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परिवार में रिश्ते सुधारने के लिए अक्सर लोग थेरेपी का सहारा लेते हैं। ऐसे में करीब एक-तिहाई माता-पिता का कहना है कि रिश्ते टूटने की बड़ी वजह थेरेपी रही। उनका दावा है कि थेरेपिस्ट की सलाह या असर से बच्चों ने परिवार से दूरी बना ली या संबंध तोड़ दिए। अमेरिका में 7 हजार माता-पिता पर हुए सर्वे में हर तीन में से एक ने कहा कि उनके वयस्क बच्चे के थेरेपिस्ट ने परिवार से संबंध काटने की सिफारिश की थी या उसी दिशा में प्रभावित किया था। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के थेरेपिस्ट व प्रोफेसर एमेरिटस विलियम डोहर्टी का कहना है कि आजकल हर मुश्किल को ट्रॉमा मानने का चलन बढ़ गया है। ऐसे में लोग रिश्ता तोड़ने को ही हल समझते हैं। माता-पिता या करीबी से रिश्ता तोड़ना बहुत मजबूरी वाला फैसला होना चाहिए, इसे थेरेपी में सामान्य सलाह नहीं बनाना चाहिए। पीढ़ियों की अलग सोच से बढ़ रही दूरियां जर्नल ऑफ मैरिज एंड फैमिली में छपी इस स्टडी के मुताबिक अमेरिका में 25% से ज्यादा युवा वयस्क मां, पिता या दोनों से रिश्ते तोड़ चुके हैं या कभी अलग रह चुके हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के फैमिली सोशियोलॉजिस्ट और ह्यूमन डेवलपमेंट के प्रोफेसर कार्ल पिलेमर ने कहा कि राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर पीढ़ियों के बीच बढ़ते तनाव से ऐसे मतभेद आगे और बढ़ सकते हैं। थेरेपिस्ट को अक्सर एक ही पक्ष की बात मिलती है मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट पीटर एंडरसन ने कहा कि थेरेपिस्ट को कई बार पूरी कहानी नहीं मिलती। कुछ जगहों पर थेरेपिस्ट को यह सिखाया जाता है कि क्लाइंट जो कह रहा है, उसे सीधे सच मान लें। ऐसे में वे एक पक्ष के बयान पर निष्कर्ष दे देते हैं। अलगाव हमेशा स्थायी नहीं होता: प्रोफेसर ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रिन रेचेक के मुताबिक कई लोग तनाव भरे रिश्तों से दूरी बेहतर मानते हैं। हालांकि स्टडी में पाया गया कि कई बच्चे बाद में माता-पिता से फिर बात करने लगते हैं, कुछ उन्हें साथ में थैरेपी के लिए भी तैयार करते हैं।
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