4 घंटे पहले
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- आदि शंकराचार्य ने भारत में चार कोनों में चार मठों की स्थापना की, जो अभी तक पवित्र माने जाते हैं। इन पर आसीन संन्यासी ‘शंकराचार्य’ कहलाते हैं।
1. ब्रह्म ही सत्य है, बाकी दुनिया बदलती रहती है। 2. हम सबके भीतर एक ही ब्रह्म बसता है। 3. सच्ची विद्या ही मुक्ति दे सकती है। 4. अविद्या के कारण ही इंसान दु:खी रहता है। 5. आत्मा को जानने से शांति मिलती है। 6. जो अपने असली स्वरूप को पहचान लेता है, वही असली आनंद पाता है। 7. धर्म का असली मतलब मन की शुद्धि है, कोई दिखावा नहीं। 8. शांति बाहर से नहीं, भीतर से आती है। 9. भक्ति और ज्ञान से ही जीवन सफल होता है। 10. नाशवान चीजों से मोह ही हमारे दु:ख का सबसे बड़ा कारण बनता है। 11. जो खुद को जान लेता है, वह मुक्त हो जाता है। 12. लोभ और क्रोध से मन अशांत होता है। 13. सादगी में ही खूबसूरती है। 14. भक्ति बिना जीवन अधूरा है। 15. सत्य बोलना सबसे बड़ा धर्म है। 16. मन को जीतने वाला ही सच्चा विजेता है। 17. शांति आत्मज्ञान से आती है, दौलत से नहीं।








