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कुछ दिनों पहले की घटना में ऑस्ट्रिया की सबसे ऊंची चोटी ग्रॉसग्लॉकनर पर ट्रैकिंग के दौरान एक क्लाइंबर थॉमस पी. अपनी गर्लफ्रेंड को अकेला छोड़कर आगे निकल गया। महिला की ठंड से जमकर मौत हो गई। ऑस्ट्रिया की कोर्ट ने इस मामले में थॉमस को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना। अभियोजकों के मुताबिक थॉमस के फोन में सिग्नल थे, फिर भी उसने समय पर संकट का संकेत नहीं भेजा। इसी केस के बाद सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘अल्पाइन डिवोर्स’ शब्द चर्चा में है। इसका मतलब है- ट्रैकिंग या पहाड़ जैसी खतरनाक जगह पर कोई पार्टनर (अक्सर पुरुष) अपने कम अनुभवी (महिला) साथी को अकेला और असुरक्षित छोड़कर आगे निकल जाए या वहीं छोड़ दे। ‘अल्पाइन डिवोर्स’ शब्द कहां से आया, इससे बचाव क्या है ‘अल्पाइन डिवोर्स’ शब्द सबसे पहले 1893 में लेखक रॉबर्ट बर्र की एक कहानी में मिलता है। लॉरी सिंगर कहती हैं, भरोसा कितना भी हो, एडवेंचर ट्रिप पर हमेशा ‘आत्मनिर्भर’ रहें। संकट में इंसान का असली चेहरा दिख जाता है। कैलिफोर्निया की लॉरी सिंगर का ऐसा ही भयावह अनुभव लॉरी ने 2016 में पुरुष मित्र के साथ 357 किमी ट्रैकिंग की थी। ऊंचाई के कारण तबीयत बिगड़ने और दिमाग में सूजन आने के बावजूद वह लॉरी को छोड़कर आगे निकल गया। बाद में कहा कि वह उनका ‘टेस्ट’ ले रहा था। महिलाएं सोशल मीडिया पर साझा कर रहीं अनुभव इस केस के दौरान सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने अपने अनुभव शेयर किए। एक वीडियो करीब 50 लाख बार देखा गया। इसमें महिला ने सुनसान पहाड़ी रास्ते पर अपना वीडियो डालकर लिखा कि उसे तब समझ आया कि उसके पार्टनर ने उसे कभी पसंद ही नहीं किया था। एक महिला ने बताया कि ट्रैकिंग के दौरान उसका पार्टनर मीलों आगे निकल गया था, जबकि वह अकेले संघर्ष कर रही थी। मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं – रिलेशनशिप कोच जो हेमिंग्स के मुताबिक कुछ पुरुष समस्या सुलझाने के बजाय पलायन कर जाते हैं। वे महिला साथी से सहानुभूति के बजाय प्रभुत्व दिखाने की कोशिश करते हैं।
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