एन. रघुरामन का कॉलम:  हर व्यवसाय को संभावित अनिश्चितताओं की तैयारी जरूर रखनी चाहिए
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: हर व्यवसाय को संभावित अनिश्चितताओं की तैयारी जरूर रखनी चाहिए

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • N. Raghuraman’s Column: Every Business Must Prepare For Potential Uncertainties

7 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

एक जवान छुट्टी के बाद गुरुवार को अपनी ड्यूटी जॉइन नहीं कर सका। एक बेटा, जो अपनी मां और पत्नी के साथ 25 दिनों की छुट्टी बिताना चाहता था- उसने एक दिन तो एयरपोर्ट पर ही खो दिया। एक पिता बीमार बेटी की देखभाल के लिए तत्काल नहीं जा पाया। एक युवा नौकरीपेशा पहले ही दिन समय से नौकरी पर नहीं पहुंचा।

पिछले तीन दिनों से भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो में भारी अव्यवस्था के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी सैकड़ों कहानियां सामने आ रही हैं। 2 दिसंबर को उड़ानों में विलम्ब की छिटपुट सूचनाएं आईं, लेकिन 4 दिसंबर तक यह बड़े संकट में बदल गया। 300 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं और हजारों लोग प्रभावित हुए।

भारत में एयरलाइन व्यवसाय चलाना सबसे ज्यादा चुनौती भरा काम है। पिछले 30 सालों में 20 से ज्यादा एयरलाइंस बंद और दिवालिया हो चुकी हैं। इंडिगो ने स्टैंडर्डाइज्ड फ्लीट, वजन कम करने के उपाय और स्मार्ट सेल-लीजबैक मॉडल के जरिए ऑपरेशनल इफिशियंसी और कॉस्ट कंट्रोल पर लगातार फोकस रखा है।

इन सबने उसे 15 वर्षों से भारत की सर्वाधिक मुनाफे वाली एयरलाइन बनाए रखा। आज यह रोजाना 2200 से ज्यादा उड़ानें संचालित कर 3.5 लाख से ज्यादा यात्रियों को सेवा देती है और 65% मार्केट शेयर के साथ देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है।

कंपनी ने किफायती और इफिशियंट एयर ट्रांसपोर्टर बने रहने के लिए अपने किसी एयरक्राफ्ट को एक अतिरिक्त मिनट भी खड़े नहीं रहने दिया। यात्रियों के सामान का वजन सख्ती से देखा जाता था। एयरलाइन ने अपने मेन्यू से हॉट मील हटा दिया, ताकि 20-20 किलो के 2 या 4 ओवन हटाकर उड़ान को 80 किलो तक हल्का किया जा सके। ज्यादा महिला केबिन क्रू रखीं, जो पुरुषों से औसतन 15-20 किलो हल्की होती हैं। पूरा फोकस ऑनलाइन टाइम परफॉर्मेंस (ओटीपी) पर था। उसका स्लोगन भी यही था- ‘ऑन टाइम, ऑल द टाइम’।

तो फिर आखिर क्या हुआ कि 90% से अधिक ओटीपी वाली एयरलाइन 4 दिसंबर को 20% ओटीपी से भी नीचे चली गई? यात्रियों को इतना बड़ा ऑपरेशनल संकट झेलना पड़ा? भारतीय विमानन कंपनियों के पायलट एक दशक से ज्यादा समय से अधिक मानवीय फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) और रोस्टर नियमों की मांग कर रहे थे, ताकि तनाव और थकान कम हो और फ्लाइट सेफ्टी बेहतर रहे।

देश में विमानन सेवाओं की निगरानी करने वाली संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने 2023 में कोर्ट को बताया कि वह नए एफडीटीएल नियम लाएगी। मुख्य बदलावों में ये प्रावधान थे कि पायलटों को हफ्ते में 36 की जगह 48 घंटे का लगातार आराम दिया जाएगा।

हर पायलट सिर्फ दो नाइट लैंडिंग कर सकेगा, जिनकी पहले कोई सीमा नहीं थी। इसका मतलब, पायलट कानूनी तौर पर अतिव्यस्त शेड्यूल वाली कम फ्लाइट ले पाएंगे- लेकिन एयरलाइंस को समान नेटवर्क के लिए ही ज्यादा पायलट रखने होंगे।

उसी वक्त साफ हो गया कि पायलटों को अधिक रिकवरी टाइम देने और फिर भी समान संख्या में उड़ानें संचालित करने के लिए ज्यादा पायलट भर्ती करने होंगे। नए नियम जनवरी 2024 में जारी हुए। इन्हें लागू करने के लिए 1 जून 2024 की तारीख तय हुई, लेकिन इसे टाल दिया गया।

अंतत: डीजीसीए ने कोर्ट को बताया कि नियमों को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले 1 जुलाई 2025 और फिर 1 नवंबर 2025 से। दिसंबर आते-आते अस्थायी जुगाड़ नाकाम हो गए। इंडिगो ‘क्राइसिस मोड’ में काम नहीं कर पा रही थी। पायलट पूरी तरह थक चुके थे।

फ्लाइट्स और पायलटों की संख्या के बीच यही असंतुलन इस हफ्ते खुलकर सामने आ गया। हालांकि शुक्रवार शाम को सरकार ने एफडीटीएल नियम से कुछ समय की राहत दी है, लेकिन ध्यान रखें कि कोहरे का आगामी सीजन फिर व्यवस्था बिगाड़ सकता है।

फंडा यह है कि इस मौजूदा संकट से सबसे बड़ा सबक ये मिलता है कि आप भले ही किसी भी व्यवसाय में हों, अनिश्चितताओं के लिए हमेशा कुछ तैयारी रखनी चाहिए। योजना इतनी मजबूत हो कि आपका व्यवसाय प्रभावित ना हो।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *