9 घंटे पहले
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आज (6 नवंबर) से मार्गशीर्ष यानी अगहन मास शुरू हो गया है। ये महीना 4 दिसंबर तक रहेगा। इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के साथ ही इनसे जुड़े ग्रंथ जैसे महाभारत, श्रीमद् भागवत गीता पढ़ना-सुनना चाहिए। इन ग्रंथों की कहानियों के सूत्रों को जीवन में उतारेंगे तो कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। श्रीकृष्ण ने एक प्रसंग में बताया है कि कभी-कभी अपनी जगह बदलने से भी परेशानियां टल सकती हैं। जानिए ये प्रसंग…
द्वापर युग में श्रीकृष्ण द्वारिका में अपने यदुवंश के साथ रह रहे थे। एक दिन श्रीकृष्ण ने बुजुर्गों से कहा कि हमारी द्वारिका में हर जगह अपशकुन हो रहे हैं, उत्पात हो रहे हैं। इन सब का मुख्य कारण ये है कि ऋषियों ने हमारे कुल को शाप दिया है और इस शाप को टालना बहुत मुश्किल है। हमें इस शाप को भोगना ही होगा। अब इस शाप के निदान का अवसर चला गया है।
श्रीकृष्ण की बातें सुनकर सभी बुजुर्गों ने कहा कि कृष्ण, हम तो तुम्हारे भरोसे हैं। ये तो सही है कि द्वारिका में हालात पहले जैसे नहीं हैं। लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। हमारे बच्चे अधर्मी हो गए हैं। अब हमें क्या करना चाहिए? ये तो तुम ही बताओ।
श्रीकृष्ण बोले कि अगर हम अपने प्राणों की रक्षा करना चाहते हैं तो हमें ये जगह छोड़ देनी चाहिए। स्थान से मोह होता है, लेकिन अगर वह स्थान हमारे लिए विपरीत हो जाए, हमें वह दुख देने लगे, तो उस स्थान को छोड़ देने में ही भलाई है। यहीं द्वारिका के पास एक प्रभास क्षेत्र है। बहुत पवित्र जगह है, हमें वहां चलना चाहिए।
श्रीकृष्ण ने प्रभाष क्षेत्र से जुड़ी मान्यता भी बताई, उन्होंने कहा कि पुराने समय में जब दक्ष प्रजापति ने अपने दामाद चंद्र को शाप दिया तो उस शाप के रोग से मुक्त होने के लिए चंद्र ने इसी क्षेत्र में स्नान और शिव पूजन किया था। इसके बाद चंद्र रोग से मुक्त हो गए थे। हम भी वहां स्नान करेंगे, पितृों के लिए तर्पण करेंगे, सत्संग सुनेंगे और संकटों से मुक्त होने के लिए जो आत्मबल चाहिए, वह उस स्थान से मिलेगा। श्रीकृष्ण के समझाने के बाद द्वारिका के लोग प्रभाष क्षेत्र में चले गए थे।
श्रीकृष्ण की सीख
श्रीकृष्ण ने इस प्रसंग में संदेश दिया है कि जब हमें ऐसा लगे कि विपरीत समय हो गया है और बहुत प्रयास करने के बाद भी हालात नहीं बदल रहे हैं, तो हमें अपनी जगह भी बदलकर देखना चाहिए। कभी-कभी जगह बदलने से भी हमारी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं।
जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए ध्यान रखें ये बातें
- सही लोगों का चयन करें
आपकी संगति आपकी दिशा तय करती है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो हमें अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करते हैं, सकारात्मकता बढ़ाते हैं। नकारात्मक विचार वाले लोगों से दूर रहना चाहिए।
- परिवर्तन से मत डरें
यदि कोई जगह, नौकरी, रिश्ता या आदत आपको नुकसान पहुंचा रही है, उससे हटना कमजोरी नहीं, समझदारी है। कभी-कभी जगह बदलने से भी हालात में सकारात्मक बदलाव आ जाते हैं।
- शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें
श्रीकृष्ण ने प्रभास क्षेत्र में रोज स्नान और तर्पण करने की बात कही थी। हमें भी नियमित रूप से अच्छे काम करते रहना चाहिए। तन-मन की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए। रोज अपने मन से नकारात्मक विचारों का तर्पण करें, दूसरों की गलतियों को माफ करें, भूलें और आगे बढ़ें।
- सही समय पर निर्णय लें
देरी से लिया गया सही निर्णय भी नुकसान कर सकता है। जैसे श्रीकृष्ण ने समय रहते द्वारका छोड़ने का निर्णय लिया, वैसे ही जीवन में भी सही समय की परख करें और समय रहते सही निर्णय लेकर आगे बढ़ें, तभी हम समस्याओं से बच सकते हैं।








