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त्वचा को धूप के असर से बचाने के लिए सनस्क्रीन लगाना आम बात है। लेकिन क्या आपका सनस्क्रीन वाकई सुरक्षित है? एनवायर्नमेंटल वर्किंग ग्रुप (ईडब्ल्यूजी) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 80% सनस्क्रीन सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं। रिपोर्ट में 2,784 प्रोडक्ट्स की जांच की गई, जिसमें से सिर्फ 500 यानी 20% ही सुरक्षित और असरदार पाए गए। यहां जानिए क्या सावधानियां बरतें? सनस्क्रीन किस स्तर तक सुरक्षा देते हैं? अमेरिकी संस्था ईडब्ल्यूजी के मुताबिक, कई कंपनियां सन प्रोटेक्शन फैक्टर (एसपीएफ) के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर लिखती हैं। जांच में सामने आया कि ये प्रोडक्ट लेबल पर किए गए दावे के मुकाबले केवल एक-चौथाई अल्ट्रावायलेट (यूवी) ए और 59% यूवी बी सुरक्षा ही दे पाते हैं। महंगे एसपीएफ 100+ (99% सुरक्षा) और सस्ते एसपीएफ 50+ (98% सुरक्षा) के असर में कोई खास फर्क नहीं पाया गया। केमिकल व मिनरल सनस्क्रीन में क्या अंतर है? मिनरल सनस्क्रीन – जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे खनिज होते हैं। ये त्वचा पर एक परत बनाकर धूप को रिफ्लेक्ट (परावर्तित) कर देते हैं। एक्सपर्ट्स इन्हें सुरक्षित मानते हैं। केमिकल सनस्क्रीन – ये त्वचा के भीतर सोख लिए जाते हैं। रिसर्च के मुताबिक, इनके केमिकल (जैसे ऑक्सीबेंजोन और होमोसैलेट) खून में मिलकर हार्मोनल गड़बड़ी और एलर्जी का कारण बन सकते हैं। त्वचा के लिए एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं? अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार, सिर्फ सनस्क्रीन पर निर्भर न रहें। धूप में निकलने से 15 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं और हर दो घंटे में इसे दोबारा लगाएं। इसके साथ ही, फुल स्लीव्स के कपड़े, धूप का चश्मा और चौड़ी पट्टी वाली टोपी पहनें। सुबह 10 से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप में जाने से बचें। भारत में सनस्क्रीन के सुरक्षा मानक क्या हैं? प्रोडक्ट पर आईएसओ 24444, आईएसओ 2442 का जिक्र होता है। इनका ही उपयोग करें।
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