मेंटल हेल्थ– शराबी भाई ने परिवार को बर्बाद कर दिया:  गहने बेचे, दो बार रीहैब से भाग आया, उसे बचाने में हम तबाह हो रहे हैं, क्या करें
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मेंटल हेल्थ– शराबी भाई ने परिवार को बर्बाद कर दिया: गहने बेचे, दो बार रीहैब से भाग आया, उसे बचाने में हम तबाह हो रहे हैं, क्या करें

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2 घंटे पहले

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सवाल– मैं इंदौर में रहता हूं। मेरे मेंटल हेल्थ इशु का कारण मैं नहीं, बल्कि मेरा छोटा भाई है। वो 28 साल का है और उसे शराब की लत है। हम उसे दो बार रीहैब में भेज चुके, लेकिन वो दोनों बार उन्हें चकमा देकर वापस लौट आया।

मेरे पिता भी बहुत शराब पीते थे। मैंने जब से होश संभाला है, अपनी मां को शराबी पति की मार खाते और उनकी उल्टियां साफ करते ही देखा। पिता की हालत देखकर ही मैंने ये फैसला लिया था कि जिंदगी में कभी इस गंदी चीज को हाथ नहीं लगाऊंगा। लेकिन पता नहीं कैसे मेरे भाई को ये लत लग गई। वो शराब के पैसों के लिए मां से झगड़ा करता है, घर में चोरी कर चुका है, कई बार घर का सामान बेच चुका है, दोस्तों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों से उधार मांग चुका है।

कोई ऐसा गलत काम नहीं है, जो उसने न किया हो। हम सबकुछ करके हार चुके हैं। उसकी इस आदत का असर पूरे परिवार की सुख-शांति और मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा है। मां उसके कारण हमेशा रोती-बीमार रहती हैं। मेरी पत्नी इस घर में रहना नहीं चाहती। मैं मां और भाई को छोड़कर कैसे जाऊं। हमारा पूरा परिवार तबाही की कगार पर है। प्लीज बताइए कि हम अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल कैसे रखें और भाई की मदद कैसे करें?

एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

सवाल के लिए आपका शुक्रिया। यह सच है कि परिवार में अगर कोई भी इस तरह के एडिक्शन से जूझ रहा हो तो उसके साथ-साथ पूरा परिवार भी स्ट्रगल करता है और सबकी मेंटल हेल्थ पर इस स्थिति का नकारात्मक असर पड़ता है।

यहां आपके भाई के साथ-साथ पूरी फैमिली को एक मॉरल सपोर्ट और हेल्प की जरूरत है। मैं आगे इस समस्या के सभी पहलुओं को परत-दर-परत खोलने की कोशिश करूंगा।

शराब की लत एक बीमारी है, कमजोरी नहीं

यहां सबसे पहले और जरूरी है ये समझना कि किसी व्यक्ति का शराबी हो जाना कोई व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है। यह एक तरह की बीमारी है, जिसमें प्रॉपर मेडिकल इंटरवेंशन की जरूरत है।

शराब की लत (एल्कोहल यूज डिसऑर्डर) एक लॉन्ग टर्म मानसिक और शारीरिक बीमारी है। इस बीमारी में व्यक्ति के मस्तिष्क के ‘रिवॉर्ड’ और ‘स्ट्रेस’ सिस्टम में परिवर्तन हो जाता है। उसे पता होता है कि इस आदत से उसे नुकसान पहुंच रहा है, वो मुक्त होना भी चाहता है, लेकिन फिर भी नहीं हो पाता। सब समझते हुए भी शराब पीने को मजबूर होता है।

NICE (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सेलेंस, यूके) और RCPsych (रॉयल कॉलेज ऑफ साइकेट्रिस्ट्स, यूके) और HSE (हेल्थ सर्विस एक्जीक्यूटिव) आयरलैंड सभी का ये मानना है कि एल्कोहलिज्म का इलाज केवल डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक और नशा-उपचार एक्सपर्ट ही कर सकते हैं।

इसका इलाज मुमकिन है, लेकिन इसे लगातार मॉनीटर और मैनेज करने की जरूरत है, जैसेकि डायबिटीज या हाई बीपी की स्थिति में होता है।

परिवार में एल्कोहलिज्म की हिस्ट्री

यदि परिवार में एल्कोहलिज्म का इतिहास है, इमीडिएट ब्लड रिलेशन में कोई शराब की लत का शिकार रहा है, जैसे पिता, चाचा, भाई तो इससे अगली जनरेशन के इस लत का शिकार होने की संभावना बढ़ जाती है। इसका जेनेटिक प्रभाव अगली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।

