ब्राजील-जापान में विशेषज्ञों के निर्देश पर स्कूली भोजन:  स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की कोशिश, तले-मीठे के बजाय बैलेंस्ड फूड पर जोर
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ब्राजील-जापान में विशेषज्ञों के निर्देश पर स्कूली भोजन: स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की कोशिश, तले-मीठे के बजाय बैलेंस्ड फूड पर जोर

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दुनियाभर के स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। इंग्लैंड में स्कूली भोजन में सुधार करने की नई योजनाओं के तहत, तले हुए और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके स्थान पर बच्चों को फल दिए जाएंगे। भारत में भी दुनिया की सबसे बड़े स्कूल फीडिंग कार्यक्रमों में से एक मध्याह्न भोजन योजना चलाई जा रही है। इसके तहत स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को मुफ्त पौष्टिक भोजन दिया जाता है। आइए जानते हैं दुनिया के कुछ प्रमुख देशों में स्कूली बच्चों को कैसा भोजन दिया जाता है। फ्रांस – 90 मिनट का हो सकता है लंच सेशन फ्रांस के स्कूलों में बच्चों को चार कोर्स मील दिया जाता है। भोजन में स्टार्टर, मुख्य व्यंजन, सब्जी की साइड डिश, दूध से बना उत्पाद और मिठाई दी जाती है। स्कूल मील्स कोएलिशन के अनुसार, फ्रांस में स्कूली भोजन का उद्देश्य बच्चों को पाक कला संस्कृति से परिचित कराना भी है। इसलिए लंच सेशन 90 मिनट तक चल सकता है। अमेरिका – ज्यादातर प्रोसेस्ड फूड मिलता है अमेरिकी स्कूलों का भोजन गर्म और ठंडा दोनों तरह का होता है। नियम अनुसार इसमें दूध, फल, सब्जियां, अनाज और मांस होने चाहिए। लेकिन स्पष्ट नहीं है कि फल और सब्जियां ताजी होनी चाहिए। अधिकांश स्कूलों में भोजन पहले से बना या फ्रोजन होता है और फिर गर्म किया जाता है, इसलिए अत्यधिक प्रोसेस्ड हो सकता है। इटली – मौसम मुताबिक बदलता रहता है मेनू इटली में, स्कूल का भोजन केवल एक ही प्रकार का नहीं होता। पहला व्यंजन पास्ता या चावल का होता है, उसके बाद दूसरा व्यंजन मछली या मांस का होता है, और अंत में एक साइड डिश (आमतौर पर सब्जियां), रोटी और फल परोसे जाते हैं। स्कूल का मेनू आमतौर पर साल में दो या तीन बार मौसम के हिसाब से बदला जाता है। ब्राजील – ताजी सब्जियों का उपयोग जरूरी ब्राजील में रोजाना 5 करोड़ स्कूली भोजन परोसा जाता है। जापान की तरह हर स्कूल में पोषण विशेषज्ञ नहीं होता, लेकिन प्रत्येक नगर पालिका या क्षेत्र में कई विद्यालयों के बीच एक पोषण विशेषज्ञ होना जरूरी है। स्कूलों को प्रोसेस्ड फूड के बजाय ताजी, स्थानीय सामग्री का उपयोग जरूरी है। 30% भोजन स्थानीय खेतों से आता है। जापान – 99% बच्चे स्कूल का भोजन करते हैं जापान में 99 प्रतिशत बच्चे स्कूल का भोजन करते हैं। स्कूल का भोजन, जिसे क्यूशोकू भी कहा जाता है, लगभग पूरी तरह से ताजी सामग्री से बनाया जाता है। मिठाई केवल खास मौकों पर ही दी जाती है। लगभग हर स्कूल में अपना एक पोषण विशेषज्ञ होता है जो बच्चों के लिए दोपहर के भोजन का मेनू तैयार करता है। भारत – मिड-डे मील में कैलोरी, प्रोटीन का ध्यान भारत में, स्कूल का दोपहर का भोजन (मिड-डे मील) आमतौर पर शाकाहारी होता है। भोजन में अनाज, दालें, सब्जियां, और आवश्यक फैट का उपयोग अनिवार्य है। प्राथमिक स्तर पर 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर पर 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जाता है।



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