पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हनुमान जी बताते हैं जीवन में शोर व शून्य का संतुलन हो
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हनुमान जी बताते हैं जीवन में शोर व शून्य का संतुलन हो

Spread the love




हम कितनी सांस लेते हैं, कैसे लेते हैं, इसका हिसाब रखना बहुत जरूरी है। जो लोग शांति की तलाश में हैं, उन्हें सांस पर काम करना होगा। क्योंकि मनुष्य के जीवन में सोचने से नहीं, श्वास से चिंता भीतर जाती है। हनुमान जी पवन-पुत्र हैं। हम अपने प्राणों पर मंत्र के जितने प्रयोग करेंगे, उतने ही शांत होंगे और हमारे शरीर से निकलने वाली तरंगें उतनी ही पॉजिटिव हो जाएंगी। हनुमान चालीसा एक मंत्र है। आज जब सारे देश में धूमधाम से हनुमान जयंती मनाई जा रही है, तो एक संकल्प और लिया जाए और वो है- अपनी सांसों से हनुमान चालीसा रूपी मंत्र को जोड़ेंगे। सुंदरकांड को याद किया जाए, क्योंकि आधा सुंदरकांड हनुमान जी का पराक्रम है, चरित्र है, और बाद का आधा सुंदरकांड हनुमान जी ने मौन में गुजारा और राम जी की लीला सामने आई। तो हनुमान जी कहते हैं जीवन में शोर और शून्य का संतुलन होना चाहिए। आज हनुमान जयंती पर हम सबका संकल्प होना चाहिए कि जीवन में खूब परिश्रम और पराक्रम दिखाएंगे, लेकिन समय आने पर खूब शांत भी रहेंगे। भक्त को उत्तेजित नहीं, उत्साहित रहना चाहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *