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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column If A Man And A Woman Are Together, Give Priority To Emotional Relationships
1 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
स्त्री-पुरुष एक साथ काम कर रहे होंगे तो जेंडर कॉन्शसनेस की समस्या आती ही है। पुरुषों को लगता है कि स्त्रियों के निर्णय अपरिपक्व होते हैं। स्त्रियों को लगता है कि पुरुष स्वार्थ लेकर निर्णय लेते हैं। अब इसे यूं समझें कि एक भक्त और योगी में क्या अंतर है।
भक्त निर्बल है, वो परमात्मा से दीनता और हीनता से जुड़ा है। वो कहता है जो कुछ करना है प्रभु आपको करना है। मेरे पास कोई शक्ति नहीं है। स्त्रियों का भाव यही होता है। योगी के पास शक्ति इकट्ठी हो जाती है लेकिन भाव नहीं होता है।
इसलिए जब ये लोग दाम्पत्य जीवन में उतरते हैं, तो पुरुष को पति और स्त्रियों को पत्नी कहा गया। पुरुष की तासीर में है कि नेतृत्व उसके हाथ में हो। लेकिन स्त्री स्वभाव से पत्नी नहीं होती। वो मां होती है, उसका पूरा जीवन भाव प्रधान है।
जब किसी स्त्री से मिलते हैं तो उसमें पत्नी का भाव कम, मां का भाव अधिक होगा। कई बार पत्नियां मां की तरह व्यवहार करती हैं बढ़ती उम्र में। इसलिए स्त्री-पुरुष जब भी साथ हों, व्यावहारिक रूप से तो एक-दूसरे से संबंध रखें, पर भाव के संबंधों को भी प्रधानता दें।








