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5-5 मिनट की छोटी-छोटी सी प्रैक्टिस बढ़ाती है आत्मविश्वास: अटके काम पूरा करने का फॉर्मूला- ‘प्रोडक्टिविटी स्नैकिंग’; छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पूरे करें बड़े गोल

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अक्सर हम बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लंबा समय निकालने की योजना बनाते हैं, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी में वो ‘फ्री टाइम’ कभी मिलता ही नहीं। नतीजा- काम टलता रहता है और गिल्ट बढ़ता जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स अब एक नया ट्रेंड अपनाने की सलाह दे रहे हैं- ‘प्रोडक्टिविटी स्नैकिंग’। यानी जैसे आप दिनभर में भोजन के बीच हल्के-फुल्के स्नैक्स खाते हैं, ठीक वैसे ही अपने बड़े लक्ष्यों को दिनभर में 5-10 मिनट के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर पूरा कर सकते हैं। लेखक डेविड रॉबसन बताते हैं, ‘पिछले साल जब मैं 40 का हुआ, तो मैंने गिटार सीखने का मन बनाया। लक्ष्य था कि रोजाना 30 मिनट रियाज करूंगा। लेकिन, दूसरी जिम्मेदारियों के चलते हफ्ते में एक-दो बार भी आधा घंटा निकालना भारी पड़ने लगा। गिटार कमरे के कोने में धूल फांकने लगा।’ तभी डेविड को ‘प्रोडक्टिविटी स्नैकिंग’ का आइडिया मिला। उन्होंने दिनभर में मिलने वाले छोटे गैप्स जैसे- दफ्तर की कॉल खत्म होने के बाद, चाय के ब्रेक में या आर्टिकल लिखने के तुरंत बाद सिर्फ 5-5 मिनट गिटार हाथ में लेना शुरू किया। नतीजा यह हुआ कि बिना किसी मानसिक तनाव के उनका रियाज भी होता रहा और प्रोग्रेस भी। यह तरीका सबसे पहले फिटनेस की दुनिया में मशहूर हुआ। ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ हफ्ते में 150 मिनट एक्सरसाइज की सलाह देता है। लेकिन, ज्यादातर लोग इतना समय न होने के डर से शुरुआत ही नहीं करते। स्पोर्ट्स साइंटिस्ट्स ने इसका तोड़ निकाला- ‘एक्सरसाइज स्नैकिंग’। लैपटॉप पर एक घंटा बैठने के बाद 5 पुश-अप्स लगा लें या टीवी में विज्ञापन के दौरान अपनी जगह पर ही एक मिनट जॉगिंग कर लें। रिसर्च के मुताबिक, यह तरीका ब्लड प्रेशर और इंसुलिन लेवल सुधारने में बेहद असरदार है। सबसे खास बात यह कि इसमें वर्कआउट छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) महज 12% रहती है, जबकि सामान्य जिम रुटीन में 33% से ज्यादा लोग शुरुआत में ही हार मान लेते हैं। प्रोग्रेस प्रिंसिपल यानी बार-बार दोहराना रिसर्च बताती है कि जब आप 5 मिनट का कोई छोटा लक्ष्य हासिल करते हैं, तो दिमाग में डोपामाइन (हैप्पी हार्मोन) रिलीज होता है। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप उस काम को बार-बार दोहराना चाहते हैं। मनोविज्ञान में इसे ‘प्रोग्रेस प्रिंसिपल’ कहते हैं।



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