दूसरी शादी को लेकर समाज की मानसिकता में बड़ा बदलाव:  28% तलाकशुदा नई राह देख रहे, 10 साल में दोबारा शादी करने वाले 43% बढ़े
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दूसरी शादी को लेकर समाज की मानसिकता में बड़ा बदलाव: 28% तलाकशुदा नई राह देख रहे, 10 साल में दोबारा शादी करने वाले 43% बढ़े

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कुछ समय पहले देश के एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी ब्रांड ने अपनी वेडिंग ज्वेलरी का एक ऐसा विज्ञापन जारी किया जो न केवल परंपरा से हटकर था बल्कि बदलती सामाजिक भावनाओं का भी प्रतीक था। यह विज्ञापन भारत में तलाक और पुनर्विवाह से जुड़ी मानसिकता में बदलाव को बखूबी दर्शाता है। विज्ञापन में, एक खूबसूरत दुल्हन अपनी शादी के लिए तैयार हो रही है। खास बात ये है कि दुल्हन के माता-पिता और सहेलियों के साथ उसकी छोटी बेटी भी उसे सजाने में मदद कर रही है। दूल्हा अपनी नई पत्नी और सौतेली बेटी दोनों को अपना रहा है और उनके प्रति सच्चा प्यार दिखाता है।
भारत में तलाक या जीवनसाथी के न रहने पर दूसरी शादी अब केवल सामाजिक कर्तव्य नहीं, बल्कि व्यक्तिगत खुशी, भावनात्मक संतुलन और जीवन को दूसरा मौका देने की नई सोच बनती जा रही है। लोग अब असफल रिश्तों को जिंदगी की समाप्ति नहीं मान रहे। महानगरों से लेकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक, तलाकशुदा, विधवा और विधुर लोग दोबारा साथी चुनने में पहले की तुलना में अधिक सहज दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही ‘ब्लेंडेड फैमिली’ यानी मिश्रित परिवारों की अवधारणा भी धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है, जहां बच्चे, नए रिश्ते और साझा जिम्मेदारियां आधुनिक परिवार की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। हर छह सफल शादियों में से एक दूसरी शादी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म जीवनसाथी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एक दशक में दूसरी शादी के इच्छुक लोगों की संख्या में 43% बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां साल 2016 में 11% लोग दूसरी शादी की तलाश कर रहे थे, वहीं साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 16% हो गया। अब हर छह सफल शादियों में से एक दूसरी शादी है। तलाकशुदा प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाने वालों में 15% ऐसे लोग हैं जिनकी ये पहली ही शादी है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो शहरों की करीब 30% शादियों में कम से कम एक ऐसा साथी होता है जिसकी पहले शादी हो चुकी होती है। मैचमेकिंग एप रिबाउंस के सर्वे के मुताबिक 28% तलाकशुदा लोग अपने अतीत को भूलकर नए सिरे से शुरुआत करने के लिए तैयार हैं। सर्वे के अनुसार टियर 1 शहरों की 35% से अधिक तलाकशुदा महिलाएं खुद को एक और मौका देने के लिए समर्पित मैचमेकिंग एप्स का सहारा लेना पसंद कर रही हैं। करीब 41% दोबारा शादी करने की चाह रखने वाले लोग शुरुआत में ही कपल थेरेपी पर चर्चा करते हैं। अधिक उम्र के लोगों में भी भावनात्मक सहारे के लिए पुनर्विवाह का चलन बढ़ रहा है। खास बात ये है कि परिवार और बच्चे भी उनके इस फैसले में सहयोगी हैं। दूसरी शादी के लिए अब अलग मैट्रिमोनी प्लेटफॉर्म फिर जीवनसाथी तलाशने की प्रक्रिया अब केवल परिवारों या बिचौलियों तक सीमित नहीं है। सेकंडशादी.कॉम, सेकंडसूत्रा.कॉम, डाइवर्सीमैट्रिमोनी.कॉम जैसी साइटें खासतौर पर दूसरी शादी के लिए बनी हैं। इसके अलावा कई रेगुलर मैट्रिमोनियल साइट्स और एप्स पर विशेष रूप से दूसरी शादी के लिए अलग प्रोफाइल और सेक्शन बनाए गए हैं। तलाकशुदा लोगों के लिए डेटिंग एप्स भी चलन में आ गए हैं। मैरिज काउंसलिंग – शादी की सलाह लेने वाले 10 में 2 लोग तलाकशुदा, परिवार का समर्थन भी मिल रहा रिलेशनशिप काउंसलर और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. काकोली राय बताती हैं कि पहले शादी टूटना समाज में एक बड़ी बात होती थी। अगर शादी टूट जाती थी, तो दोबारा शादी में काफी दिक्कत होती थी। लेकिन अब लोगों की सोच में बहुत बदलाव आ गया है। दूसरी शादी को सामाजिक दबाव के बजाय मानसिक शांति, साथ और सम्मान से जोड़कर देखा जाने लगा है। 3-4 साल पहले रीमैरिज से जुड़ी सलाह लेने वालों की संख्या नगण्य थी। अब शादी के संबंध में सलाह लेने वाले हर 10 लोगों में से 2-3 लोग तलाकशुदा, विधवा या विधुर होते हैं। अमूमन इन लोगों को पुनर्विवाह के लिए इनके परिवार का समर्थन भी मिलता है। युवा विधवा बहू को ससुराल वालों द्वारा दूसरी शादी के लिए प्रोत्साहित करने के मामले भी बढ़े हैं। कई उम्रदराज लोगों के बेटा-बेटी उन्हें दूसरी शादी के लिए प्रेरित कर रहे हैं।



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