बजट में मोदी सरकार ने कर दिया बड़ा ऐलान, इससे चीन को लगेगा तगड़ा झटका
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बजट में मोदी सरकार ने कर दिया बड़ा ऐलान, इससे चीन को लगेगा तगड़ा झटका

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Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने देश को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में ऐलान किया कि भारत में चार रेयर-अर्थ मिनरल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। ये कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बनाए जाएंगे। यह घोषणा उस ₹7,280 करोड़ के इंसेंटिव पैकेज के आगे की कड़ी है, जिसे हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने रेयर-अर्थ मैग्नेट के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मंजूरी दी थी।

पांच मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए जाएंगे

सरकार के इस फंड के तहत देश में पांच मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाए जाएंगे और रेयर-अर्थ मैग्नेट बेचने पर कंपनियों को सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव दिया जाएगा। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े रेयर-अर्थ भंडारों में से एक है, जिसकी अनुमानित मात्रा करीब 69 लाख टन बताई जाती है। इसके बावजूद अब तक भारत इस सेक्टर में आयात पर काफी हद तक निर्भर रहा है। रेयर-अर्थ मैग्नेट का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें खनन से लेकर प्रोसेसिंग और मैग्नेट बनाने तक ऊर्जा की खपत ज्यादा होती है और जहरीला कचरा भी निकलता है।

क्या है योजना

सरकार का यह आत्मनिर्भरता अभियान उस समय तेज हुआ जब 2025 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को रेयर-अर्थ मैग्नेट की भारी कमी का सामना करना पड़ा। अप्रैल 2025 से चीन, जो वैश्विक सप्लाई का 90% से ज्यादा कंट्रोल करता है, ने रेयर-अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर पाबंदियां लगा दी थीं। इसका सीधा असर भारत में इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों पर पड़ा। इसी निर्भरता को खत्म करने के लिए भारत अब मोनाजाइट जैसे खनिजों से पूरी सप्लाई चेन को देश में ही विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

इस योजना में सरकारी कंपनी इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) की अहम भूमिका होगी। फिलहाल IREL ही देश में रेयर-अर्थ ऑक्साइड्स और मैग्नेट का एकमात्र उत्पादक है और वह इस स्कीम के तहत 500 टन रेयर-अर्थ ऑक्साइड्स मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करेगी। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर साकेत मेहरा का कहना है कि यह कदम भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम के लिए बेहद अहम है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को ताकत मिलेगी और खनन से लेकर अंतिम उत्पाद तक एंड-टू-एंड वैल्यू क्रिएशन संभव हो पाएगा।



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