पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  डूबकर किए गए कार्य की सुगंध व्यवहार में उतरती है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: डूबकर किए गए कार्य की सुगंध व्यवहार में उतरती है

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

जो भी करें डूबकर करें। यदि आप पूजा-पाठ कर रहे हों, कोई इबादत से गुजर रहे हों, थोड़े समय ही भले आप यह काम कर रहे हों- पर डूबकर करिए। उतने वक्त भूल जाइए कि पीछे क्या घटा था और आगे क्या होने वाला है। जो लोग 24 घंटे में अपने तयशुदा धार्मिक कृत्य पूरी तरह इनवॉल्व होकर करेंगे, बाकी समय उनका व्यवहार बहुत आकर्षक हो जाएगा।

उस थोड़ी देर डूबकर किए गए कृत्य की सुगंध दिनभर किए जा रहे कामों में उतर जाएगी। फिर आप परिवार में हों, कारोबार में हो, आपका व्यवहार आकर्षक हो ही जाएगा। लोग आपके आसपास सादगी, साफगोई, सच्चाई और मिठास महसूस करेंगे। क्योंकि आपको फिर अपनी दिनचर्या में चार तरह के लोगों से मिलना है- एक होते हैं निकट के लोग, दूसरे सामान्य संबंध वाले लोग, तीसरे व्यर्थ के लोग और चौथे प्रभावशाली लोग। इन चारों में समान रूप से आकर्षक व्यवहार करिए। ये अपने आप में एक योग है, मेडिटेशन है- क्योंकि भक्त अपना भगवान सबमें देखता है।

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