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किताबों से जानिए, क्यों प्रेरणा बाहर से नहीं थोपी जाती, भीतर से आती है? कैसे हमारी ऊर्जा और रचनात्मकता बढ़ती है? असली प्रेरणा बाहर से नहीं, भीतर से मिलती है
इंसान को सबसे ज्यादा प्रेरणा तब मिलती है जब उसे अपने काम में अर्थ और स्वतंत्रता महसूस होती है। जब उसे महसूस होता है कि वह अपने निर्णय खुद ले सकता है, अपनी क्षमता को बेहतर बना सकता है और उसका काम किसी बड़े उद्देश्य से जुड़ा है, तब उसके भीतर से असली प्रेरणा पैदा होती है। ऐसी प्रेरणा बाहर से नहीं थोपी जाती, भीतर से आती है। यही प्रेरणा साधारण काम को असाधारण बनाती है। (ड्राइव -डैनियल पिंक) साहसी लोग सवाल पूछते और चुनौती देते हैं
नई सोच रखने वाले लोग हमेशा भीड़ का अनुसरण नहीं करते। वे चीजों को अलग नजरिए से देखने की हिम्मत रखते हैं। कई बार उनकी सोच शुरुआत में अजीब या असंभव लग सकती है, लेकिन वही विचार बाद में बदलाव की शुरुआत बन जाते हैं। दुनिया में प्रगति उन्हीं लोगों के कारण होती है, जो सवाल पूछने से नहीं डरते और पुराने तरीकों को चुनौती देने का हमेशा साहस रखते हैं। (ओरिजिनल्स -एडम ग्रैंट) उत्साह है, तो कठिन काम भी सरल लगेंगे
अकसर हम सोचते हैं कि पहले सफलता मिलेगी, तब हम खुश होंगे। लेकिन सच्चाई इससे उलटी होती है। जब हम सकारात्मक सोच के साथ काम करते हैं, तब हमारी ऊर्जा और रचनात्मकता बढ़ती है। खुशी किसी उपलब्धि का परिणाम नहीं है; यह ऐसी मानसिक अवस्था है जो हमें बेहतर काम करने की शक्ति देती है। जब मन में उम्मीद और उत्साह होता है, तो कठिन काम भी हल्के लगने लगते हैं। (द हैपीनेस एडवांटेज -शॉन एकर) सफलता का रहस्य निरंतर काम करने की क्षमता में छिपा है
जीवन में महानता अचानक से नहीं आती है। यह उन साधारण कामों से धीरे-धीरे बनती है जिन्हें हम हर दिन करते हैं। जब कोई व्यक्ति लगातार अभ्यास करता है, अनुशासन बनाए रखता है और छोटे कामों को भी पूरी ईमानदारी से करता है, तब धीरे-धीरे वही साधारण दिन असाधारण परिणाम पैदा करते हैं। सफलता का रहस्य किसी जादुई क्षण में नहीं छिपा होता, बल्कि उस निरंतरता में होता है जिसके साथ हम रोज अपने काम को करते रहते हैं।
(चॉप वुड कैरी वॉटर -जोशुआ मेडकाफ)
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