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ऑफिस में काम का दबाव कम करने के लिए शुरू हुआ ‘वेलनेस’ अब बेडरूम तक पहुंच रहा है। कंपनियां कर्मचारियों को ज्यादा तरोताजा रखने के लिए नींद सुधारने वाले प्रोग्राम, नैप पॉड, हर्बल टी और स्लीप-ट्रैकिंग डिवाइस आजमा रही हैं। कॉर्पोरेट जगत इसे ‘वेलनेस इनिशिएटिव’ बता रहा है। दावा है कि इसका मकसद कर्मचारियों की नींद को बेहतर करना या सुधारना है, लेकिन हकीकत अलग है। नैप पॉड्स, लैवेंडर स्प्रे और बायो-ट्रैकिंग घड़ियों के जरिए कंपनियां कर्मचारियों के बेडरूम में भी ‘बॉस’ की एंट्री करा रही हैं। कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कर्मचारी ‘चौबीस घंटे-सातों दिन’ केवल काम के लिए ‘रिचार्ज’ रहें। लेकिन ट्रैकर्स का डेटा गलत आने पर कर्मचारी रात भर इस चिंता में जगते हैं कि ‘मुझे नींद क्यों नहीं आ रही, मेरा स्लीप स्कोर खराब हो जाएगा!’ इससे कर्मचारी तरोताजा बनने के बजाय और अधिक थकान के शिकार हो रहे और मानसिक शांति भी खो रहे हैं। एक कंपनी ने ‘स्लीप इनटू द फ्यूचर’ ट्रायल शुरू किया। कंपनी ने कनाडा और दुनिया भर के अपने कानूनी विभाग में ऐसे ट्रायल किए, जिनका मकसद कर्मचारियों को ज्यादा ऊर्जावान और काम के लिए तैयार रखना था। कंपनी ने ‘नींद की कमी’ के नकारात्मक प्रभावों का हवाला देकर कर्मचारियों को आराम देने की बात कही थी। जब आराम भी नौकरी का हिस्सा बन जाए समस्या तब शुरू होती है, जब आराम को भी काम से जोड़ दिया जाता है। नींद का उद्देश्य शरीर और दिमाग को आराम देना है, लेकिन अगर हर रात का लक्ष्य बेहतर ‘स्लीप स्कोर’ पाना हो तो ये चिंता बढ़ा सकता है। ‘बायो-ट्रैकिंग’: बेडरूम में बॉस की डिजिटल एंट्री स्मार्ट रिंग्स, बायोसेंसर्स और स्लीप-ट्रैकिंग घड़ियों के जरिए बायो-डेटा जुटाना अब नया ‘कॉर्पोरेट फैशन’ बन चुका है। लेकिन ट्रैकर्स का डेटा गलत आने पर कर्मचारी चिंता में रहते हैं कि ‘नींद क्यों नहीं आ रही, स्लीप स्कोर खराब हो जाएगा!’ यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा की नींद विशेषज्ञ डॉ. केली बैरन कहती हैं कि ‘बेहतर नींद’ के पीछे पागलपन की हद तक दौड़ना नींद को और खराब कर सकता है। रिसर्च: स्लीप-ट्रैकिंग डिवाइस की सटीकता में काफी अंतर कई स्टडी से पता चलता है कि स्लीप-ट्रैकिंग डिवाइस नींद और जागने की अवधि का उपयोगी अनुमान दे सकते हैं, लेकिन इन्हें मेडिकल जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता। 2024 में सेंसर्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 53 युवाओं पर पांच कमर्शियल स्लीप-ट्रैकर्स की जांच की गई। इसमें अलग-अलग डिवाइसों के नींद के अनुमानों में काफी अंतर पाया गया। इसी तरह ओरा रिंग, फिटबिट और एपल वॉच के डेटा की जांच से पता चला कि नींद के चरण की पहचान में हर डिवाइस की सटीकता अलग-अलग थी।
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