इंस्पायरिंग:  इंसान की सीखने, समझने और स्वयं को बेहतर बनाने की क्षमता लगातार बढ़ती है – अमिताभ बच्चन
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इंस्पायरिंग: इंसान की सीखने, समझने और स्वयं को बेहतर बनाने की क्षमता लगातार बढ़ती है – अमिताभ बच्चन

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महानायक हाल ही में भारत के टॉप 10 वैल्युएबल सेलेब्स में शामिल हुए हैं। वे अपने ब्लॉग्स से काफी कुछ सिखाते-बताते रहते हैं, उन्हीं में से कुछ खास बातें… इंटरनेट के इस दौर में जानकारी का तूफान हर समय हमारे सामने मौजूद है। इतनी सारी सूचनाएं, इतने सारे विचार और इतनी सारी खबरें होती हैं कि समझना मुश्किल होता है कि वास्तव में महत्वपूर्ण क्या है। आज जवाब ढूंढना बहुत आसान हो गया है। एक बटन दबाइए और जानकारी सामने है। लेकिन इस सुविधा ने सोचने की हमारी अपनी क्षमता को पीछे छोड़ दिया है। अब मस्तिष्क के सोचने वाले बटन की जगह इंटरनेट के बटन ने ले ली है। हम जैसे लोग, जिन्होंने पुराना समय भी देखा है और आज का डिजिटल युग भी…उनके लिए यह बदलाव किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है।
कभी-कभी हमारा मन अपने आसपास की इतनी सारी चीजों में उलझ जाता है कि जो काम हमें करना चाहिए, जो बातें हमें सहेजकर रखनी चाहिए, वे कहीं पीछे छूट जाती हैं। मन थका होता है, लेकिन रुकता नहीं। वह लगातार उन बातों के बारे में सोचता है जो बदल रही हैं… फीकी हो रही हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई हैं। हमारे शरीर का सबसे बड़ा डेटा-बैंक हमारा मस्तिष्क है। जन्म से लेकर आज तक जो कुछ हमने देखा, सुना, सीखा और महसूस किया, वह सब उसमें जमा होता है। कई बार हमें लगता है कि अब इसमें और कुछ समा नहीं सकता। लगता है इसकी क्षमता की एक सीमा है। लेकिन यह एक भ्रम है। सच्चाई यह है कि इंसान के भीतर सीखने, समझने और आगे बढ़ने की क्षमता लगातार बढ़ती रहती है। हम कभी भी पूरी तरह भरते नहीं हैं। हमारे भीतर हमेशा कुछ नया सीखने और अपनाने की जगह बनी रहती है।
हर रोज एक नए दिन की शुरुआत होती है। फिर उसके बाद एक और दिन आता है। इसी तरह जीवन आगे बढ़ता है। रोज ही जीवन अपनी तमाम जटिलताओं के साथ हमारे सामने खड़ा हो जाता है। हर दिन हमारे सामने नए विचार आते हैं। नई योजनाएं बनती हैं। मन करता है कि हर काम पूरी लगन से किया जाए। लेकिन एक साथ सब करना संभव नहीं होता। इसलिए हमें ‘एक समय में एक काम’ के सिद्धांत पर चलना पड़ता है। फिर भी मन हमें बार-बार याद दिलाता है कि अभी बहुत कुछ बाकी है। यही चिंता हमें परेशान करती है।
कभी-कभी जिस समस्या को हम बहुत बड़ा समझते हैं, उसका समाधान छोटा होता है। वह समाधान मिलता है तो हम सोचते हैं इतना तनाव और इतनी ऊर्जा हमने क्यों खर्च की? जीवन की जटिलताओं के बीच छोटी बातें हमें संभालती हैं। पुरानी यादों में, मां की बातों में शांति ढूंढ लें। यकीन मानें…सब ठीक हो जाएगा। जो चीजें परेशान करें, उनमें छोटे बदलाव करें
कई बार हम सब कुछ छोड़कर बैठ जाते हैं, कि शायद मन शांत हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं होता। जो चीज आपको परेशान कर रही है, उसमें केवल छोटा-सा बदलाव कर दें। उसे नियमित रूप से लागू करें। फिर देखिए, कितनी राहत मिल जाती है।
(तमाम ब्लॉग्स में…)



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