एन. रघुरामन का कॉलम:  क्या आप ‘स्लीप हाइजीन’ बनाए रखने में अच्छे हैं?
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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या आप ‘स्लीप हाइजीन’ बनाए रखने में अच्छे हैं?

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12 घंटे पहले

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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

बुधवार की सुबह मेरे एक मित्र का फोन आया। वह आमतौर पर सुबह 7 बजे के बाद ही जागते हैं। अपने इस रवैये के कारण वह उन लोगों में से हैं, जिन्होंने कभी सूर्योदय नहीं देखा। मैंने पूछा, “सब ठीक है? आप सुबह 5 बजे कैसे फोन कर रहे हैं?” उन्होंने कहा कि “इन दिनों अप्रैल के महीने के टारगेट पूरे करने के चक्कर में मैं रातों में सो नहीं पा रहा हूं और मेरी ‘स्लीप हाइजीन’ पूरी तरह गड़बड़ा गई है।

मैं रात में थोड़ा गुनगुना दूध लेता हूं और इस गर्म मौसम में कमरे का तापमान ठंडा रखने की कोशिश कर रहा हूं, फिर भी अच्छी नींद नहीं आ रही।” मैंने कहा, “अगर आपको हफ्ते में कम से कम तीन दिन नींद नहीं आ रही है और अगर ऐसा तीन महीने से हो रहा है, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।”

जब उन्होंने हां कहा, तो मैंने उन्हें एक स्लीप एक्सपर्ट का नंबर दिया और कहा कि “अगर नींद की समस्या हमारी चिंताओं का केंद्र बन गई हैं, तो हम धीरे-धीरे यह यकीन करना शुरू कर देते हैं कि हमारी स्लीप सिस्टम ब्रेक हो गया है। तब कुछ लोग जल्दी सोने और देर तक बिस्तर में रहने की रणनीति अपनाते हैं, जो मेरे ख्याल से कई लोगों के लिए काम नहीं करती।

हालांकि, आप डॉक्टर की सलाह लें।” और डॉक्टर ने उन्हें ठीक वही बताया, जो मैंने अनुमान लगाया था। डॉक्टर ने कहा कि नींद नहीं आने की वजह पेट भारी महसूस होना या दूसरे कारणों से नहीं है, बल्कि आमतौर पर यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम नींद नहीं आने पर बैड नाइट पर किस तरह की प्रतिक्रिया करते हैं।

उन्होंने कहा कि जल्दी बिस्तर पर जाना या नाश्ते के समय तक बिस्तर पर लेटे रहने जैसे रणनीतियों से नींद की गुणवत्ता पर असर पड़ता है और इससे लोग बिस्तर पर पड़े-पड़े खीझते रहते हैं और नींद के बारे में चिंता करते रहते हैं।

तो क्या कारगर है? डॉक्टर अनिद्रा के लिए शुरुआती उपचार में कॉग्निटिव बिहेविरल थैरेपी का सुझाव देते हैं। इसमें नींद के शेड्यूल में धीरे-धीरे व्यक्तिगत परिवर्तन किए जाते हैं, जिससे स्लीप ड्राइव दुरुस्त होती है। इसे उन टेक्नीक्स के साथ जोड़ते हैं, जिससे बेडरूम के माहौल और नींद न आने की आशंका के बीच संबंधों को तोड़ने की कोशिश होती है। अंततः उपचार में उन विशिष्ट कारकों को टारगेट करते हैं, जो लगातार नींद की समस्याओं का कारण बनते हैं। डॉक्टर ने उन्हें तीन चीजों का पालन करने के लिए कहा-

1. नींद का शेड्यूल नियमित रखें। सोने और जागने का एक निश्चित समय करने से बायोलॉजिकल क्लॉक मजबूत होती है, तन-मन स्वस्थ रहता है। 2. पूरे दिन जितना संभव हो सक्रिय रहें और शरीर को थकाएं। इससे स्पष्ट रूप से अच्छी नींद को बढ़ावा मिलेगा। डॉक्टर ने आगे सलाह दी कि सोने से पहले सुकून और खुशी देने वाली कुछ गतिविधियां करने से दिमाग शांत और आराम की मुद्रा में रहेगा। यदि संभव नहीं है, तो कम से कम सोने से पहले कुछ समय सुकून से बैठकर आराम करें। 3. अगर फिर भी रात अच्छी तरह से नहीं कटती, तो डॉक्टर ने उन्हें कहा कि इस पर ध्यान न दें जैसे शरीर को न्याय नहीं मिला। जो लोग रात में अच्छा आराम नहीं मिलने के बावजूद, इस पर सोचने के बजाय आगे बढ़ जाते हैं, वे लोग उनकी तुलना में बेहतर करते हैं, जो कि स्लीप हाइजीन के नियमों को सख्ती से लागू करने पर ही ध्यान लगाए रहते हैं।

जिन लोगों को ढंग से नींद नहीं आती, उन्हें मेरी व्यक्तिगत सलाह है कि पहले ये समझना चाहिए कि क्या वे किसी तनाव या चिंता से पीड़ित हैं। दोनों के बीच मुख्य अंतर ये है कि तनाव पुरानी समस्या है जो हमारे साथ कुछ समय से चल रही है जैसे किसी रिश्तेदार की खराब सेहत आदि, वहीं चिंता भविष्य को लेकर अपेक्षाएं हैं। एक बार जब आप उन्हें वर्गीकृत कर लेते हैं, तो दोनों को अलग-अलग संभालना आसान हो जाता है। समस्या तब बढ़ती है जब दोनों- तनाव व चिंता एक साथ हो जाते हैं और लोग नहीं जानते कि कौन-सी चीज क्या है।

फंडा यह है कि अपनी स्लीप हाइजीन को जानकर- जिसमें जरूरी स्लीप साइकिल भी है- हम जीवन में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

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