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नींद की कमी का असर सिर्फ सुस्ती या दिन में नींद आने तक सीमित नहीं है। रोजाना 7-8 घंटे की नींद न मिलने पर मूड, याददाश्त, फैसले लेने की क्षमता और भूख भी प्रभावित होने लगती है। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने पर दिल की बीमारी, कमजोर इम्यूनिटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। नींद पूरी न होने पर दिमाग निगेटिव चीजों पर 60% ज्यादा तेजी से रिएक्ट करता है… 1. ज्यादा इमोशनल होना हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के स्लीप एक्सपर्ट डॉ. बेनाविडेस के मुताबिक कम नींद से निगेटिव चीजों पर रिएक्शन 60% तेज हो जाता है, और दिमाग का इमोशन कंट्रोल करने वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है। 2. वो कबूल लेना, जो आपने किया ही नहीं नींद की कमी होने से किसी ऐसी बात को कबूलने की संभवना 4 गुना बढ़ जाती है, जो आपने किया न हो। थकान इंसान को बिना सोचे-समझे किसी भी बात पर हां कहने के लिए मजबूर कर सकती है। 3. ध्यान न लगा पाना और भटकाव नींद की कमी ADHD जैसे लक्षण पैदा कर देती है। न्यूयॉर्क की स्लीप एक्सपर्ट डॉ. एलिस होगलैंड बताती है कि नींद पूरी न होने से ध्यान केंद्रित करने, बर्ताव और खुद पर काबू रखने की क्षमता कम होती है। 4. हार्मोन्स की गड़बड़ी डॉ. डेविड बेनाविडेस कहते हैं कि नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ‘घ्रेलिन’ बढ़ जाता है और पेट भरने का संकेत देने वाला ‘लेप्टिन’ घट जाता है। जिससे जंक फूड की क्रेविंग बढ़ती है।
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