![]()
जब रिश्ते में कड़वाहट और तनाव हद से बढ़ जाए, तो उसका असर सिर्फ मानसिक शांति खोने तक सीमित नहीं रहता। यह स्थिति इंसान को बिस्तर पर डाल सकती है और कई बीमारियां दे सकती है। ब्रिटेन की बेका स्कॉट की कहानी इसका उदाहरण है। शादी के बाद सालों तक पति से तनावपूर्ण और अपमानजनक रिश्ते से बेका बीमार रहने लगीं। बच्चे को स्कूल छोड़कर लौटतीं, तो फिर घंटों बिस्तर में पड़ी रहतीं। दिल की धड़कन तेज होती। पैर भारी-भारी से लगते, जैसे लगातार दौड़ रही हों। उन्हें क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम हुआ। 18 महीने तक पीड़ित रहीं। इसके बाद उन्होंने पति से दूरी बना ली। पति को छोड़कर अलग रहने लगी। उनकी बीमारी के लक्षण गायब हो गए। शरीर की ऊर्जा लौट आई। ऐसा क्यों हुआ? इस बारे में ऑटोइम्यून क्लिनिक की डॉक्टर म्यूरियल वॉलेस स्कॉट कहती हैं, ऐसे रिश्ते शरीर को ‘जीवित रहने’ की स्थिति में ले जाते हैं। ‘थ्राइव’ यानी स्वस्थ रहने पर नहीं। ऐसे में शरीर पाचन क्रिया, थायराइड फंक्शन और हार्मोंस को संतुलित रखने जैसे जरूरी कामों को रोककर अपनी पूरी ऊर्जा सिर्फ तनाव से लड़ने में लगा देता है। हालिया वैश्विक अध्ययनों में चौंकाने वाला दावा किया गया कि खराब रिश्ते की वजह से रहने वाला तनाव सीधे हमारी एड्रिनल ग्रंथियों पर असर डालता है। इससे तनाव हार्मोन (एड्रेनलिन और कॉर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है। नतीजा यह होता है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) अपने ही अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के अध्ययन के अनुसार, जो लोग अपने जीवन में अत्यधिक तनाव या आघात से गुजरते हैं, उनमें सोरायसिस, आंतों और थायराइड की बीमारी का खतरा 36% तक बढ़ जाता है। अगर रिश्ते खराब हैं, तो बीमारी का इलाज मुश्किल डॉक्टरों के अनुसार, ‘क्रोनिक फटीग सिंड्रोम’ (बेहद थकान) का एक मुख्य कारण खराब रिश्ते हैं। एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, बेहद खराब सामाजिक और वैवाहिक रिश्ते इंसान की असमय मृत्यु के जोखिम को 50% तक बढ़ा देते हैं, जो रोजाना 15 सिगरेट पीने जितना खतरनाक है। डॉक्टरों का कहना है कि दवाओं से किसी बीमारी के लक्षणों को दबाया तो जा सकता है, लेकिन अगर बीमारी की असली जड़ (तनावपूर्ण माहौल) घर में है, तो मरीज कभी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता। विशेषज्ञों की सलाह है कि रिश्ते सेहत पर भारी पड़ने लगें, तो अपनी भलाई के लिए कड़े फैसले लेना ही ठीक है।
Source link








