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वैज्ञानिक अब बढ़ती उम्र (एजिंग) को समझने और मापने के लिए ‘इंट्रिंसिक कैपेसिटी’ नाम का पैमाना अपना रहे हैं। यह शरीर और दिमाग की कुल कार्यक्षमता का ओवरऑल स्कोर है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर डॉ. जॉन बीयर्ड के मुताबिक अब तक मेडिकल साइंस में बुढ़ापे को सीधे मापने का कोई आसान तरीका नहीं रहा है। ‘इंट्रिंसिक कैपेसिटी’ में ताकत, चलने-फिरने की रफ्तार, सोचने-समझने की क्षमता, देखने-सुनने की शक्ति और कुल ऊर्जा स्तर को एक साथ देखा जाता है। इससे पता चलेगा कि किसी व्यक्ति का शरीर और दिमाग मिलकर कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं। इंट्रिंसिक कैपेसिटी का स्कोर 5 हिस्सों से बनता है (1) सोचने-समझने की क्षमता (2) शरीर की ताकत और चाल (3) नजर और सुनने की क्षमता (4) मन की स्थिति (5) शरीर की कुल ऊर्जा व तनाव झेलने की क्षमता। कुछ जांचें पहले से ही बुजुर्गों में की जाती हैं। फ्रांस व अमेरिका में इंसानों पर स्टडी इंट्रिंसिक कैपेसिटी को लेकर अलग-अलग जगहों पर स्टडी चल रही हैं। फ्रांस की एक स्टडी में बुजुर्ग नियमित सवालों के जवाब देते हैं और नतीजों के आधार पर उन्हें सेहत संबंधी सलाह दी जाती है। स्कोर गिरने पर उन्हें डॉक्टर या बुजुर्गों की देखभाल करने वाली प्रशिक्षित नर्स के पास भेजा जाता है। भविष्य में नए पैमानों पर नापी जाएगी सेहत की रफ्तार फिलहाल डॉक्टर के पास जाकर इंट्रिंसिक कैपेसिटी का अलग से कोई टेस्ट नहीं कराया जा सकता। विशेषज्ञ चाहते हैं कि आगे बुजुर्ग मरीजों में इन क्षमताओं को समय-समय पर ट्रैक किया जाए, ताकि शरीर या दिमाग की शुरुआती गिरावट पकड़ी जा सके। डॉ. बीयर्ड के मुताबिक कई बार बीमारी सामने आने से पहले ही क्षमता में बदलाव दिखने लगता है। ऐसे संकेत समय रहते मिल जाएं तो बचाव के कदम उठाए जा सकते हैं।
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