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अकेलापन और भविष्य का भय युवाओं को कॉर्पोरेट जगत में और बड़े-बूढ़ों को परिवार में सता रहा है। जिन्होंने नौकरी, कारोबार की दुनिया में खूब सुख और धन अर्जित किया, उनके चेहरे पर भी इसकी झलक मिलती है। और परिवार में बड़े-बूढ़ों के जीवन में अकेलापन ऐसा उतरा कि वृद्धावस्था घोर पीड़ा लगने लगी। दुनियादारी की भाषा में एक शब्द चलता है ‘सोशल कैपिटल’। इसे यूं समझें कि जब लोग आपस में मिलें, एक-दूसरे पर भरोसा रखें, साथ समय बिताएं, तो उस अदृश्य शक्ति को सोशल कैपिटल कहते हैं। देश में लगातार कई क्षेत्रों में खूब विकास हो रहा है, लेकिन सोशल कैपिटल धीरे-धीरे खत्म हो रही है- यह बात जानकार लोग मानने लगे हैं। तो यदि हमारे-आपके जीवन में सोशल कैपिटल खत्म होने की तकलीफ दिख रही है तो निदान भी हमें निकालना पड़ेगा। व्यावहारिक निदान यह है कि मेलजोल बढ़ाइए। दूसरों में पॉजिटिव रुचि लीजिए। कोई न कोई रचनात्मक कार्य हाथ में लेकर उससे जुड़ जाएं। और आध्यात्मिक इलाज यह है कि अपने अकेलेपन को एकांत में बदलिए, और यह काम होगा योग से।
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