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ब्रिटिश लेखिका एनी रिडआउट का एक्सपीरियंस: 8 घंटे का स्क्रीन टाइम 2 घंटे किया; नींद बढ़ी-थकान दूर, रचनात्मकता लौटी, बच्चों ने फोन छोड़ कागज-पेन थामा

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स्क्रीन के सामने बिताया वक्त हमारी नींद, रचनात्मकता और रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है? इसका जवाब ढूंढ़ने के लिए ब्रिटेन की लेखिका एनी रिडआउट ने दो सप्ताह का प्रयोग किया। उन्होंने अपना मोबाइल खुद से दूर रखा और स्क्रीन टाइम आठ घंटे से घटाकर मात्र दो घंटे कर दिया। नतीजा यह​ रहा कि अलग-अलग विचार आने लगे, रचनात्मकता बढ़ी और मानसिक थकान भी दूर हुई। एनी के अनुसार, फोन छोड़कर किताबें थामीं, तो बच्चों का रुझान भी किताबों की ओर बढ़ा। 6 साल का बच्चा तो फोन छोड़कर कॉपी में चित्रकारी करने लगा। पढ़ते हैं लेखिका एनी का अनुभव… सोचने की जगह मिली सुबह फोन नहीं देखने और रात में स्क्रॉलिंग की जगह उपन्यास पढ़ने के बाद नए विचार आने लगे। टहलते समय भी हाथ से विचार और कविताएं लिखने लगी। 12, 9 और 6 साल के तीन बच्चे हैं। मेरा ​अधिकतर काम ऑनलाइन है। इससे चिंता हुई कि बच्चों को स्क्रीन टाइम का कौन सा मॉडल दे रही हूं। इसलिए स्क्रीन टाइम घटाने का संकल्प लिया। इंटरनेट पर सर्च की जगह प्रकृति में सैर, सुबह फोन चेक करने की जगह पांच मिनट बगीचे में आसमान देखना, पक्षियों की आवाज सुनना और नंगे पैर जमीन पर चलना। घर में उपन्यास पढ़ने लगी। इससे नींद का औसत समय भी बढ़ गया। बच्चे का रुझान भी बदला ​फोन छोड़कर किताबें पढ़ना और नोटबुक पर टिप्पणियां लिखना शुरू किया, तो एक सुबह देखा कि जब मैं नोटबुक पर एक चित्र बना रही थी, तभी बेटा आया और फोन मांगने की बजाय पास बैठकर कागज-पेन से चित्र बनाने लगा। रचनात्मकता बढ़ी लैपटॉप पर निबंध लिखते समय विचार नहीं आ रहे थे। डेस्क पर खाली पेज रचनात्मकता नहीं जगाता; उन्हें चलने की जरूरत होती है। हाथ से लिखने से दिमाग के नए हिस्से खुले और रचनात्मकता बढ़ी। नई कविताओं के लिए शब्द-विचार ज्यादा फूटने लगे। मेरे लिए यह बदलाव आश्चर्यजनक था। रिसर्च: बार-बार फोन देखने से टूटता है काम का प्रवाह एनी की एक बड़ी समस्या थी कि फोन पर विचार रिकॉर्ड करने के साथ ही मैसेज और सोशल मीडिया ध्यान भटका देते थे। वैज्ञानिक शोध भी बताता है कि बार-बार होने वाले व्यवधान काम की निरंतरता को प्रभावित कर सकते हैं। 33 प्रयोगों की समीक्षा में भी यह सामने आया कि अगर बाधा डालने वाले हालात को दूर कर दिया जाए तो मुख्य काम की सटीकता बढ़ जाती है और काम दोबारा शुरू करने में लगने वाला समय भी बचता है।



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