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भागदौड़, काम का दबाव, अकेलापन, रिश्तों की उलझन और लगातार स्क्रीन से जुड़े रहने वाली जिंदगी के बीच योग, मेडिटेशन, माइंडफुलनेस, साउंड हीलिंग, विपश्यना, पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी, मून बेदिंग जैसी प्रैक्टिस लोकप्रिय हो रहीं हैं। आयुष मंत्रालय के एक सर्वे में 41% उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने योग और मेडिटेशन को जीवनशैली में शामिल किया है। केंद्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद के मुताबिक देश में योग अभ्यास करने वालों की संख्या 2005 में 30 करोड़ थी जो 2025 में 80% बढ़कर 54 करोड़ से ज्यादा हो गई। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक मानसिक समस्या से जूझ रहे लोगों में वैकल्पिक थेरेपी चुनने की दर काफी अधिक (21.3%) है। इनमें आधे मेडिटेशन को मानसिक शांति के लिए प्रभावी मानते हैं। 2002 से 2022 के बीच अमेरिका में वैकल्पिक हीलिंग प्रैक्टिस का उपयोग 19.2% से बढ़कर करीब दो गुना यानी 36.7% हो गया। बीते दशक में कई तरह की वैकल्पिक हीलिंग थेरेपीज शहरी युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हुई हैं साउंड हीलिंग – तिब्बती सिंगिंग बाउल्स, गोंग और ट्यूनिंग फोर्क्स की तरंगों से तनाव दूर करने का चलन छोटे शहरों में भी लोकप्रिय हो रहा। रेकी और एनर्जी हीलिंग – एनर्जी के जरिए शरीर के चक्रों को संतुलित करने वाली यह थेरेपी अब केवल क्लीनिकों तक सीमित नहीं है। क्रिस्टल हीलिंग – एमेथिस्ट, क्वार्ट्ज जैसे पत्थरों और उनके ब्रेसलेट्स का चलन युवाओं में एक स्टेटस सिंबल और फैशन बन चुका है। माइंडफुलनेस और ध्यान – वर्तमान क्षण में जीना सीखना, जो एंग्जायटी और मानसिक भटकाव को रोकता है। विपश्यना – प्राचीन ध्यान पद्धति आत्म-निरीक्षण द्वारा मन को शुद्ध करती है। बीते 5 वर्षों में इन शिविरों में आने वाले 50% तक बढ़े। पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी – इसमें व्यक्ति अपने अचेतन मन में दबी पहले घट चुकी यादों को देखकर वर्तमान डर या तनाव को ठीक करता है। फॉरेस्ट बेदिंग और मून बेदिंग – जंगल या पेड़ों के बीच या रात में चंद्रमा की रोशनी में बैठकर या लेटकर शांत ऊर्जा को शरीर में महसूस किया जाता है। होलिस्टिक हीलिंग में बढ़ी दिलचस्पी पास्ट लाइफ रिग्रेशन विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक हितेश छाबड़ा कहते हैं, ‘पहले लोग घबराहट, रिश्तों का तनाव या मन की उलझन जैसी बातें दूसरों से छिपाते थे।’अब वे खुलकर समझना चाहते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है।’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी इस बदलाव की तस्वीर दिखाई देती है। चार साल में उनकी पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी की ऑनलाइन कम्युनिटी शून्य से बढ़कर 1.18 लाख से ज्यादा हो गई है। हर महीने करीब 2 लाख व्यूज और 20,000 घंटे का मासिक वॉच टाइम इस विषय में बढ़ती दिलचस्पी का संकेत है। खासकर 20 से 30 वर्ष की उम्र के लोग इमोशनल और रिलेशनशिप से जुड़ी समस्या को समझने के लिए ऐसे तरीकों की ओर बढ़ रहे हैं। कर्मचारियों की वेलनेस पर ध्यान दे रहीं हैं कंपनियां यह बदलाव अब व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं है। कंपनियां भी कर्मचारियों के तनाव और बर्नआउट को गंभीरता से लेने लगी हैं। मिंटेल और कांतार की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों का कर्मचारियों की वेलनेस पर खर्च बीते 5-6 वर्षों में 300% तक बढ़ा है। योग, मेडिटेशन सेशन, काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और वेलनेस प्रोग्राम कॉर्पोरेट संस्कृति का हिस्सा बन रहे हैं। सरकार से बाजार तक बढ़ी हीलिंग की स्वीकार्यता भारत सरकार भी योग, आयुर्वेद, ध्यान और पारंपरिक वेलनेस प्रैक्टिस को बढ़ावा दे रही है। ‘हील इन इंडिया’ भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। आयुष मंत्रालय की पहलों और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने इन तरीकों को मुख्यधारा में पहुंचाने में भूमिका निभाई है। लोग अब सेहत को पूरे शरीर, मन और भावनाओं के संतुलन के रूप में देखने लगे हैं।
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