इंस्पायरिंग:  दिल की आवाज को दिमाग से ऊपर रखिए तब समझ पाएंगे​ कि करना क्या चाहते हैं – सुंदर पिचाई
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इंस्पायरिंग: दिल की आवाज को दिमाग से ऊपर रखिए तब समझ पाएंगे​ कि करना क्या चाहते हैं – सुंदर पिचाई

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गूगल सीईओ पिचाई गूगल ट्रांसलेट के 20 साल पूरे होने पर चर्चा में हैं। उनके जीवन की कुछ सीख, उन्ही की जुबानी…
मैं जब भी भारत आता हूं, तो यहां के बदलाव की रफ्तार मुझे हमेशा चौंकाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। जब मैं छात्र था, तब चेन्नई से आईआईटी खड़गपुर जाने के लिए कोरोमंडल एक्सप्रेस से सफर करता था। रास्ते में विशाखापत्तनम, यानी वाइजैग पड़ता था। उस समय यह एक शांत, साधारण सा तटीय शहर था, जिसमें संभावनाएं बहुत थीं, लेकिन विकास की रफ्तार सीमित थी। आज उसी शहर में हम एक फुल-स्टेक एआई हब बना रहे हैं। यह भारत में 15 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का हिस्सा है। जब यह तैयार होगा, तो यहां गीगावॉट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता होगी और एक नया अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे भी बनेगा। इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत के लोगों और व्यवसायों तक अत्याधुनिक एआई तकनीक भी पहुंचेगी।
उस समय ट्रेन में बैठकर मैंने कभी नहीं सोचा था कि वाइजैग एक दिन ग्लोबल एआई हब बनेगा। जैसे मैंने यह भी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं ऐसी टीमों के साथ काम करूंगा, जो स्पेस में डेटा सेंटर लगाने पर विचार कर रही हैं, या मैं अपने माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को में पूरी ऑटोनॉमस कार में घुमाऊंगा। जब मैंने अपने 83 साल के पिता की नजर से देखा, तो मुझे तकनीकी प्रगति का एक नया एहसास हुआ। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर यह भारत की सड़कों पर भी काम कर जाए, तब वे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह प्रगति हमें दिखाती है कि जब इंसान बड़े सपने देखता है, तो क्या संभव हो सकता है। सपने देखने में कंजूसी न करें। सपने देखना ही बड़े और असरदार सफर पर निकलने का पहला कदम है। खूब सपने देखें और उन्हें जिम्मेदारी से पूरा करने की दिशा में सोचते रहें।
सपनों का पीछा करते हुए यह हमेशा ध्यान रखें कि जिंदगी में थोड़ा-बहुत किस्मत का रोल भी होता है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है कि आप सही फैसले लें। जब आप सोचते हैं कि आपको क्या करना है, तो आपका दिमाग आपको बहुत कुछ बताता है… लेकिन मैं मानता हूं कि दिल की सुनना भी उतना ही जरूरी है। जब आप कोई काम करते हैं, तो खुद से पूछें… क्या आपको यह सच में पसंद है? क्योंकि अगर आप अपने काम से प्यार करते हैं, तो सब कुछ आसान हो जाता है। तब आप खुद का सबसे बेहतर रूप दिखा पाते हैं। यह कहना आसान है, करना मुश्किल है। अपनी पसंद का काम ढूंढना आसान नहीं होता। लेकिन अपने दिल की आवाज को थोड़ा ज्यादा सुना करें… उसे दिमाग से थोड़ा ऊपर रखेंगे, तो शायद आप यह समझ पाएंगे कि आपको सच में क्या करना है… और यही सबसे बड़ी चीज है। अपने से बेहतर लोगों के साथ बैठें, काम करें
कई बार आप किसी के साथ बैठते हैं और सोचते हैं कि वाह, ये तो मुझसे कहीं आगे हैं। यही वो पल हैं जो आपको आगे बढ़ाते हैं। खुद को ऐसे माहौल में डालें, जहां लोग आपकी क्षमताओं को चुनौती दें। थोड़ा असहज होना जरूरी है, क्योंकि वहीं से आप आगे बढ़ते हैं।
(तमाम मंचों पर)



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