पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: श्रोता बनने की बारी आए तो अच्छे श्रोता बनिए

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अच्छा सुनने के लिए अच्छा होना ही पड़ेगा। पक्षीराज गरुड़ ने जब काकभुशुंडि जी से निवेदन किया कि कथा सुनाइए तो तुलसीदास जी ने गरुड़ जी की वाणी का वर्णन किया है- सुनत गरुड़ कै गिरा बिनीता, सरल सुप्रेम सुखद सुपुनीता। गरुड़ जी की विनम्र, सरल, सुंदर, प्रेम युक्त, सुखप्रद और अत्यंत पवित्र वाणी सुनते ही काकभुशुंडि जी के मन में परम उत्साह हुआ। यह एक श्रोता के लक्षण बताए हैं। जब भी श्रोता बनने की बारी आए, अच्छे श्रोता बनिए। जैसे गीता के मुख्य वक्ता तो कृष्ण जी ही हैं, पर जब उनके श्रोता बनने की बारी आई तो उन्होंने कमाल किया। कृष्ण जी ने गीता में 620 श्लोक बोले हैं। अर्जुन ने 57 बोले। गीता के पहले अध्याय में 27 श्लोक तक तो संजय ने दृश्य बताया। उसके बाद 19 श्लोक में अर्जुन धाराप्रवाह बोले और पूरे धैर्य के साथ श्रीकृष्ण ने उनको सुना। आजकल कोई किसी को सुनने को तैयार ही नहीं है। लेकिन श्रोता बनने का अवसर आए तो गरुड़ जी की तरह, कृष्ण जी की तरह कुछ शुभ लक्षण भीतर उतारें।



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