वर्चुअल बुफे-खाने की बर्बादी रोकने प्लेट छोटी कर विकल्प घटाए:  शोधकर्ताओं ने टेक्नोलॉजी की मदद से रोका फूड वेस्टेज, होटल-कैटरर्स भी अनूठे उपाय ला रहे
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वर्चुअल बुफे-खाने की बर्बादी रोकने प्लेट छोटी कर विकल्प घटाए: शोधकर्ताओं ने टेक्नोलॉजी की मदद से रोका फूड वेस्टेज, होटल-कैटरर्स भी अनूठे उपाय ला रहे

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होटल में ‘ऑल-यू-कैन-ईट’ बुफे हो या कोई सामाजिक आयोजन,अक्सर कई लोग जरूरत से ज्यादा खाना प्लेट में भर लेते हैं, जिससे दोगुना खाना बर्बाद होता है। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए गंभीर संकट है, होटल और कैटरर्स के लिए भी नुकसानदेह है। इस समस्या के समाधान के लिए नॉर्वे और इटली के शोधकर्ताओं ने ‘वर्चुअल बुफे मॉडल’ तैयार किया है। इस कंप्यूटर मॉडल के जरिए वैज्ञानिकों ने उन मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक बदलावों की पहचान की है, जिन्हें अपनाकर बिना मेहमानों को नाराज किए भोजन की बर्बादी को भारी मात्रा में घटाया जा सकता है। जानिए इस मॉडल के बारे में… आदर्श स्थिति यह मॉडल इटली व नॉर्वे के शोधकर्ताओं के प्रोजेक्ट ‘कोरिजो’ का हिस्सा है। इसमें ‘डिजिटल मेहमानों’ को जोड़ा गया, जो इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं। इनके व्यवहार को जागरूकता, सामाजिक दबाव, खुद पर नियंत्रण और वास्तविक भूख के आधार पर प्रोग्राम किया गया। वैज्ञानिकों ने प्लेटों के आकार, नाश्ते के समय व मेनू की विविधता बदलकर देखा कि किस स्थिति में खाना सबसे कम बचता है। प्लेट का आकार 20% घटाना इस मॉडल में पाया गया कि ज्यादा बर्बादी बड़ी प्लेटों के कारण होती है। प्लेट का साइज घटाया गया तो मेहमानों ने कम खाना लिया। भूख लगने पर वे दोबारा खाना लेने गए। अंत में उनकी प्लेट में कुछ भी जूठा नहीं बचा। जागरूकता वाले संदेश अगर बुफे में लोग बड़ी-बड़ी प्लेटें भरकर ले जा रहे हैं, तो बाकी लोग भी वैसा ही करते हैं। ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां ‘सिर्फ उतना ही लें जितना खा सकें’… गर्व की बात लगे। दबाव वाले साइन बोर्ड के बजाय जागरूकता वाले संदेश ज्यादा प्रभावी होते हैं। विकल्प सीमित रखें काउंटर पर ज्यादा विकल्प होने से व्यक्ति सबकुछ चखने के फेर में प्लेट भर लेता है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि मेजों की संख्या व उनकी दूरी को ऐसे व्यवस्थित किया जाए कि लोग सिर्फ पसंद की चीजों तक ही पहुंचें, जिससे गैर जरूरी ‘ट्रायल’ व बर्बादी कम हो। समयसीमा तय करना समय लंबा (जैसे 3 घंटे) होने पर मेहमानों में ‘आराम से खाने’ की प्रवृत्ति बढ़ती है। समय को रणनीतिक रूप से सीमित करने या ‘स्लॉट्स’ (जैसे-45 मिनट) तय करने से मेहमान जरूरत के अनुसार ही प्लेट भरते हैं। ये विचार भी इनोवेटिव एआई विजन- डस्टबिन पर स्मार्ट कैमरा और वजन मशीन लगी होती है। जैसे ही शेफ या वेटर कुछ फेंकता है, एआई उसे पहचान लेता है। यह डेटा शेफ को मिलता है, जिससे होटलों ने खरीद 8% तक घटाई है। स्लीक बुफे- नॉर्डिक देशों के होटलों ने बुफे से ‘सर्विंग ट्रे’ हटाकर सिर्फ प्लेट का विकल्प दिया है। बड़ी डिशेज के बजाय ‘सिंगल-पोर्शन’ कटोरियां पेश की जा रही हैं। इन बदलावों से भोजन की बर्बादी में 20% तक की कमी आई है। डायनामिक मेनू- सामाजिक आयोजनों में मेहमानों को इवेंट से पहले लिंक भेजी जाती है, जहां वे पसंद मार्क करते हैं। कैटरर्स ‘बफर स्टॉक’ तैयार करने के बजाय कन्फर्म डेटा के आधार पर खाना बनाते हैं। वहीं,‘फ्लेक्सिबल प्लेट’ विकल्प, मेनू में ही ‘स्मॉल’ या ‘रेगुलर’ पोर्शन चुनने की सुविधा देता है। छोटे पोर्शन पर छूट दी जाती है।



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