रॉयल कॉलेज ऑफ साइकेट्रिस्ट्स, यूके और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिसर्च कहती है कि :

● जिन परवारों में एक सदस्य को गंभीर शराब की लत होती है, उनके निकट संबंधियों में इसका जोखिम चार से

छह गुना तक बढ़ जाता है।

● यह सिर्फ जेनेटिक नहीं है बल्कि पारिवारिक व्यवहार और तनाव से निपटने के सीखे हुए पैटर्न से

भी जुड़ा होता है।

इसलिए यदि किसी व्यक्ति के पिता या भाई शराबी रहे हैं तो उसे यह स्वीकार करना चाहिए कि उसका अपना रिस्क फैक्टर भी ज्यादा है, भले ही अभी वह शराब न पीता हो।

शराब की लत का परिवार पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव

घर में अगर कोई एक व्यक्ति भी एल्कोहलिक हो तो उसका साइकोलॉजिकल असर पूरे परिवार पर पड़ता है। इसे नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए-

वृद्ध मां

सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया- डर, असहायता, पुराने आघात का दोबारा उभरना।

मनोवैज्ञानिक असर- चिंता, अवसाद, बेचैनी।

भाई-बहन

सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया- गुस्सा, अपराध बोध, थकान।

मनोवैज्ञानिक असर- ‘रेस्क्यूअर’ बनकर अपनी जिंदगी को भूल जाना।

पत्नी/बच्चे

सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया- शर्म, असुरक्षा, सामाजिक अलगाव।

मनोवैज्ञानिक असर- आत्म-सम्मान की कमी, अस्थिर रिश्ते।

इससे घर का वातावरण तनावपूर्ण और अस्थिर हो जाता है, जहां परिवार मदद भी करता है और झल्लाता भी है।

केयरगिवर्स का मेंटल हेल्थ टेस्ट

क्या उन्हें भी मदद की जरूरत है

केयरगिविंग बहुत स्ट्रेसफुल काम है। जो भी व्यक्ति देखभाल कर रहा होता है, उसका अपना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभावित होता है। इसलिए कई बार उन्हें भी थेरेपी, काउंसलिंग या मेंटल हेल्थ सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।

केयरगिवर्स की मेंटल हेल्थ एनालिसिस के लिए नीचे ग्राफिक में 7 सवाल दिए हैं। इन सवालों का आपको हां या ना में जवाब देना है। स्कोर इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक के साथ दिया है।

अगर आपके सिर्फ दो सवाल का जवाब हां में है तो आपको मामूली तनाव है और खुद को एल्कोहलिज्म के सवाल पर एजूकेट करने की जरूरत है। लेकिन अगर सातों सवाल का जवाब हां में है तो आपको प्रोफेशनल काउंसलिंग की जरूरत है। सवाल नीचे ग्राफिक में देखें।

सीमाएं तय करना: परिवार क्या कर सकता है और क्या नहीं

शराब की लत के शिकार परिवार के व्यक्ति की मदद करने के लिए भी यह जरूरी है कि परिवार अपनी मदद की इच्छा के साथ–साथ अपनी सीमाएं भी समझे और अपनी मेंटल हेल्थ को भी प्रोटेक्ट करे। इन सीमाओं को नीचे ग्राफिक के माध्यम से समझ सकते हैं।

वृद्ध मां के प्रति जिम्मेदारी

अगर मां पहले से शराबी पति के कारण पीड़ित रही हैं, तो बेटे की शराबखोरी उनके पुराने घाव ट्रिगर कर सकती है। इसलिए जरूरी है:

● मां की शारीरिक सुरक्षा और मानसिक शांति सुनिश्चित करना।

● उन्हें थेरेपी या काउंसलिंग उपलब्ध कराना।

● उन्हें बेटे की जिम्मेदारी में दोबारा न झोंकना।

● मां की फिजिकल-मेंटल वेलबीइंग को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।

एल्कोहलिज्म के ट्रीटमेंट के विकल्प

अगर आप एल्कोहलिज्म के इलाज के लिए भाई को अस्पताल में भर्ती कराते हैं तो वहां उसका इलाज कई चरणों में होगा। यह फैसला लेने से पहले इस प्रोसेस को समझ लेना बेहतर है।

1. डिटॉक्स (1–2 हफ्ते)

लक्ष्य- शरीर से शराब निकालना

उपचार- दवा के जरिए सुरक्षित निकासी, विटामिन्स देना।

2. रीहैबिलिटेशन यानी पुनर्वास (4–8 हफ्ते)

