मवेशी फार्म में अमेरिकी कॉलेज; गाय-खेत भी संभालते हैं छात्र:  1917 में स्थापित हुआ ‘डीप स्प्रिंग्स कॉलेज,’ हर साल 26 छात्र दाखिला लेते हैं
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मवेशी फार्म में अमेरिकी कॉलेज; गाय-खेत भी संभालते हैं छात्र: 1917 में स्थापित हुआ ‘डीप स्प्रिंग्स कॉलेज,’ हर साल 26 छात्र दाखिला लेते हैं

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अमेरिका में उच्च शिक्षा को लेकर बहस तेज है। एआई से नकल, घटता ध्यान और महंगी पढ़ाई के चलते कॉलेजों से भरोसा घट रहा है। इसी बीच, एक छोटा-सा ‘वर्क कॉलेज’ चर्चा में है। क्योंकि यहां छात्र सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाना सीखते हैं। कैलिफोर्निया में 1917 में स्थापित हुआ ‘डीप स्प्रिंग्स कॉलेज’ एक मवेशी फार्म में चलता है। यहां हर साल 26 छात्र आते हैं। इन्हें दो साल की लिबरल आर्ट्स की शिक्षा मुफ्त दी जाती है। लेकिन हर छात्र को कॉलेज संचालन में भाग लेना पड़ता है। कोई गायों की देखभाल करता है, कोई खेत संभालता है, कोई भोजन व्यवस्था देखता है, तो कोई ट्रस्टी बोर्ड और एडमिशन प्रक्रिया का हिस्सा बनता है। कुछ छात्र फायरफाइटर हैं, जो हादसों में मदद करते हैं। ‘डीप स्प्रिंग्स’ का विचार आधुनिक विश्वविद्यालयों के उस माहौल से बिल्कुल अलग है, जहां छात्र खुद को ‘कस्टमर’ और कॉलेज को ‘सर्विस प्रोवाइडर’ की तरह देखने लगे हैं। बड़े संस्थानों में शिक्षा का अर्थ रिज्यूमे मजबूत करना, ज्यादा अंक लाना और बेहतर नौकरी पाना रह गया है। अधिकतर छात्र अपने काम का असर समुदाय पर नहीं, सिर्फ खुद पर ही देखते हैं। यही सोच आगे चलकर सामाजिक दूरी, घटते भरोसे और संस्थानों से अलगाव की वजह बन रही है। येल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की समिति ने एक हालिया रिपोर्ट में माना कि उच्च शिक्षा संस्थानों पर भरोसा घटा है। इससे निपटने के लिए विश्वविद्यालयों को अपनी कार्यप्रणाली पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा। रिपोर्ट में पढ़ाई की बढ़ती लागत, जटिल प्रशासन और छात्रों से दूरी जैसे मुद्दे उठाए गए। ‘डीप स्प्रिंग्स’ मॉडल कहता है कि समस्या सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता की नहीं, बल्कि ‘समुदाय’ की भावना खत्म होने की भी है। कॉलेज की पूर्व छात्रा रेबेका मैकमिलिन-हैस्टिंग्स ने बताया कि एक बार उन्हें एक गाय के घाव की सफाई करनी पड़ी। वह जानती थीं कि इससे गाय को दर्द होगा, लेकिन इलाज जरूरी था। उनके मुताबिक, ऐसे अनुभव युवाओं को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का असली अर्थ सिखाते हैं- जो किताबों से नहीं सीख सकते। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी वजह से यहां एआई आधारित नकल जैसी समस्याएं नहीं दिखतीं। असली सीख वही, जो व्यक्ति को दूसरों के लिए भी जिम्मेदार बनाए विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे मॉडल आसान नहीं। एआई व अनिश्चित नौकरी बाजार के बीच छात्र-अभिभावक करियर को लेकर चिंतित हैं। सामुदायिक जिम्मेदारियां उन्हें बोझ लग सकती हैं। पर, एक मत ये भी है कि कॉलेज का उद्देश्य सिर्फ रोजगार नहीं। मशीनें-एआई भले कई काम संभाल लें, लेकिन रिश्ते और साझा जीवन इंसानों को ही सीखने होंगे। डीप स्प्रिंग्स जैसे संस्थान याद दिला रहे हैं कि असली सीख वो है, जो व्यक्ति को अपने अलावा दूसरों के लिए भी जिम्मेदार बनना ​सिखाए।



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