इंस्पायरिंग:  मेहनत और ईमानदारी पर कभी कोई समझौता न करें, सपने जरूर सच होंगे- मोहनलाल
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इंस्पायरिंग: मेहनत और ईमानदारी पर कभी कोई समझौता न करें, सपने जरूर सच होंगे- मोहनलाल

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1 घंटे पहले

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  • एक्टर मोहनलाल को हाल ही में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया है, इतने सफल करियर के बाद भी जमीन से जुड़े रहने वाले इस कलाकार की प्रेरक बातें…

मैं हमेशा मानता रहा हूं कि सिनेमा बनाना सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। मेरे लिए फिल्म बनाना केवल तकनीक या बड़े बजट की बात नहीं, निरंतर सीखने की यात्रा है। मैं हर दिन खुद को याद दिलाता हूं कि चाहे आप कितने भी अनुभवी क्यों न हो जाएं, हर दिन कुछ नया सीखते रहना जरूरी है। मुझे लगता है यही आदत मुझे आगे बढ़ाती है। अपने जीवन को भी इसी तरह देखता हूं कि हर दिन आपको मिला गिफ्ट है। न तो अतीत की असफलताओं में उलझना चाहता हूं और न ही भविष्य की चिंताओं से परेशान होना चाहता हूं। मेरी कोशिश हमेशा यही होती है कि आज को पूरी ईमानदारी से जिया जाए। मैंने अपने जीवन में सफलता भी देखी है और असफलता भी। सच कहूं तो, असफलता ने ही मुझे सिखाया है। असफलता हमें रोकती नहीं, बल्कि हमें बेहतर होने का मौका देती है। मेरे लिए सफलता का मतलब भी केवल पुरस्कार या पैसा कभी नहीं रहा। चाहे कोई भी पुरस्कार मिला हो या आलोचना मिली हो, मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अगला दिन नए उत्साह और नई सीख के साथ शुरू करूं। मेरे लिए महानता पुरस्कारों या रिकॉर्ड में नहीं है, बल्कि उस सकारात्मक प्रभाव में है जो मैं दूसरों के जीवन पर छोड़ पाता हूं। अगर मेरी यात्रा से लोग यह सीख पाएं कि सादगी, सीखते रहने की चाह और ईमानदारी ही असली ताकत है तो मुझे लगेगा कि मेरा जीवन सफल है। अगर मैंने अपना काम सच्चाई और जुनून से किया है, तो यही मेरा सबसे बड़ा हासिल है। यही सोच मुझे संतुलन और शांति देती है। मैंने कभी यह सपना नहीं देखा कि मैं सुपरस्टार बनूंगा। मेरी सोच हमेशा यही रही है कि जो भी किरदार मुझे मिले, उसे पूरी ईमानदारी से निभाऊं। यही वजह है कि मुझे हर फिल्म से, हर किरदार से कुछ नया सीखने का मौका मिला। एक्टर के रूप में, मैं हमेशा इस बात पर ध्यान देता हूं कि मेरी भूमिकाएं दर्शकों के दिलों को छू सकें और उनमें कोई संदेश छोड़ सकें। वैसे असली खुशी शोहरत या नाम में भी नहीं है। सबसे अधिक संतोष तब मिलता है जब मैं सिंपल और बैलेंस्ड जीवन जी पाता हूं। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि इतनी सफलता के बाद भी मैं इतना नॉर्मल कैसे हूं? मेरा जवाब हमेशा यही होता है कि सादगी ही जीवन की असली ताकत है। अगर हम सादगी बनाए रखेंगे तो हमें हर पल में खुशी मिलने लगेगी। यही सादगी आपको परिवार और दोस्तों के साथ गहराई से जुड़ने का मौका देती है। यही मेरे जीवन की असली पूंजी है।

अपना काम पूरे जुनून के साथ करेंगे तो सफल होंगे किसी को भी मेहनत और ईमानदारी पर कभी समझौता नहीं करना चाहिए। अगर आपका काम सच्चाई और जुनून से किया गया है, तो सफलता अपने आप रास्ता ढूंढ लेगी। जीवन केवल बड़े लक्ष्य हासिल करने का नहीं, बल्कि हर दिन की जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाने का नाम है। छोटी-छोटी जीत मिलकर ही तो बड़े सपनों को सच करती हैं। मैंने यह अनुभव किया है कि जब आप अपनी राह में लगातार मेहनत करते रहते हैं, तो दुनिया आपके लिए नए मौकों के दरवाजे खोल देती है। असली ताकत प्रक्रिया पर भरोसा करने और निरंतरता बनाए रखने में है। (तमाम इंटरव्यूज में)



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