लक्ष्य- कारण व ट्रिगर पहचानना

उपचार- CBT, मोटिवेशन थेरेपी, ग्रुप थेरेपी

3. रिलैप्स प्रिवेंशन (8–12 हफ्ते)

लक्ष्य- लंबे समय तक शराब से दूरी

उपचार- AA मीटिंग, फैमिली काउंसलिंग और थेरेपी

4. आफ्टरकेयर

लक्ष्य- शराब से दूरी बनाए रखना

उपचार- बाहरी उपचार, सपोर्ट ग्रुप

एल्कोहलिक भाई को छोड़ने का गिल्ट

आप अपने भाई को इलाज के लिए बाहर भेजने, अस्पताल में छोड़ने को लेकर किसी तरह का अपराध बोध महसूस न करें।

परिवार अक्सर ऐसा सोचता है कि “हमने उसे छोड़ दया।” लेकन यह उसे त्याग देना नहीं है, बल्कि सीमाओं के साथ प्यार करना है।

आप अपनी सोच को बदलें और खुद से कहें:

● “मैं उसे छोड़ नहीं रहा, मैं उसे उसकी जिम्मेदारी सौंप रहा हूं।”

● “मां और अपने मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा स्वार्थ नहीं, जरूरत है।”

● “यह सीमा उसे खुद की जिम्मेदारी लेने में मदद करेगी।”

● सीमाएं तय करना भी प्रेम का एक दृढ़ रूप है।

नशामुक्त अवस्था में भाई से बात कैसे करें

1. शुरुआत :

“हम तुम्हारी चिंता करते हैं और हमें तुम्हारी सेहत की फिक्र है।”

2. फैक्ट बताना :

“हाल में तुम्हारी शराबखोरी से तुम्हारा काम और घर दोनों प्रभावित हुए हैं।”

3. पहले की कोशिशें बताना :

“हमने कई बार मदद की, बिल चुकाए, डॉक्टर को दिखाया पर इससे स्थिति सुधरी नहीं।”

4. सीमाएं स्पष्ट करना :

“अब से हम सिर्फ इलाज में मदद करेंगे। शराब या पैसों की मदद नहीं करेंगे।”

5. ऑप्शन देना :

“अगर तुम इलाज के लिए तैयार हो तो हम तुम्हारे साथ हैं। वरना अब हम साथ नहीं रह पाएंगे।”

6. सहानुभूति के साथ अंत :

“हम तुम्हें प्यार करते हैं, लेकिन हमें भी मां और खुद का ध्यान रखना है।”

7. यदि वह आक्रामक हो जाए:

“हम यह बातचीत बाद में करेंगे, जब तुम तैयार हो।”

चार सप्ताह का CBT आधारित सेल्फ-हेल्प प्रोग्राम

यहां मैं आपको चार हफ्तों का CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित एक प्रोग्राम दे रहा हूं। इसे फॉलो करें। अपनी फीलिंग्स को ऑब्जर्व करते रहें और उसके बारे में तार्किक ढंग से सोचने और अपनी प्रतिक्रियाओं को बदलने की कोशिश करें।

पहला सप्ताह

फोकस- बीमारी को समझना।

कार्य- विश्वसनीय लेख पढ़ें, Al-Anon से जुड़ें।

लक्ष्य- नॉलेज बढ़ाना, इससे गिल्ट कम होगा।

दूसरा सप्ताह

फोकस- सीमाएं तय करना।

कार्य- तीन व्यवहार लिखें, जिन्हें आप स्वीकार नहीं करेंगे।

लक्ष्य- नियंत्रण और स्पष्टता।

तीसरा सप्ताह

फोकस- भावनाओं को नियंत्रित करना।

कार्य- अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का एक चार्ट बनाएं।

लक्ष्य- मेंटल बैलेंस हासिल करना।

चौथा सप्ताह

फोकस- खुद को फिर से गढ़ना।

कार्य- अपनी पसंदीदा एक्टिविटी करें, एक्सरसाइज करें।

लक्ष्य- सेल्फ केयर यानी खुद की देखभाल।

निष्कर्ष

शराब की लत एक बीमारी है। इसका इलाज डॉक्टर और थेरेपिस्ट कर सकते हैं, परिवार नहीं। परिवार को एल्कोहलिक व्यक्ति के लिए प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए और अपनी मेंटल हेल्थ को भी प्रोटेक्ट करना चाहिए। याद रखिए, “आपने यह बीमारी पैदा नहीं की है, आप इसे अकेले ठीक नहीं कर सकते। लेकिन आप खुद को और अपने परिवार को प्रोटेक्ट जरूर कर सकते हैं।

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