पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बुद्धि का सदुपयोग बुद्धिमान होने के लिए महत्वपूर्ण है
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बुद्धि का सदुपयोग बुद्धिमान होने के लिए महत्वपूर्ण है

Spread the love




केवल बुद्धि से काम नहीं चलता। बुद्धि का सदुपयोग और दुरुपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। बुद्धि के दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण रावण है और बुद्धि के सदुपयोग का उदाहरण काकभुशुंडि हैं। रावण ब्राह्मण था, विश्व विजेता था, राक्षसों का राजा था। लेकिन बुद्धि के मामले में गड़बड़ा गया। काकभुशुंडि पक्षी, और उसमें भी निकृष्ट कौवा, लेकिन बु​​द्धि का खूब उपयोग किया। गरुड़ से उन्होंने कहा- सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई, कहउं जथामति कथा सुहाई। पक्षीराज गरुड़ रघुनाथ जी की प्रभुता सुनिए। मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वह सुहावनी कथा कहता हूं। ‘अपनी बुद्धि के अनुसार’ शब्द बड़े महत्वपूर्ण हैं। ज्ञान के साथ समझ पैदा हो तब बुद्धि कहलाती है। और बुद्धि परिष्कृत हो तो प्रज्ञा है। चार तरह की बुद्धि हैं- आईक्यू- तार्किक सोच, ईक्यू- भावनात्मक सोच, एसक्यू- सामाजिक सोच और एक्यू- एडवर्सिटी कोशेंट यानी चुनौतियों का सामना कैसे करें। बुद्धि थोड़ी-अधिक सभी के पास है, पर बुद्धिमान होने के लिए प्रयास करना पड़ता है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *