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जेन-जी नौकरी के लिए ‘योग्य’ नहीं: 37% बॉस नए ग्रेजुएट्स की जगह रोबॉट चुनने को तैयार; वजह- कम्युनिकेशन और पेशेवर स्किल की कमी

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नौकरी के जरिए ‘कामकाजी जीवन’ में कदम रख रहे नए युवाओं (जेन-जी) के पेशेवर व्यवहार और कार्यस्थल कौशल को लेकर दुनिया भर की कंपनियों और अधिकारियों में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। कई अमेरिकी कंपनियों का मानना है कि नए ग्रेजुएट्स में कम्युनिकेशन स्किल्स, कामकाजी तौर-तरीकों और तार्किक सोच की भारी कमी दिख रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस में ईमेल किसे बीसीसी करना है, मीटिंग में असहमति कैसे रखनी है, बॉस से सवाल कब पूछना है और एआई से मिले जवाब की जांच कैसे करनी है- नई पीढ़ी के कर्मचारियों के सामने ये वास्तविक चुनौतियां हैं। नेशनल एसोसिएशन ऑफ कॉलेज एंड एम्प्लॉयर्स (एनएसीई) के सर्वे में 71.2% कंपनियों ने नए ग्रेजुएट्स को नौकरी के लिए ‘कुछ हद तक ही तैयार’ बताया है। केवल 21.6% ने उन्हें ‘बहुत अच्छी तरह तैयार’ माना, जबकि 7.2% ने उन्हें बिल्कुल तैयार नहीं माना। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, 75% कंपनियों ने माना है कि हाल ही में भर्ती किए गए नए ग्रेजुएट्स का प्रदर्शन ‘असंतोषजनक’ रहा है। वहीं, 800 से अधिक एचआर लीडर्स के एक अन्य सर्वे में 37% अधिकारियों ने कहा कि वे किसी नए ग्रेजुएट को नौकरी देने के बजाय रोबॉट या एआई से काम कराना पसंद करेंगे, जबकि 30% ने पद खाली रखना बेहतर समझा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हर नई पीढ़ी को कार्यस्थल की समझ विकसित करने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के साथ यह चुनौती काफी बड़ी है। कोरोना महामारी के दौरान स्कूल और कॉलेज बंद रहने, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, लोगों से दूरी और वर्क-फ्रॉम-होम का माहौल रहा। ऐसे समय में पले-बढ़े युवाओं में अब बातचीत और ऑफिस नॉर्म्स (कम्युनिकेशन स्किल्स) की भारी कमी देखी जा रही है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी प्रोफेसर टेसा वेस्ट का कहना है कि नए छात्र कम्युनिकेट करने और समस्याओं का सामना करने में पिछली पीढ़ियों से पिछड़ रहे हैं, जिन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी अब शिक्षण संस्थानों पर आ गई है। पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पीटर कैपेली का कहना है कि इस समस्या के लिए केवल कॉलेजों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है; कंपनियों ने भी प्रवेश स्तर के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और मेंटरशिप पर ध्यान देना कम कर दिया है। 2000 के दशक के बाद से ही नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के घंटों में गिरावट आई है। कॉलेज-कंपनियां युवाओं को सिखाएं ऑफिस कल्चर, ट्रेनिंग दें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की मनोविज्ञान प्रोफेसर टेसा वेस्ट कहती हैं कि तकनीकी कौशल सीखे जा सकते हैं, लेकिन बातचीत, बहस, असहमति संभालना और लोगों के साथ काम करना- सीखने में अधिक समय लगता है। तोशिबा के चीफ एचआर ऑफिसर जेसन डेसेंट्ज के अनुसार, कॉलेज और कंपनियों को मिलकर युवाओं को ऑफिस कल्चर, सामाजिक व्यवहार और एआई के जिम्मेदार उपयोग की ट्रेनिंग देनी चाहिए। प्रो. पीटर कैपेली कहते हैं कि हर पीढ़ी पर कार्यस्थल में आने के समय ‘तैयार नहीं’ होने का आरोप लगा है। जेन-जी इससे अलग नहीं हैं।



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