शोध में दावा- गहरी सोच ही असली बुद्धिमत्ता:  आपका दिमाग घंटों मंथन करता है; दूसरों के आइडिया सुनकर उत्साहित होता है तो आप ‘जीनियस’
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शोध में दावा- गहरी सोच ही असली बुद्धिमत्ता: आपका दिमाग घंटों मंथन करता है; दूसरों के आइडिया सुनकर उत्साहित होता है तो आप ‘जीनियस’

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अक्सर बुद्धिमत्ता को तेज जवाब, शानदार भाषणों या अकादमिक उपलब्धियों से जोड़ा जाता है। पर असली बुद्धिमत्ता हमेशा इतनी चमकदार नहीं होती। मनोवैज्ञानिक एलिस बॉयस इसे ‘बौद्धिक रचनात्मकता’ कहती हैं- यानी विचारों के साथ खेलने की क्षमता। साइकोलॉजी टुडे में प्रकाशित शोध में एलिस ने बताया है कि बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो जिज्ञासु है, विचार परखता है और दूसरों से सीखने को तत्पर रहता है। यदि आपका दिमाग किसी पुराने विचार पर लंबे वक्त तक मंथन करता है या दूसरों के नए आइडियाज से उत्साहित होता है, तो यह संकेत है कि आप अपनी सोच से ज्यादा बुद्धिमान और रचनात्मक हैं। जानिए कुछ ऐसे ही लक्षण… विचारों की उथल-पुथल एलिस कहती हैं,‘आप किसी के आइडिया व सोचने के पैटर्न को जल्दी पकड़ लेते हैं। दिलचस्प उदाहरण सुनते ही उत्साहित होते हैं। हमेशा रचनात्मक व्यस्तता में रहते हैं, जहां छोटी बारीकियों व बड़े दार्शनिक सवालों के बीच आसानी से स्विच कर लेते हैं तो यह बुद्धिमता है। कभी फाइलों पर सोचते हैं, तो अगले ही पल इंसान की सदियों पुरानी गलतियों पर। यही ‘बौद्धिक रचनात्मकता’ सोच को गहराई और निरंतरता देती है।’ लगातार मंथन अक्सर लोग बातें सुनकर भूल जाते हैं, पर स्मार्ट व्यक्ति का ध्यान वहीं, अटका रहता है। रेडियो पर सुनी अच्छी बात या इंटरव्यू की लाइन… ड्राइविंग करते हुए भी जेहन में रहती है। यही लगातार मंथन बताता है कि आपका दिमाग जानकारी लेने के साथ उसका विश्लेषण भी करता है। विचारों की परख एलिस कहती हैं, स्मार्ट लोग सोचने के साथ अपने विचारों को परखते भी हैं। चीजों को आजमाते हैं, उनमें बदलाव करते हैं…नए तरीके भी अपनाते हैं। चाहे वह काम हो या किचन में बदलाव- अपनी सोच को वास्तविकता की कसौटी पर जरूर कसते हैं। कमी स्वीकारना बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा संकेत है… अपनी सोच पर विचार करना। स्मार्ट लोग पहचान लेते हैं कि कब अहंकार, आदतें या अनुभव उनके फैसले प्रभावित कर रहे हैं। अपनी बुद्धिमत्ता को रुकावट न बनने देना दुर्लभ व विनम्र गुण है, जो आपको खुद के प्रति ईमानदार बनाता है। सुधार की चाह आपका दिमाग स्वाभाविक रूप से देखता है कि क्या सही रहा, अगली बार क्या बेहतर हो सकता है। अक्सर पुरानी बातचीत दोहराते हैं, सोचते हैं कि बात कहने का और सटीक तरीका हो सकता था। सुधार की यही इच्छा आपको लगातार बेहतर बनाती है।



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