पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  शास्त्रों को मानिए, वही काम करें जो शास्त्रों में लिखा है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: शास्त्रों को मानिए, वही काम करें जो शास्त्रों में लिखा है

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

जिन्हें जीवन में आनंद प्राप्त करना हो, उन्हें जीवन यात्रा में एक चौराहे का ज्ञान होना चाहिए। इस चौराहे को समझने के लिए हिंदी वर्णमाला के पहले चार शब्द पकड़ लीजिए- अ, आ, इ, ई। अ का मतलब अन्न, आ यानी आवेश, इ से इंद्रियां और ई से ईश्वर।

आपको इतना करना है कि अन्न को संतुलन से जोड़िए। भोजन बहुत संतुलित करिए। आवेश का निपटारा सहनशीलता से किया जाए। हमारे शरीर में दस इंद्रियां हैं। सजगता से उनका उपयोग करें और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखें। जब भी आपको कंफ्यूजन हो, आजकल तो लोग तकनीकी साधनों से रास्ता ढूंढ लेते हैं।

लाइव लोकेशन से पहुंच जाते हैं। पर यदि इस यात्रा में आप कभी भटक जाएं तो कृष्ण जी की बात याद रखें कि प्रमाण शास्त्रों को मानना। उन्होंने गीता के 16वें अध्याय में अर्जुन से कहा- शास्त्रम् प्रमाणम् ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तम् ​कर्म कर्तुमिहार्हसि, यानी वही काम कर जो शास्त्रों में लिखा है। सीधी-सी बात पकड़ लें और चल पढ़ें हिंदी वर्णमाला के चार अक्षरों को समझकर।

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