रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  अमरीश पुरी की वह कॉमेडी, जिसने बदल दी थी ‘विलेन’ की छवि
अअनुबंधित

रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: अमरीश पुरी की वह कॉमेडी, जिसने बदल दी थी ‘विलेन’ की छवि

Spread the love


रूमी जाफरी3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
‘मुझसे शादी करोगी’ के एक कॉमेडी सीन में अमरीश पुरी। - Dainik Bhaskar

‘मुझसे शादी करोगी’ के एक कॉमेडी सीन में अमरीश पुरी।

पिछले हफ्ते मैंने अपना कॉलम अमरीश पुरी जी पर लिखा था। मेरी कलम रुक नहीं रही थी, क्योंकि उनका काम और उनकी शख्सियत एक कॉलम में समा ही नहीं सकती। इसलिए मैंने एक और कॉलम अमरीश जी पर लिखने का तय किया।

पिछले हफ्ते मैंने कॉलम की शुरुआत फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ से की थी। उस फिल्म का कर्नल साहब का किरदार आज भी यादगार है। कई बार किसी एक्टर की इमेज फिल्म और किरदार को कितना फायदा पहुंचाती है, इसकी बड़ी मिसालों में से एक है यह किरदार, जिसे अमरीश पुरी जी ने निभाया था।

दरअसल, जब फिल्म की कास्टिंग हो रही थी, तो हमने कर्नल साहब के रोल के लिए किसी और एक्टर के बारे में सोच लिया था। लेकिन एक रात मैं टीवी पर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ देख रहा था। उसे देखते-देखते मेरे मन में ख्याल आया कि इस रोल के लिए तो अमरीश जी ही सही रहेंगे। अगली सुबह मैं ऑफिस गया और साजिद व डेविड साहब से कहा कि कर्नल साहब के रोल के लिए हमें अमरीश पुरी जी को ही लेना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘तू पागल हो गया है? अमरीश पुरी इतने सीरियस एक्टर हैं, उनकी पर्सनैलिटी अलग है, वो विलेन या गंभीर रोल के लिए ही सही हैं।’ मैंने उनसे कहा कि मैंने रात को ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ देखी। उसमें फिल्म का एक बड़ा हाइलाइट अमरीश जी ही हैं। उनकी आवाज, उनका चेहरा, उनका व्यक्तित्व, सब इतना प्रभावशाली है कि जब शाहरुख खान का किरदार बीयर चुराता है, तो दर्शक सोचते हैं, ‘ओह गॉड, इसने अमरीश पुरी की बीयर चुरा ली।’ जब काजोल के लिए बात आती है, तो लगता है कि अमरीश पुरी कभी इजाजत नहीं देंगे। इसी इमेज की वजह से जब वे आखिर में काजोल का हाथ छोड़ते हैं, तो थिएटर में तालियां बजती हैं, क्योंकि दर्शकों के मन में अमरीश जी कि इमेज है कि यह आदमी तो अपनी बेटी नहीं देगा।

मैंने कहा कि यही बात ‘मुझसे शादी करोगी’ में भी होगी। अगर कोई और एक्टर होता तो कुत्ते के काटने या फुटबॉल लगने वाला सीन सिर्फ कॉमेडी रहता। लेकिन जब वही सब अमरीश जी के साथ होगा, तो दर्शक सोचेंगे, ‘ओह गॉड, अमरीश जी को लग गई! अब तो सलमान की खैर नहीं!’ मेरी बात साजिद और डेविड साहब, दोनों को समझ में आ गई। अमरीश जी अपने रोल के मामले में बहुत सिलेक्टिव थे और इससे पहले वे हमें एक फिल्म में मना कर चुके थे। मैंने कहा, आप चिंता मत कीजिए, मैं उनसे बात करता हूं। मैं उनके पास गया, उन्हें रोल सुनाया और उन्होंने खुशी-खुशी फिल्म साइन कर ली। मुझे आज भी याद है, ‘मुझसे शादी करोगी’ 30 जुलाई 2004 को रिलीज हुई थी और सिर्फ छह महीने बाद यानी 12 जनवरी 2005 को अमरीश जी हमें छोड़कर चले गए। इसी बात पर जिगर मुरादाबादी का एक शेर याद आता है :

‘जिंदगी इक हादसा है और कैसा हादसा, मौत से भी खत्म जिसका सिलसिला होता नहीं।’

अमरीश जी का जाना पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा नुकसान था। जाना तो सबको है, लेकिन जिस तरह से वे गए, उसे याद कर आज भी मन दुखी हो जाता है। वे मनाली में गुड्डू धनोआ जी की फिल्म ‘जाल’ की शूटिंग कर रहे थे, जिसमें सनी देओल भी थे। एक बाइक सीन था। बाइक को मशीन पर फिक्स कर दिया गया था, जिसमें एक्टर को बैठकर बस एक्टिंग ही करनी थी कि वो बाइक चला रहा है। सामने एक टेम्पो में यूनिट मौजूद थी और एक्शन मास्टर टीनू वर्मा ने पूरी सुरक्षा का इंतजाम किया था। लेकिन रास्ते में एक ढलान पर बाइक को टर्न लेना था। मशीन भारी और फिक्स्ड थी, इसलिए वह संतुलन खो बैठी और पलट गई। सनी देओल और अमरीश जी दोनों गिरे। सनी जी को भी चोट लगी, लेकिन अमरीश जी को ज्यादा गंभीर चोट आई। उनका सिर जमीन से टकरा गया था और एक पत्थर उनकी आंख में जा लगा था। गुड्डू भाई ने तुरंत हेलीकॉप्टर मंगवाया और उन्हें शिमला के अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज किया। गुड्डू भाई बताते हैं कि जब वे अंदर गए, तो अमरीश जी ने उनका हाथ पकड़कर कहा, ‘तू फिक्र मत कर, मुझे कुछ नहीं होगा, तू देख मैं फर्स्ट क्लास हो जाऊंगा।’ यह सुनकर गुड्डू भाई खुद रो पड़े।

तीन दिन बाद उन्हें दिल्ली लाया गया, फिर इलाज के लिए मुंबई। उनके पोते वर्धन पुरी ने बताया कि शिमला में खून की बहुत कमी थी, बड़ी मुश्किल से एक बोतल ब्लड मिला। बाद में जांच में कहा गया कि उसी ब्लड में कैंसर के सेल थे। हालांकि गुड्डू भाई को ऐसा कुछ याद नहीं। लेकिन इतना जरूर है कि उसके बाद सब कुछ बहुत तेजी से हुआ और अमरीश जी हमें छोड़कर चले गए। उनका जाना आज भी खलता है। हम अक्सर सोचते हैं, काश ऐसा होता, काश वैसा होता। लेकिन उनकी यादगार परफॉर्मेंस उन्हें हमेशा हमारे बीच जिंदा रखेगी। आज उन्हें याद करते हुए उनकी फिल्म चाइना गेट का यह गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए : ‘छम्मा छम्मा बाजे रे तेरी पैजनिया…’



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *