रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जब शाहरुख को संयोग से मिली थी पहली फिल्म ‘दीवाना’
अअनुबंधित

रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब शाहरुख को संयोग से मिली थी पहली फिल्म ‘दीवाना’

Spread the love


रूमी जाफरी3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
शाहरुख खान की पहली फिल्म ‘दीवाना’ का एक पोस्टर। - Dainik Bhaskar

शाहरुख खान की पहली फिल्म ‘दीवाना’ का एक पोस्टर।

आज इस वक्त के सबसे बड़े स्टार, दुनिया में हिंदुस्तानी फिल्म इंडस्ट्री का परचम लहराने वाले, सबके दिलों को अपनी मुस्कराहट से जीतने वाले सुपरस्टार शाहरुख खान की सालगिरह है। तो मेरे हिस्से के किस्से में आज बात शाहरुख की, बल्कि उनकी उस पहली फिल्म की, जिससे वे सुपरहिट होकर दर्शकों के दिलों पर छा गए यानी ‘दीवाना’ की।

दीवाना के प्रोड्यूसर थे गुड्डू धनोवा जी, ललित कपूर जी और राजू कोठारी जी। ये मेरे अच्छे दोस्त रहे हैं। शुरुआत में इस फिल्म को डायरेक्ट कर रहे थे एस. ए. चंद्रशेखर, जो साउथ के जाने-माने डायरेक्टर हैं। कहानी का आइडिया भी उन्हीं का था। दिव्या भारती, ऋषि कपूर और अरमान कोहली सब साइन हो गए थे, डेट्स तय हो गई थीं। लेकिन एक दिन चंद्रशेखर जी अचानक ललित कपूर जी के घर आए और बोले, “माफ कीजिए, साउथ में मेरे कुछ कमिटमेंट्स हैं, मैं यह फिल्म नहीं कर पाऊंगा। आप मेरी स्टोरी का आइडिया रख लीजिए और मुझे फ्री कर दीजिए।”

अब मसला ये आया कि डायरेक्टर कौन होगा। गुड्डू भाई ने मुझे बताया कि वे जुहू जा रहे थे, यही सोचते हुए कि डायरेक्टर किसे लें, तभी उन्हें अचानक राज कंवर मिल गए। राज कंवर ‘घायल’ फिल्म में राजकुमार संतोषी जी के चीफ असिस्टेंट थे। गुड्डू भाई ने पूछा, “राज, तुम मेरी फिल्म डायरेक्ट करोगे?” और राज ने खुशी- खुशी फौरन हां कर दी। बस फिर हम लोग लग गए शूटिंग की प्लानिंग में। तभी एक

और मुश्किल आई। एक दिन अरमान कोहली ने फिल्म छोड़ दी। अरमान के फिल्म छोड़ने पर सब टेंशन में आ गए कि अब क्या करें। ऋषि कपूर, दिव्या भारती, सबकी डेट्स फिक्स थीं, लेकिन हीरो नहीं था।

उसी वक्त धर्मेंद्र जी, शेखर कपूर को लेकर एक फिल्म बना रहे थे ‘चैम्पियन’, जिसमें वे बॉबी देओल को लॉन्च करना चाह रहे थे। चूंकि गुड्डू भाई धरम जी के रिश्तेदार हैं तो उन्होंने कहा कि तुम ये फिल्म अपने सुपरविजन में बनवाओ। चैम्पियन की कहानी जावेद अख्तर लिख रहे थे, जिसमें बहुत स्पेशल इफेक्ट्स थे। उस जमाने में नई टेक्नोलॉजी आई नहीं थी। मणिरत्नम जी ने ‘अंजलि’ बनाई थी, जिसमें स्पेशल इफेक्ट्स बहुत अच्छे थे। गुड्डू धनोवा जी ने बताया, “मैं शेखर कपूर जी के साथ फ्लाइट से मद्रास जा रहा था अंजलि के स्पेशल इफेक्ट्स देखने। रास्ते में मैं बहुत टेंशन में था और शेखर कपूर जी से बात कर रहा था। मैंने बताया कि अरमान कोहली ने फिल्म छोड़ दी है और मैं उनकी जगह कोई नया लड़का ढूंढ रहा हूं। तब शेखर कपूर जी ने कहा कि एक लड़का है शाहरुख खान, बस उसे ले लो, वो फ्यूचर का स्टार है। मैंने पूछा, कौन है ये? तो बोले कि तुमने फौजी सीरियल देखा है? मैंने कहा, नहीं। तो शेखर जी बोले कि मेरा कहना मानो, उसको ले लो।” फिर मैंने उसका नंबर ढूंढकर कॉन्टैक्ट किया, बात की और मीटिंग तय हुई। गुड्डू भाई ने बताया, “मैं राज कंवर को लेकर दिल्ली पहुंच गया। होस्ट रेस्टोरेंट में मीटिंग रखी गई। हम दोनों बैठे ही थे कि अचानक दरवाजा खुला और शाहरुख अंदर आए। उन्होंने इधर-उधर देखा। मैंने राज कंवर से पूछा, ‘यही है?’ राज ने कहा, ‘हां।’ मैंने कहा, ‘डन!’ बिना बात किए, सिर्फ उसकी एंट्री और बॉडी लैंग्वेज देखकर मैंने कह दिया कि यही मेरा हीरो है।”

फिर शाहरुख हमारे पास बैठे, बातचीत हुई। मैंने बताया कि हम फिल्म बना रहे हैं। शाहरुख बोले, “मैं तो पहले से चार फिल्में कर रहा हूं, मेरे पास डेट नहीं हैं।” हम

सब हैरान रह गए। फिर मैंने कहा, “फिर भी हम तुम्हें लेने आए हैं और तुम्हें लेकर ही जाएंगे।” हमने कहानी सुनाई। उनकी एंट्री इंटरवल के बाद थी। हमने उनको कहानी बहुत ईमानदारी से सुना दी। शाहरुख ने कहानी बहुत ध्यान से सुनी और बोले, “अगर आप वैसी ही फिल्म बनाएंगे जैसी सुनाई है, तो मैं कर रहा हूं। लेकिन डेट्स उन्हीं चार फिल्मों के बाद दूंगा।” देखिए, दीवाना से पहले जिन चार फिल्मों को शाहरुख ने साइन किया था, वे बाद में पूरी हुईं और बाद में रिलीज हुईं, जबकि दीवाना पहले पूरी हुई और पहले रिलीज भी हो गई। वो शाहरुख का ही डायलॉग है ना, “किसी चीज को अगर शिद्दत से चाहो, तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में लग जाती है।” ऐसा ही दीवाना के साथ हुआ। डायरेक्टर ने छोड़ी, अरमान ने छोड़ी, कितनी रुकावटें आईं, लेकिन वो फिल्म शाहरुख की किस्मत में थी, इसलिए उन्हें वही मिली। कहते हैं ना इंसान कितनी भी प्लानिंग कर ले, होता वही है जो तकदीर में लिखा होता है। इसी बात पर मुझे हैरत इलाहाबादी का शेर याद आता है:

न तो कुछ फिक्र में हासिल है न तदबीर में है वही होता है जो इंसान की तकदीर में है।

गुड्डू भाई ने बताया कि शाहरुख ने इतनी मेहनत की कि ‘दीवाना’ का सेट बॉम्बे में लगा था और गोवा में ‘कभी हां कभी ना’ की शूटिंग चल रही थी। वो दिन में गोवा में शूटिंग करते थे, फिर फ्लाइट पकड़कर बॉम्बे आते, रातभर दीवाना की शूटिंग करते और फिर सुबह फ्लाइट पकड़कर वापस गोवा चले जाते। सिर्फ फ्लाइट में जो आधा-पौना घंटा मिलता था, उसी में सोते थे।

यही शाहरुख की मेहनत का नतीजा है कि आज 33 साल बाद भी वे लगातार सुपरस्टार बने हुए हैं। आज शाहरुख खान साठ साल के हो गए, लेकिन जैसा कहा जाता है, सोने से कुंदन हो गए।

मेरी तरफ से शाहरुख खान को सालगिरह की बहुत-बहुत मुबारकबाद, ढेर सारी दुआएं। ऊपरवाला उन्हें हमेशा खुश रखें। वे ऐसी ही अपनी अच्छी-अच्छी फिल्मों से हम सबको मनोरंजन करते रहें। शाहरुख खान के इतने सुपरहिट गाने हैं कि आज उनकी सालगिरह पर जो भी आपका पसंदीदा गाना हो, उसे सुनिए, अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *