जरूरत की खबर- जेल मेनीक्योर से कैंसर का खतरा:  नेल्स हो सकते हैं डैमेज, 8 सावधानियां जरूरी, जानें नाखूनों को कैसे रखें हेल्दी
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जरूरत की खबर- जेल मेनीक्योर से कैंसर का खतरा: नेल्स हो सकते हैं डैमेज, 8 सावधानियां जरूरी, जानें नाखूनों को कैसे रखें हेल्दी

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किसी शादी, पार्टी या खास मौके पर खूबसूरत और चमकदार नाखून हर लड़की की चाहत होती है। यही वजह है कि पिछले कुछ साल में जेल मेनीक्योर काफी पॉपुलर हुआ है। जेल मेनीक्योर एक ब्यूटी ट्रीटमेंट है। इसमें नाखूनों पर खास जेल पॉलिश की कई लेयर्स लगाई जाती हैं। ये परफेक्ट फिनिश के साथ टिकाऊ भी होता है। इसकी चमक के पीछे कुछ ऐसे हेल्थ रिस्क भी हो सकते हैं। जेल मेनीक्योर प्रोसिजर के दौरान इस्तेमाल होने वाली यूवी (UV) लाइट और कुछ केमिकल्स नाखूनों और स्किन को डैमेज कर सकते हैं। साल 2023, में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया’ के रिसर्चर्स की एक स्टडी जर्नल ‘नेचर कम्युनिकेशन’ में पब्लिश हुई। इसमें पाया गया कि ‘यूवी नेल लैम्प’ के संपर्क में आने से ह्यूमन सेल्स को नुकसान पहुंच सकता है। इससे कैंसर का रिस्क भी बढ़ सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में बात करेंगे जेल मेनीक्योर की। साथ ही जानेंगे कि-
एक्सपर्ट- डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- जेल मेनीक्योर क्या होता है? जवाब- जेल मेनीक्योर में नेल्स पर खास जेल पॉलिश को कई लेयर लगाई जाती हैं। सवाल- जेल पॉलिश और स्टैंडर्ड नेल पॉलिश में क्या फर्क है? जवाब- देखने में दोनों लगभग एक जैसे लगते हैं। लेकिन स्टैंडर्ड नेल पॉलिश को सूखने के लिए 20-30 मिनट या उससे ज्यादा समय लग सकता है। वहीं, जेल पॉलिश को UV या LED लैंप के नीचे 60-90 सेकेंड में क्योर किया जाता है। सवाल- जेल पॉलिश पर हुई रिसर्च में कौन-से रिस्क सामने आए हैं? जवाब- साल 2024, में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी’ में एक सिस्टमैटिक रिव्यू पब्लिश हुआ। इसमें रिसर्चर्स ने जेल मेनीक्योर में इस्तेमाल होने वाले UV नेल लैम्प पर हुई कई स्टडीज को एनालाइज किया। इसका मकसद यह समझना था कि UV नेल लैम्प का स्किन पर क्या असर पड़ता है और क्या इससे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ता है। स्टडी में क्या सामने आया? सवाल- जेल नेल पॉलिश रिस्की क्यों है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- 1. नेल्स डीहाइड्रेशन 2. नेल प्लेट को मैकेनिकल डैमेज 3. फंगल इन्फेक्शन 4. नेल्स रिकवरी पर असर सवाल- जेल मेनीक्योर से नाखूनों को क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- जेल पॉलिश में मौजूद केमिकल्स नाखूनों को पतला और कमजोर बना सकते हैं। इसके बार-बार इस्तेमाल से नाखूनों की ऊपरी लेयर को नुकसान होता है और आसपास की स्किन में जलन हो सकती है। ग्राफिक में सभी रिस्क देखिए- सवाल- जेल मेनीक्योर के बाद कौन-से संकेत खतरे की घंटी हो सकते हैं? जवाब- कुछ संकेत रिस्की हो सकते हैं, इन्हें इग्नोर न करें। जैसे- सवाल- किन लोगों को जेल मेनीक्योर से बचना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे- सवाल- जेल मेनीक्योर से होने वाले रिस्क से कैसे बचें? जवाब- ऐसे में कुछ सावधानियां जरूरी हैं। ‘अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी’ (AAD) के अनुसार- सभी सेफ्टी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- नाखूनों को नेचुरली हेल्दी कैसे बनाएं? जवाब- नाखूनों की सेहत हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़ी होती है। हाथ धोने या काम करने के बाद मॉइश्चराइजर लगाने से नाखूनों और क्यूटिकल्स में ड्राईनेस नहीं आती। ग्राफिक में नाखूनों को हेल्दी रखने के टिप्स देखिए- सवाल- नाखूनों को लंबे और चमकदार बनाने के लिए क्या खाएं? जवाब- नाखूनों की मजबूती और चमक का सीधा संबंध शरीर को मिलने वाले पोषण से होता है। अगर डाइट में जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी हो तो नाखून जल्दी टूटने लगते हैं और बेजान दिखते हैं। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और सही देखभाल से नाखूनों को बिना किसी महंगे ट्रीटमेंट के भी हेल्दी, लंबे और चमकदार रखा जा सकता है। ग्राफिक में देखिए क्या खाएं, क्या न खाएं- अब समझते हैं कौन से पोषक तत्व किसमें पाए जाते हैं- सवाल- जेल मेनीक्योर के अन्य विकल्प क्या हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- कुल मिलाकर, खूबसूरत नाखून अच्छी बात है, लेकिन उनकी सेहत उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर आप सही जानकारी और सावधानियों के साथ फैसला लेंगी, तो स्टाइल और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रख सकती हैं। …………………………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मी में ज्यादा हो रहे मुंहासे:अपनी फूड हैबिट बदलें, 8 चीजें बिल्कुल न खाएं, समर स्किन केयर रूटीन के 6 स्टेप्स गर्मियों में चेहरा चिपचिपा लगने लगता है और छोटे-छोटे पिंपल्स अचानक बढ़ जाते हैं। दरअसल, तापमान बढ़ने पर स्किन खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाती है। इससे पसीना देर तक चेहरे पर बना रहता है। इस कारण पोर्स ब्लॉक हो सकते हैं। ऐसे में स्किन छोटे-छोटे पिंपल्स भी जल्दी इंफ्लेम (सूजन, रेडनेस) होकर जिद्दी एक्ने का रूप ले लेते हैं। इन्हें कंट्रोल करना आसान नहीं होता। पूरी खबर पढ़ें…



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