पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  विवाह और दाम्पत्य में अंतर है विवाह देह है, दाम्पत्य आत्मा है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: विवाह और दाम्पत्य में अंतर है विवाह देह है, दाम्पत्य आत्मा है

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इस समय लगभग हर क्षेत्र युद्धग्रस्त है। ट्रेड वॉर, टेक वॉर, लैंड वॉर, थॉट वॉर, जेनरेशन वॉर और सबसे खतरनाक फैमिली वॉर। हमारा विषय परिवार है। परिवार में भी युद्ध की स्थितियां बनती जा रही हैं। लोगों ने रिश्तों को हथियार बना लिया है। डिजिटल मीडिया ने भी परिवार के प्रेम पर आक्रमण किया है। ये इन्फ्लुएंसर्स का जमाना है। उन्होंने सिखाया कि डिजिटल बाजार से पैसा कैसे कमाया जाता है। अब परिवार बचाने के लिए भी हमें इन्फ्लुएंसर्स की मदद लेनी चाहिए। देश में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग 2200 करोड़ रुपए के लगभग हो चुकी है। तो क्यों ना हम इन्फ्लुएंसर्स से मदद मांगें कि भारत के परिवार बचने चाहिए, इसकी प्रेरणा की भी वो मार्केटिंग करें। विवाह को तो प्रोडक्ट बना ही दिया है। दीवाने हो गए लोग शादियों के आयोजन में, लेकिन दाम्पत्य को लेकर गम्भीर नहीं हैं। विवाह और दाम्पत्य में अंतर है। विवाह देह है और दाम्पत्य आत्मा है। इन्फ्लुएंसर्स यदि दाम्पत्य की जबर्दस्त मार्केटिंग कर दें तो परिवारों के ऊपर बड़ा उपकार होगा।



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