40 साल में बदल गई लग्जरी की परिभाषा:  95% परिवारों के पास मोबाइल; 4 दशक में 16 गुना बढ़े घरेलू हवाई यात्री
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40 साल में बदल गई लग्जरी की परिभाषा: 95% परिवारों के पास मोबाइल; 4 दशक में 16 गुना बढ़े घरेलू हवाई यात्री

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एक समय था जब स्कूटर खरीदने के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता था। घर में टेलीफोन लग जाना, रंगीन टीवी, फ्रिज या एयर कंडीशनर होना संपन्नता की पहचान माना जाता था। हवाई यात्रा और विदेश घूमना तो सिर्फ चुनिंदा लोगों के हिस्से की बात थी। लेकिन पिछले तीन-चार दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीक और उपभोक्ता बाजार में आए बदलावों ने तस्वीर बदल दी है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे (एचसीएचईएस) 2023-24 सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च कंपनियों के आंकड़े बताते हैं कि जो चीजें कभी लग्जरी थीं, वे अब मध्यम वर्ग और कई मामलों में निम्न-मध्यम वर्ग तक पहुंच चुकी हैं। अब लग्जरी की नई परिभाषा महंगी वस्तुओं से आगे बढ़कर समय, सुविधा, निजी अनुभव और पर्सनलाइजेशन तक पहुंच गई है। कभी फोन, स्कूटर, फ्रिज जैसी चीजें स्टेटस सिंबल थीं, अब आम होती जा रही हैं फोन – आज से 4 दशक पहले घरों में लैंडलाइन फोन होना एक लग्जरी मानी जाती थी। 1995 में मोबाइल सेवा शुरू हुई। तब बहुत कम मोबाइल फोन थे। हैंडसेट की कीमत 25-40 हजार रु. थी। इनकमिंग में भी 7-8 रु. प्रति मिनट लगता था। आज देश में 125 करोड़ से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन हैं। 95% से ज्यादा परिवारों के पास मोबाइल फोन हैं। फ्रिज – 2011-12 में ग्रामीण भारत के केवल 9.4% घरों में फ्रिज था। 2023-24 में यह 33.2% हो गया। शहरी क्षेत्रों में 43.8% से बढ़कर 68.1% हो गए। हवाई यात्रा – 1990 के दशक में 1 करोड़ घरेलू हवाई यात्राओं से बढ़कर ये आंकड़ा हर साल 16 करोड़ से अधिक हो गया है। कार-दोपहिया – कभी कार लग्जरी आइटम मानी जाती थी। महीनों इंतजार और अतिरिक्त पैसे देने के बाद भी दोपहिया मिलना मुश्किल होता था। 2011-12 में भी देश के 19% परिवारों के पास कार थीं। 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 59% हो गया। शहरी क्षेत्रों में 40.1% परिवारों से यह आंकड़ा बढ़कर 68.2% परिवार हो गया। ब्रांडेड ज्वेलरी, लग्जरी वॉचेज, कपड़े – डी बियर्स इंडिया डायमंड एक्विजिशन स्टडी के अनुसार, भारत दुनिया में डायमंड ज्वेलरी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। देश का वैश्विक मांग में 12% हिस्सा है, जो 2019 में 10% था। इप्सॉस के मुताबिक देश में लग्जरी वस्तुओं का मार्केट 2025 में 1.1 लाख करोड़ रुपए का था यह 2030 के बीच 74% सालाना की दर से बढ़ने की उम्मीद है। भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते 3 लग्जरी मार्केट में शामिल है। लोगों की आमदनी और खर्च करने के हौसले दोनों में बढ़ोतरी हो रही सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में लोगों के पास खर्च करने योग्य आय 2023-24 में 294.55 लाख करोड़ रुपए थी जो 2024-25 में करीब 325 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। 2023 से 2028 के बीच ‘अल्ट्रा हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स’ (यूएनएचआई) की आबादी 50% बढ़ने की उम्मीद है। नए अमीरों की लग्जरी सामान की बिक्री में आधी हिस्सेदारी है। 2027 तक इनकी संख्या 10 करोड़ तक पहुंच जाएगी। भारत में बदलते लग्जरी के 10 ट्रेंड निवेश भी – महंगी घड़ियां, ज्वेलरी, कला उत्पाद निवेश के रूप में भी खरीदे जा रहे हैं।
कस्टमाइज लग्जरी – पसंद के हिसाब से बने उत्पादों की मांग।
सोशल मीडिया नया शोरूम – सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लग्जरी ब्रांड खोजने का माध्यम बन रहे।
अनुभव नई लग्जरी – लग्जरी यात्रा, वेलनेस, निजी सेवाओं, अनुभवों पर खर्च बढ़ रहा है।
भारतीय विरासत की चमक – आयुर्वेद और भारतीय हस्तशिल्प अब ग्लोबल लग्जरी बन रहे। जिम्मेदार लग्जरी – नई पीढ़ी टिकाऊ उत्पादन, नैतिक सोर्सिंग और पर्यावरण हितैषी ब्रांडों को प्राथमिकता दे रही है।
लोकल से ग्लोबल – भारतीय ब्रांड दुनिया के बाजारों में पहुंच रहे।
तकनीक से बदलाव – एआई, वर्चुअल ट्राई-ऑन और डिजिटल सेवाएं लग्जरी को व्यक्तिगत और सुविधाजनक बना रही हैं।
लग्जरी एक जीवनशैली – अब लग्जरी का मतलब समय, मानसिक शांति, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन गुणवत्ता भी है।
आम आदमी की पहुंच में – आसान फाइनेंसिंग ने प्रीमियम उत्पादों को मध्यम वर्ग की पहुंच में ला दिया है। (सोर्स: इप्सॉस)



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