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जिस रामराज्य को तुलसीदास जी ने आदर्श माना, आज वही व्यंग्य में अव्यवस्था का प्रतीक हो गया। अगर कहीं बिगड़ी हुई व्यवस्था हो तो लोग कहते हैं कि सब रामराज्य चल रहा है। लेकिन रामराज्य किस सुव्यवस्था का नाम था, यह रामचरितमानस में दिखेगा। जब पिछले दिनों दुबई में पारम्परिक रूप से मैंने भागवत कथा की तो चकित हुआ। तभी एक भारतीय भाई ने टिप्पणी की कि रामराज्य क्या है, यह देखना हो तो वो दुबई में है। मुझे बिलकुल सही लगा। हर बात कायदे में है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए यह सारे अवसर दे रहा है। पूरी दुनिया में युवाओं की मानसिक जीवनशैली बड़ी पेचीदा है, लेकिन उसे भी यहां कायदे में देखा जा सकता है। यहां का वातावरण ऐसा है कि मजे कर लो सारे, लेकिन बदतमीजी जरा भी नहीं चलेगी। हर व्यवस्था की हर कार्रवाई नैतिक गलियारों से गुजरती दिखती है। यहां कथा करने के बाद मुझे एक बात समझ में आई कि धर्म का दबाव तो यहां है, लेकिन आतंक नहीं है। यही तो रामराज्य की कल्पना है।
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