधिकारिक रूप नास्तिक राष्ट्र चीन में मंदिर पर्यटन भी तेजी से बढ़ा है। वहां की ‘टेंपल इकोनॉमी’ सालाना करीब 14.8 अरब डॉलर (~1.4 लाख करोड़) की आंकी गई है। एस्ट्रोलॉजी एप सीसीई को अब तक करीब 2.4 करोड़ बार डाउनलोड किया जा चुका है। मार्केटिंग एजेंसी रेड एंट एशिया की लिंडा यू कहती हैं, ‘युवा अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि ‘खुद को परिभाषित करने का एक जरिया और भावनात्मक सहारा’ खरीद रहे हैं।



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