9 घंटे पहले
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- अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स स्पेस सेंटर में 9 महीने 14 दिन बिताने के बाद पृथ्वी पर लौटी हैं, कैसे वो परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलती हैं और कैसे हर राह को आसान बनाती हैं। उन्हीं की जुबानी…
जब मैं बड़ी हो रही थी, मुझे याद है कि मैंने इंसानों को चांद पर चलते देखा और सोचा कि यह काफी कमाल का होगा। मैंने अपने जीवन में बस आगे बढ़ते हुए उन चीजों को खोजने की कोशिश की, जो मुझे पसंद हैं। मैं कॉलेज में टॉपर नहीं थी। मेरे कॉलेज के दिनों में कुछ उतार-चढ़ाव आए, कुछ असफलताएं थीं और बहुत सारी सफलताएं भी। मेरा मानना है कि असफलता अच्छी होती है जो सफलता से ज्यादा सिखाती हैं। अगर आप मन लगाएं, दृढ़ संकल्प रखें कोई रास्ता खोजें तो आप जो करना चाहें, कर सकते हैं। निश्चित रूप से मेरे पास बहुत सारी चीजों के बारे में एक अलग दृष्टिकोण है। लोगों को लग सकता है कि मैं एक से दूसरी चीज तक सीधे चली गई, लेकिन इस सफर में बहुत सारे सवाल थे। आप कभी खुद को किसी चीज में बंद ना महसूस करें। जब मैं बड़ी हो रही थी, मैं पशु चिकित्सक बनना चाहती थी। मुझे पूरा यकीन था कि मैं पशु चिकित्सक बनूंगी। मेरे पिता एक डॉक्टर थे, जीव विज्ञान हमारे परिवार में थोड़ा है, लेकिन मुझे गणित और भौतिकी बहुत पसंद थे। मुझे सचमुच नहीं पता था कि मैं क्या करना चाहती हूं… मुझे बस जानवरों से प्यार था, इसलिए मैं उनकी डॉक्टर बनना चाहती थी। मुझे अपनी पहली पसंद के कॉलेज में दाखिला नहीं मिला, इसलिए मुझे दूसरी पसंद के बारे में सोचना पड़ा और मैं पायलट बन गई। जब मैं पायलट थी तो जेट उड़ाना चाहती थी क्योंकि ‘टॉप गन’ उन दिनों रिलीज हुई थी और उसमें आप जेट को इधर-उधर उड़ते देखते हैं, रोमांचित होते हैं। उस समय अमेरिकी सेना में महिलाओं के लिए विकल्प सीमित थे, तो मुझे जेट नहीं मिले, हेलीकॉप्टर मिले। मुझे हेलीकॉप्टर उड़ाने में बहुत मजा आया और मैं टेस्ट पायलट स्कूल में जा सकी, जिसने मुझे बाद में टेस्ट पायलट बनने का मौका दिया। रास्ता सीधा नहीं था और यह तब तक नहीं था जब तक मैं 25 की उम्र में नहीं आई। एक दफा मैं टेस्ट पायलट स्कूल गई थी और पहली बार एक अंतरिक्ष यात्री से मिली। उनसे मिलकर जाना कि अंतरिक्ष यात्री क्या करते हैं, तब मुझे लगा मेरे पास इनके समान कुछ योग्यताएं हैं, तो शायद यह एक रास्ता है जो मैं ले सकती हूं। यह रास्ता पहले से तय नहीं था, सीधा नहीं था। हर कदम जो मैंने उठाया मैं उससे बहुत परिचित नहीं थी, लेकिन मैंने दूसरों को उस क्षेत्र में सफल होते देखा था। कुछ ऐसा खोजें जो आपको पसंद हो। यह पता लगाने में एक-दो या तीन कोशिशें लग सकती हैं कि आपको क्या पसंद है। जैसे ही वो मिल जाए, आप उसे अच्छी तरह से करें, बस यही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। सीखा हुआ कुछ भी कभी बेकार नहीं जाता मैं चालीस की उम्र तक मानती थी कि गणित बेकार है। कॉलेज में सोचती थी यह सब क्यों सीख रही हूं और यही वह बात है जो आज भी छोटे बच्चों के लिए हतोत्साहित करने वाली होती है। बच्चों को समझ नहीं आता कि वे जो सीख रहे हैं, क्यों सीख रहे हैं। बाद में समझ आता है कि कुछ भी सीखा हुआ बेकार नहीं है। इसलिए मैं स्कूल टीचर बनना चाहती हूं ताकि जीवन के व्यावहारिक उदाहरणों को क्लास में वापस ला सकूं। (तमाम इंटरव्यूज में अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स)








