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अक्सर लोग रेस्तरां में पुराना पसंदीदा खाना मंगाने या नया ट्राई करने की उलझन में रहते हैं। वैज्ञानिकों ने ‘एक्सप्लोर बनाम एक्सप्लॉइट’ (नया खोजना बनाम पुराने का फायदा उठाना) की इस दुविधा पर रिसर्च करके एक साफ रणनीति बताई है। इसके अनुसार, आपका फैसला इस बात पर टिका होना चाहिए कि आप आगे उस रेस्टोरेंट में कितनी बार और खाने वाले हैं। अगर आगे वहां जाने के कई मौके हैं, तो शुरुआती दौर में नया खाना आजमाना बेहतर है, क्योंकि इससे पसंदीदा से भी ज्यादा अच्छा खाना मिलने की संभावना बढ़ती है। लेकिन जैसे-जैसे वहां जाने के मौके कम होते जाएं, खोज बंद करके अब तक मिले सबसे अच्छे खाने पर टिक जाना चाहिए। थ्रेसहोल्ड रूल से सुलझी खाने की पहेली वैज्ञानिकों ने ‘थ्रेसहोल्ड रूल’ की पुष्टि के लिए 2,520 लोगों पर प्रयोग किया। इसमें प्रतिभागियों को रेस्तरां जैसी दुविधाओं वाले टास्क देकर बचे विकल्प, बेस्ट ऑप्शन और अनिश्चितता को परखा गया। नतीजा निकला कि लोग शुरुआत में ज्यादा नए विकल्प आजमाते हैं और धीरे-धीरे अपने सबसे पसंदीदा खाने की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं। वैज्ञानिक फेनमैन के नोट्स से सुलझी खाने की उलझन 1970 के दशक में वैज्ञानिक रिचर्ड फेनमैन ने थाई रेस्टोरेंट में दोस्त की खाने की कशमकश देखकर इसे गणितीय समस्या की तरह सुलझाया था। उन्होंने समाधान प्रकाशित नहीं किया, सिर्फ उनके हाथ के लिखे नोट्स बचे थे। प्रिन्स्टन यूनिवर्सिटी ने डिकोड किया फॉर्मूला प्रिन्स्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ‘पीएनएएस’ जर्नल में छपी स्टडी में दावा किया है कि उन्होंने फेनमैन के नोट्स को पूरी तरह डिकोड कर लिया है। टीम ने इस मूल समस्या और उसके सटीक समाधान को दोबारा तैयार किया है।
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