जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ता वाटर रिटेंशन का रिस्क:  चेहरे और बॉडी में सूजन, डॉक्टर से समझें इसका साइंस, कम करने के 9 टिप्स
महिला

जरूरत की खबर- मानसून में बढ़ता वाटर रिटेंशन का रिस्क: चेहरे और बॉडी में सूजन, डॉक्टर से समझें इसका साइंस, कम करने के 9 टिप्स

Spread the love


  • Hindi News
  • Lifestyle
  • Monsoon Water Retention Health Risks; Symptoms Diet Plan & Prevention Tips | Doctor Advice

10 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

  • कॉपी लिंक

बारिश शुरू होते ही लोग चाय के साथ पकौड़े, चिप्स और नमकीन ज्यादा खाने लगते हैं। बारिश के कारण बाहर निकलना भी कम हो जाता है। इससे रोज की फिजिकल एक्टिविटी घट जाती है। खानपान और रूटीन में आए ये बदलाव शरीर में वाटर रिटेंशन बढ़ा सकते हैं।

दरअसल, ज्यादा नमक वाला खाना शरीर में पानी रोकता है। वहीं कम फिजिकल एक्टिविटी भी सूजन और भारीपन जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है। ऐसे में वाटर रिटेंशन के कारणों और इसके संकेतों को समझना जरूरी है, ताकि समय रहते इसे कंट्रोल किया जा सके।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि किन आदतों से वाटर रिटेंशन बढ़ता है? साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके लक्षण क्या हैं?
  • इसे कम करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?

एक्सपर्ट- डॉ. एम.के. सिंह, डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल- वाटर रिटेंशन क्या होता है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • वाटर रिटेंशन एक हेल्थ कंडीशन है।
  • इस कंडीशन में शरीर के टिश्यू में जरूरत से ज्यादा फ्लूइड जमा हो जाता है। इससे शरीर में सूजन दिखने लगती है।
  • यह कई वजहों से हो सकती है। जिन्हें हार्ट, लिवर या किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा दिखती है।
  • वाटर रिटेंशन को मेडिसिन की भाषा में ’एडेमा’ कहा जाता है।

सवाल- मानसून में वाटर रिटेंशन की समस्या क्यों बढ़ जाती है?

जवाब- मानसून में ज्यादा ह्यूमिडिटी शरीर के फ्लूइड बैलेंस को प्रभावित कर सकती है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • उमस में पसीना जल्दी इवैपोरेट नहीं होता। इससे शरीर के लिए गर्मी बाहर निकालना और खुद को ठंडा रखना मुश्किल हो जाता है।
  • इस मौसम में शारीरिक गतिविधि कम होने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ सकता है।
  • ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में सोडियम बढ़ जाता है, जिससे वाटर रिटेंशन होता है।
  • पर्याप्त पानी न पीने पर भी शरीर पानी को रोककर रखने लगता है।
  • लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से पैरों और टखनों में सूजन बढ़ सकती है। इससे भी वाटर रिटेंशन होता है।

सवाल- क्या यह समस्या सिर्फ इसी मौसम में बढ़ती है?

जवाब- नहीं, वाटर रिटेंशन किसी भी मौसम में हो सकता है। हालांकि मानसून में नमी, कम फिजिकल एक्टिविटी, ज्यादा नमक वाला खाना और कम पानी पीने जैसी वजहों से यह समस्या बढ़ जाती है।

सवाल- कैसे पता चलेगा कि शरीर में वाटर रिटेंशन हो रहा है?

जवाब- जब शरीर में अतिरिक्त फ्लूइड जमा होने लगता है, तो कुछ साफ संकेत दिखने लगते हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए-

सवाल- शरीर के किन हिस्सों में सबसे ज्यादा सूजन दिखती है?

जवाब- वाटर रिटेंशन में सूजन आमतौर पर उन हिस्सों में ज्यादा दिखती है, जहां फ्लूइड जमा होना आसान होता है या ब्लड सर्कुलेशन धीमा होता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को वाटर रिटेंशन का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- इन्हें वाटर रिटेंशन का रिस्क ज्यादा होता है-

  • जो डेस्क जॉब करते हैं।
  • जो ज्यादा ट्रैवल करते हैं।
  • जो ज्यादा नमक खाते हैं।
  • जो ओबीज हैं।
  • जो स्टेरॉयड्स या ब्लड प्रेशर की दवाएं लेते हैं।
  • जिन्हें किडनी, हार्ट या लिवर डिजीज जैसी हेल्थ कंडीशन हैं।
  • जिनकी लाइफस्टाइल सिडेंटरी है।
  • प्रेग्नेंट महिलाएं।
  • बुजुर्ग।

सवाल- खाने की कौन-सी चीजें वाटर रिटेंशन का रिस्क बढ़ाती हैं?

जवाब- कुछ फूड्स शरीर में सोडियम बढ़ा देते हैं। इससे वाटर रिटेंशन बढ़ता है। ग्राफिक में ऐसे फूड्स की लिस्ट देखिए-

सवाल- कौन-से फूड्स नेचुरल डाइयूरेटिक की तरह काम करते हैं?

जवाब- कुछ नेचुरल डाइयूरेटिक्स फूड्स (ऐसे फूड/ड्रिंक्स जो यूरिन फ्रीक्वेंसी बढ़ाते हैं) वाटर रिटेंशन कम करने में मदद करते हैं। ग्राफिक में इनकी लिस्ट देखिए-

ध्यान दें, नेचुरल डाइयूरेटिक्स सहायक हो सकते हैं, लेकिन ये इलाज का विकल्प नहीं हैं। अगर सूजन बार-बार हो रही है या ज्यादा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

सवाल- ये फूड कैसे मददगार होते हैं?

जवाब- नेचुरल डाइयूरेटिक फूड्स वाटर रिटेंशन को कई तरीकों से कम करने में मदद करते हैं। पॉइंटर्स से समझिए-

  • ये किडनी को एक्टिव करके यूरिन प्रोडक्शन बढ़ाते हैं। इससे शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और सोडियम बाहर निकलता है।
  • खीरा और तरबूज जैसे हाई वाटर कंटेंट फूड्स शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। इससे बॉडी में वाटर रिटेंशन कम होता है।
  • नारियल पानी और केले में भरपूर मात्रा में पोटेशियम होता है, जो सोडियम काे बैलेंस करता है।

सवाल- अगर वाटर रिटेंशन हो रहा है तो मानसून में कौन से ड्रिंक्स नहीं पीने चाहिए?

जवाब- वॉटर रिटेंशन होने पर ज्यादा नमक, शुगर या अल्कोहलिक ड्रिंक्स को अवाॅइड करना बेहतर है, जैसेकि-

  • हाई सॉल्ट छाछ
  • पैकेज्ड सूप
  • सॉफ्ट/कोल्ड ड्रिंक्स
  • पैकेज्ड फ्रूट जूस
  • बहुत ज्यादा चाय-कॉफी
  • सोडा और स्पार्कलिंग वाटर
  • अल्कोहल

क्यों कम करें?

  • ज्यादा सोडियम से शरीर में फ्लूइड जमा हो सकता है और सूजन बढ़ सकती है।
  • ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स से कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है। इससे ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
  • कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में मौजूद गैस से भी ब्लोटिंग हो सकती है।
  • ज्यादा अल्कोहल शरीर के फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को प्रभावित करता है।

सवाल- वाटर रिटेंशन कम करने के लिए डाइट प्लान क्या होना चाहिए?

जवाब- इसके लिए बैलेंस्ड डाइट जरूरी है। पूरा डाइट प्लान देखिए-

  • सुबह: 1 गिलास सादा या गुनगुना पानी।
  • नाश्ता: वेजिटेबल पोहा या दलिया+एक मौसमी फल।
  • मिड-मॉर्निंग: एक छोटी कटोरी पपीता या एक अमरूद।
  • लंच: 1-2 रोटी+लौकी/तोरी की सब्जी+दाल+खीरा और टमाटर का सलाद।
  • शाम का स्नैक: ग्रीन टी+बिना नमक या कम नमक वाला भुना चना।
  • डिनर: 1-2 रोटी+ मूंग दाल+हरी पत्तेदार सब्जी।

टिप: नमक कम रखें, प्रोसेस्ड फूड से बचें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।

सवाल- लाइफस्टाइल में ओवरऑल कौन-से बदलाव करके वाटर रिटेंशन को कम किया जा सकता है?

जवाब- राेजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके वाटर रिटेंशन के रिस्क से काफी हद तक बचा जा सकता है। ग्राफिक में सभी टिप्स देखिए-

सवाल- सामान्य सूजन और मेडिकल इमरजेंसी वाली सूजन में फर्क कैसे समझें? कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?

जवाब- पॉइंटर्स में दोनों का फर्क देखिए-

सामान्य सूजन के संकेत

  • लंबे समय तक खड़े या बैठे रहने के बाद हल्की सूजन।
  • पैरों, टखनों या हाथों में दिन के अंत में सूजन।
  • सुबह उठने पर सूजन कम हो जाना।
  • नमक कम करने, पैर ऊपर रखने या आराम करने से ठीक होना।

इमरजेंसी के संकेत

  • अचानक और तेजी से सूजन बढ़ना।
  • एक ही पैर में ज्यादा सूजन और दर्द।
  • सूजन के साथ सांस फूलना या सीने में दर्द।
  • चेहरे, होंठ या आंखों के आसपास अचानक सूजन।
  • सूजन के साथ तेज दर्द, रेडनेस।
  • किडनी, लिवर या हार्ट के मरीज में सूजन होना।

कब डॉक्टर के पास जाएं?

  • सूजन 2–3 दिन में कम न हो।
  • अचानक बहुत ज्यादा सूजन आ जाए।
  • सांस लेने में दिक्कत हो।
  • सीने में दर्द या भारीपन लगे।
  • एक पैर में दर्द के साथ सूजन हो।
  • प्रेग्नेंसी में अचानक सूजन बढ़ जाए।
  • ऐसे लक्षण दिखें तो देरी न करें, तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

सवाल- क्या वाटर रिटेंशन किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है?

जवाब- हां, यह शरीर में किसी इंटरनल हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत भी हो सकता है। जैसेकि-

  • हार्ट डिजीज: जब हार्ट ठीक से ब्लड पंप नहीं करता तो पैरों और टखनों में सूजन आने लगती है।
  • किडनी डिजीज: किडनी फ्लूइड को सही से बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे बॉडी में पानी जमा होने लगता है।
  • लिवर डिजीज: लिवर कमजोर होने पर पेट और पैरों में सूजन दिख सकती है।
  • थायरॉइड डिसऑर्डर: हार्मोनल असंतुलन भी फ्लूइड रिटेंशन बढ़ा सकता है।
  • डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT): इस कंडीशन में एक पैर में दर्द और सूजन हो सकती है।

……………………………………

ये खबर भी पढ़ें…

जरूरत की खबर- आपका मोटापा फैट है या वाटर वेट:जानें ये क्या होता है, शरीर पानी क्यों स्टोर करता है, डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी

मनुष्य के शरीर में लगभग 60% हिस्सा पानी होता है। यह शरीर के हर फंक्शन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन क्या होगा अगर शरीर जरूरत से ज्यादा पानी स्टोर करने लगे?

इससे अचानक वजन बढ़ सकता है। शरीर फूला हुआ महसूस हो सकता है। इसे ‘वाटर वेट’ कहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *