![]()
29 वर्षीय टिफनी टेट और तान्या दोनों ने अपने जीवन में आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की, लेकिन उनके अनुभवों ने दिखाया कि यह स्वतंत्रता अक्सर रिश्तों में चुनौती बन जाती है। टिफनी ने शार्लेट में पहला घर खरीदने की तैयारी की, तो उनके भावी साथी ने आक्रामक होकर पूछा कि अगर वह खुद घर खरीद लेंगी, तो उसके लिए क्या बचेगा। टिफनी को यह समझ नहीं आया कि उनका आत्मनिर्भर होना किसी पुरुष के लिए रुकावट क्यों बन गया।
इसी तरह तान्या ने सैन फ्रांसिस्को में फ्लैट खरीदा, पर जब साथी को पता चला कि यह घर उनका अपना है, तो उसका ‘अहंकार’ जाग गया। वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगा और तान्या से कहा कि क्या अब वह इस रिश्ते में ‘पति’ बनना चाहती हैं। दोनों ने महसूस किया कि पुरुष अक्सर महिलाओं की आर्थिक सफलता से असुरक्षित हो जाते हैं और इसे अपने लिए खतरा मानते हैं।
आज अमेरिका में एकल महिलाओं द्वारा घर खरीदने की दर (25%), पुरुषों की (10%) तुलना में दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। महिलाएं शादी किए बिना जिंदगी के महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर रही हैं। लेकिन वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने की इस सफलता के बाद, वे पुरुषों के विरोधाभासी और दोहरे मापदंडों का शिकार हो रही हैं। पुरुषों द्वारा महिलाओं पर दबाव बनाया जाता है कि वे आत्मनिर्भर रहें, लेकिन जैसे ही वे वित्तीय रूप से मजबूत होकर घर खरीदती हैं, पुरुषों का पारंपरिक ‘कमाने वाला’ होने का अहंकार आहत हो जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे वक्त तक महिलाओं को बैंक खाते खोलने या संपत्ति रखने का अधिकार नहीं था, जिससे वे पुरुषों पर निर्भर थीं। पर आज जब महिलाएं बिना किसी समझौते के अपने दम पर घर खरीद रही हैं, तो पुरुष यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे पैसे के अलावा रिश्ते में और क्या योगदान दे सकते हैं।’ इस कड़वे अनुभव के कारण टिफनी जैसी कई महिलाओं ने डेटिंग एप और मेट्रीमोनी साइट्स से दूरी बना ली है। वे पुरुषों की इस असुरक्षा का सामना करने के बजाय अपनी आजादी और सुकून को चुन रही हैं। संदेश साफ है… साथी ऐसा ही चुनेंगी जो उनकी सफलता को साथ सेलिब्रेट करें।
पत्नियां ज्यादा कमाने लगे तो पुरुष तनाव में आ जाते हैं – एक्सपर्ट
रेडफिन की मुख्य अर्थशास्त्री डेरिल फेदरवेदर कहती हैं,‘महिलाएं जीवन के लक्ष्य पूरे करने के लिए पति का इंतजार नहीं कर रही हैं। अर्थशास्त्री डॉ. जोआना सिर्डा कहती हैं,‘पुरुष तब ज्यादा तनाव महसूस करते हैं जब पत्नियां घर की आय का 40% से ज्यादा कमाने लगती हैं। मुद्दा घर का नहीं, बल्कि उसके प्रतीक का है। मनोवैज्ञानिक डॉ. वाई वोंग कहते हैं कि पुरुषों में ‘वर्चस्व खोने का डर’ होता है। महिलाएं आर्थिक रूप से सफल होती हैं, तो पुरुषों को लगता है कि उन्होंने ‘प्रभुत्व’ खो दिया है। शोध भी बताते हैं कि महिलाएं पैसे व प्रतिष्ठा में पुरुषों से आगे निकल जाती हैं, तो पुरुषों में बेवफाई व भावनात्मक या शारीरिक शोषण की दर बढ़ जाती है।’
Source link








