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मानसून में पेट की गड़बड़ी और सर्दी-खांसी के अलावा महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई के मामले बढ़ सकते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस, अमेरिका की रिसर्च के मुताबिक जून से सितंबर के बीच यूटीआई के मामले लगभग 10% तक ज्यादा देखे जाते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर इन दिनों यूटीआई का खतरा क्यों बढ़ता है और इससे कैसे सुरक्षित रहा जाए। यूटीआई से जुड़ी 5 सबसे जरूरी बातें लक्षण: पेट दर्द व बार-बार टॉयलेट जाना कम पानी पीना, खराब हाइजीन, प्रेग्नेंसी व डायबिटीज में इसका खतरा बढ़ सकता है। इसके लक्षणों में यूरीन पास करते हुए जलन, दर्द, बार-बार टॉयलेट जाना, पेट के निचले हिस्से में दर्द व कुछ मामलों में बुखार और ठंड लगना शामिल है। मौसम में नमी व गीले कपड़ों से बढ़ता है जोखिम न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के मुताबिक अधिकांश मामलों में यूटीआई एस्चेरिचिया कोलाई नामक बैक्टीरिया से होता है। बारिश के मौसम में ज्यादा नमी, पसीना, लंबे समय तक गीले अंडरगार्मेंट्स पहनने से बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। कम पानी पीने के कारण टॉयलेट भी कम जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया बाहर नहीं निकल पाते और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हाइजीन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कितना सही यूटीआई से बचाव के लिए इंटिमेट वॉश के फायदे साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इन उत्पादों की जगह सिर्फ पानी और हल्के साबुन के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। पब्लिक टॉयलेट और वेस्टर्न सीट का सच पब्लिक टॉयलेट सीट से यूटीआई का कोई खास संबंध नहीं है। असल में जोखिम टॉयलेट की गंदी सतहों को छूने और बिना हाथ धोए प्राइवेट पार्ट साफ करने से होता है। इन महिलाओं को रहता है सबसे ज्यादा खतरा अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑबस्टेट्रिक्स एंड गाइनोकोलॉजिस्ट के अनुसार प्रेग्नेंसी, डायबिटीज व मेनोपॉज की स्थिति में खतरा अधिक होता है डायबिटीज – इसमें शुगर यूरिन में भी आने लगती है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं। ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, जो यूटीआई का कारण बनता है। प्रेग्नेंसी – इस दौरान हार्मोनल बदलाव और गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। इससे बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिल जाता है।
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