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मेरे लिए कामकाजी दिनों में 8 घंटे की नींद लेना नामुमकिन है। इसलिए मैं ऑफिस में ही 20 मिनट की एक प्रभावी झपकी लेता हूं, ताकि खुद को तरोताजा रख सकूं।’ यह कहानी टोक्यो की एक कंसल्टिंग फर्म में काम करने वाले मासायोशी मासुयामा की है, लेकिन बात अधिकांश जापानियों पर लागू होती है। जापान दुनिया का सबसे कम सोने वाला देश है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) का डेटा बताता है कि जापानी, अमेरिकी लोगों की तुलना में औसतन डेढ़ घंटा कम नींद ले पाते हैं। लंबे सफर, काम के अंतहीन घंटे और देर रात तक चमचमाती लाइटों की संस्कृति ने जापान को ‘नींद से कंगाल’ बना दिया है। इस वजह से जापान में हजारों करोड़ रु. की ‘स्लीप टेक’ इंडस्ट्री खड़ी हो गई है। यहां लोग एक झपकी लेने के लिए काफी पैसा खर्च कर रहे हैं। जापान में ‘स्लीप टेक’ प्रोडक्ट्स आई मास्क या तकिए तक नहीं सिमटे हैं। कुछ मिनट की झपकी के लिए माहौल बनाने वाले गैजेट्स हैं। स्मार्ट बेड यूजर्स का रुख भांपकर एंगल बदलता है। 20 मिनट की झपकी वाले प्रोडक्ट हैं, जिससे ताजगी आए, उठने पर सुस्ती और भारीपन न हो। हुड में हेडसेट – अभी प्रोटोटाइप है। इसे 20 मिनट की झपकी में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें हुड के अंदर हेडसेट लगा है। यह ‘न्यूरोम्यूजिक’ चलाता है। बाहर का शोर कम करता है। स्टैंडिंग नैप बॉक्स – इससे ऑफिस में ही खड़े-खड़े 5-10 मिनट की झपकी ले सकते हैं। दावा है कि यह उन लोगों के लिए है, जो काम के बीच नींद पूरी करना चाहते हैं। यह टोक्यो के कई ऑफिसों में इस्तेमाल हो रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ त्सुकुबा के स्लीप मेडिसिन के प्रमुख मसाशी यानागिसावा कहते हैं, यह संभव है। हालांकि आरामदायक झपकी के लिए सबसे अच्छी पोजिशन पर शोध कम हैं। कैप्सूल होटल में स्लीप एनालिसिस, सेंसर से ट्रैकिंग टोक्यो का ‘नाइन ऑवर अकासाका’ एक कैप्सूल होटल है। कैप्सूल होटल डॉर्मिटरी जैसे होते हैं। यहां लोग सस्ते में ‘पॉड’ में सोते हैं। ऐसे होटल स्लीप स्टडी के लिए अच्छे होते हैं, क्योंकि हर पॉड एक जैसा होता है। पॉड के अलग-अलग हिस्सों में सेंसर लगे होते हैं। इससे बिना कोई डिवाइस पहने नींद मॉनिटर हो सकती है। होटल यूजर की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डेटा मेडिकल और रिसर्च संस्थानों के साथ शेयर करता है। जिन मेहमानों के नतीजे खराब आते हैं, उन्हें क्लिनिक रेफरल भी दिए जाते हैं। जो गेस्ट एनालिसिस मांगते हैं, उन्हें पैटर्न और रिस्क फैक्टर्स की रिपोर्ट मिलती है।
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